Rajasthan Politics : पंचायत-नगरीय चुनाव पर कांग्रेस-भाजपा में जुबानी जंग, डोटासरा vs खर्रा-दिलावर, जानें एकदूसरे को क्या कहा?

Rajasthan Politics : पंचायत-नगरीय चुनाव पर कांग्रेस-भाजपा में जुबानी जंग, डोटासरा vs खर्रा-दिलावर, जानें एकदूसरे को क्या कहा?

Rajasthan Politics : राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि हार के डर से सरकार चुनाव नहीं कराना चाहती। इसी कारण ओबीसी आयोग का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया गया है।

डोटासरा ने बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से कहा कि यदि लंबे समय तक रिपोर्ट नहीं मिलती है तो यह राजस्थान सरकार की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारी दो तरह की मतदाता सूचियां जारी कर रहे हैं। एक एसआइआर से पहले की, जिसमें गड़बड़ियां और फर्जी नाम हैं, तथा दूसरी एसआइआर के बाद की।

कांग्रेस इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग को जल्द ज्ञापन देगी और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट जाएगी। उन्होंने गैस संकट को लेकर कहा कि सिलेंडर 3,500 रुपए तक में ब्लैक में बिक रहा है, जिससे आमजन और उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।

डोटासरा अपने गिरेबान में झांकें : खर्रा

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि नगर निकायों के चुनाव जल्द से जल्द हों। हम आवश्यक वैधानिकता के साथ चुनाव कराने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि डोटासरा इस तरह की बयानबाजी से पहले वो अपने गिरेबान में झांकें। उन्होंने अपने कार्यकाल में चुनाव को मजाक बना कर रखा था।

लोकतंत्र के हत्यारे कर रहे हैं लोकतंत्र की बात – मदन दिलावर

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जिन लोगों ने सन 1975 में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का गला घोट दिया और 17 साल तक ग्राम पंचायतों के चुनाव नहीं कराए। ऐसे लोकतंत्र के हत्यारे लोकतंत्र की बात कर रहे हैं।

ओबीसी आयोग का कार्यकाल 30 सितंबर तक बढ़ाया

राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव अब सितंबर के बाद होने की संभावना है। भजनलाल ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मंगलवार को एक बार फिर ओबीसी आयोग का कार्यकाल 6 माह बढ़ा कर 30 सितंबर, 2026 तक कर दिया है। अब यह तय माना जा रहा है कि पंचायत और निकाय चुनाव अब सितंबर के बाद ही कराए जाएंगे। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण तय करने के लिए गठित आयोग अब तक अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं दे पाया है। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद ही चुनाव को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।

सूत्रों के मुताबिक, पिछड़ा वर्ग आयोग को 400 से ज्यादा ग्राम पंचायतों का डेटा नहीं मिला तो उसने इस संबंध में पंचायत राज विभाग से जानकारी मांगी थी। इसको लेकर विभाग ने आयोग को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि संबंधित डेटा पहले ही आयोजना विभाग से लिया गया था और वही विभाग इस जानकारी के लिए जिम्मेदार है।

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