राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शनिवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 को निरस्त करने के एकलपीठ के आदेश को सही माना है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की खंडपीठ ने सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि इस भर्ती की शुचिता पूरी तरह भंग हो चुकी थी और पेपरलीक के साक्ष्य इतने गहरे थे कि सही और गलत अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना नामुमकिन था।
क्यों रद्द हुई भर्ती? 5 बड़े कारण
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में उन प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाया है जो एसओजी (SOG) और एसआईटी (SIT) की जांच में सामने आए थे:
- आरपीएससी सदस्यों की संलिप्तता: जांच में पाया गया कि परीक्षा से पहले ही आरपीएससी (RPSC) के सदस्यों ने पेपर लीक किया था।
- साक्ष्यों को नष्ट करना: कोर्ट ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को हटा दिया गया है, जिससे अब यह छंटनी करना असंभव है कि कौन सा अभ्यर्थी ईमानदारी से पास हुआ और कौन नकल से।
- एसओजी की रिपोर्ट: एसओजी और एसआईटी की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर धांधली की पुष्टि की गई है।
- मंत्रिमंडलीय समिति की सिफारिश: एजी, एसओजी और उप-मंत्रिमंडलीय समिति ने पहले ही इस भर्ती को रद्द करने की सिफारिश की थी।
- मेहनती अभ्यर्थियों के साथ न्याय: कोर्ट ने कहा कि धांधली वाली भर्ती को जारी रखना उन मेहनती युवाओं के साथ अन्याय होगा जिन्होंने कड़ी मेहनत से परीक्षा दी थी।
अब आगे क्या? सरकार और पक्षकारों के पास क्या हैं विकल्प?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें आगामी कानूनी विकल्पों पर टिकी हैं:
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती (SLP): पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता एस.एन. कुमावत और पूर्व न्यायाधीश अशोक गौड़ के अनुसार, अब हाईकोर्ट के बाद केवल सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का ही विकल्प बचता है।
- सरकार का रुख: राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा है कि सरकार अभी हाईकोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन करेगी और उसके बाद ही तय किया जाएगा कि इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी है या नहीं।
- दोषियों पर कार्रवाई: एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने साफ किया है कि भर्ती रद्द होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

क्या सुप्रीम कोर्ट से बहाल हो सकती है परीक्षा?
देश के अन्य राज्यों के उदाहरण बताते हैं कि हाईकोर्ट द्वारा रद्द की गई भर्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने कई बार बहाल भी किया है:
- यूपी एसआई (2016-17): हाईकोर्ट द्वारा फंसी भर्ती को सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट देकर बहाल किया था।
- बिहार शिक्षक (2023): प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति को शीर्ष अदालत ने बहाल किया था।
- हरियाणा जेबीटी व मप्र व्यापम: इन मामलों में भी सालों बाद सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्तियों को सही ठहराया था।
राजस्थान के मामले में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चयनित अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट की शरण लेते हैं और क्या वहां उन्हें ‘क्लीन चिट’ मिल पाती है।


