तूंगा (देवगांव)। तूंगा समेत आसपास के क्षेत्र के रोडवेज यात्रियों और ग्रामीणों की एकजुटता के आगे आखिरकार रोडवेज प्रशासन को झुकना पड़ा है। राजस्थान पत्रिका में 18 मार्च को ‘रोडवेज बस का समय बदला तो भड़के यात्री, तूंगा बस स्टैंड पर किया प्रदर्शन’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद विभाग ने दौसा से डिग्गी मार्ग पर संचालित बस को पुनः पुराने निर्धारित समय पर चलाने के आदेश जारी कर दिए हैं। गुरुवार सुबह जब बस अपने पुराने समय पर बस स्टैंड पहुंची तो यात्रियों के चेहरे खिल उठे और लोगों ने राहत की सांस ली।
पुराने समय से ही होगा सुगम सफर
गौरतलब है कि केकड़ी डिपो की इस बस का समय अचानक लगभग एक घंटे पहले कर दिया गया था, जिससे तूंगा, लवाण, कोटखावदा और आसपास के दर्जनों गांवों के यात्रियों की दिनचर्या प्रभावित हो गई थी। वर्षों से एक ही समय पर यात्रा कर रहे व्यापारी, छात्र और कर्मचारी अचानक हुए इस बदलाव से परेशान हो गए थे। समय में बदलाव के कारण कई लोग बस छूटने से परेशान हो रहे थे, जबकि कुछ को अपनी दिनचर्या में अनावश्यक बदलाव करना पड़ रहा था। इससे आमजन में असंतोष बढ़ता जा रहा था।
इसी के विरोध में पिछले दिनों तूंगा मुख्य बस स्टैंड पर ग्रामीणों और नियमित यात्रियों ने रोडवेज प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में पुरानी समय-सारणी बहाल करने की मांग उठाई और चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विभाग ने लिया त्वरित संज्ञान
यात्रियों के विरोध और जनहित से जुड़े इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद रोडवेज के मुख्य प्रबंधक और संबंधित डिपो अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। विभाग ने यात्रियों की सुविधा, स्थानीय परिस्थितियों और राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया।
इसके बाद समय परिवर्तन के निर्णय को वापस लेने का फैसला किया गया। अब यह बस पूर्व की तरह ही अपने निर्धारित समय पर संचालित होगी, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। डिग्गी कल्याण जी जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इससे विशेष सुविधा मिलेगी।
यात्रियों ने जताया आभार
पुरानी समय-सारणी बहाल होने पर स्थानीय व्यापारियों, छात्रों और नियमित यात्रियों ने खुशी जताई है। लोगों ने रोडवेज प्रशासन और मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर कार्रवाई से उनकी समस्या का समाधान हो गया। यात्रियों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में बिना स्थानीय फीडबैक के ऐसे निर्णय न लिए जाएं, ताकि आमजन को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।


