Rajasthan News : अब प्रदेश भर के ‘गिरदावरों’ ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, ले लिया ये फैसला

Rajasthan News : अब प्रदेश भर के ‘गिरदावरों’ ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, ले लिया ये फैसला

राजस्थान की राजस्व व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले भू-अभिलेख निरीक्षक (गिरदावर) अब सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। राजस्थान कानूनगो संघ के बैनर तले प्रदेशभर के भू अभिलेख निरीक्षक (गिरदावर) कल गुरुवार 26 फरवरी और परसों शुक्रवार 27 फरवरी 2026 को अजमेर स्थित राजस्व मंडल (Board of Revenue) के बाहर विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे।

क्यों उग्र हुए प्रदेश के ‘कानूनगो’?

इस विरोध-प्रदर्शन की मुख्य जड़ नियमित डीपीसी (Departmental Promotion Committee) का न होना है। गिरदावरों का आरोप है कि राज्य सरकार की सहमति और कार्मिक विभाग के आदेशों के बावजूद राजस्व मंडल प्रशासन जानबूझकर पदोन्नति प्रक्रिया में देरी कर रहा है।

अटक गई डीपीसी: साल 2025-26 के लिए भू-अभिलेख निरीक्षक (ILR) से नायब तहसीलदार पद पर होने वाली नियमित डीपीसी अभी तक नहीं की गई है।

जोधपुर संभाग का मामला: संघ के अनुसार, कार्मिक विभाग की सहमति के बाद भी जोधपुर संभाग की रिव्यू डीपीसी के लिए सरकारी आदेशों की पालना नहीं की जा रही है।

बिना प्रमोशन रिटायरमेंट का दर्द

पदोन्नति में हो रही इस प्रशासनिक देरी का सबसे मानवीय पक्ष यह है कि प्रदेश के कई वरिष्ठ गिरदावर अपने पद से ऊपर उठे बिना ही सेवानिवृत्त (Retire) हो रहे हैं।

“हैरानी की बात है कि कई अधिकारी प्रमोशन की योग्यता रखते हुए भी वरिष्ठता के अभाव में उसी पद से घर जा रहे हैं, जिस पर वे सालों से तैनात थे। कई अन्य रिटायरमेंट के बेहद करीब हैं और यदि अब भी डीपीसी नहीं हुई, तो उन्हें भारी आर्थिक और पद प्रतिष्ठा का नुकसान होगा।” — राजस्थान कानूनगो संघ

महासमिति की बैठक और आंदोलन की चेतावनी

बता दें कि 21 फरवरी को राजस्थान कानूनगो संघ की एक अहम बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में प्रदेशभर से आए प्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। अध्यक्ष सुरेशपाल सिंह ने कहा कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद जब मंडल प्रशासन ने सुध नहीं ली, तब मजबूरन आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा।

राजस्व कार्यों पर पड़ेगा बड़ा असर

गिरदावरों के इस दो दिवसीय सामूहिक अवकाश और धरने से प्रदेशभर में जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

जमीन का सीमांकन और नामांतरण: गिरदावरों के हड़ताल पर रहने से म्यूटेशन (नामांतरण) और सीमांकन के मामले लटक सकते हैं।

सरकारी रिपोर्ट: सरकारी योजनाओं और राजस्व संबंधी रिपोर्ट तैयार करने का काम भी बाधित होने की आशंका है।

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