दौसा। समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद व्यवस्था को लेकर सरकारी सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं। हालात यह हैं कि सरसों की फसल बाजार में आकर व्यापारियों के पास बिक रही है, लेकिन उसकी सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर गेहूं की अधिकांश फसल अभी खेतों में ही खड़ी है, इसके बावजूद सरकार ने उसकी खरीद 10 मार्च से शुरू करने का फैसला किया है। इस व्यवस्था को लेकर किसानों में असमंजस और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। किसान सरकारी खरीद सिस्टम को सुधारने की मांग उठा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि सरसों की खरीद पहले शुरू होनी चाहिए। ताकि किसानों को कम दाम पर अपनी उपज नहीं बेचनी पड़ी। जो फसल पहले पककर बाजार में आए, उसकी खरीद पहले हो, जो फसल बाद में पके, उसकी खरीद बाद में हो। अभी इसके ठीक विपरीत हो रहा है। सरसों पहले पक रही है, उसकी खरीद बाद में हो रही है, गेहूं की फसल बाद में पकेगी, उसकी खरीद पहले शुरू कर दी।
किसानों की जरूरत के अनुसार हो उपज की खरीद
भंडाना के किसान मनोहर तथा बांदीकुई के कमलेश व मुकेश ने बताया कि उपज की खरीद किसानों की जरूरत के अनुसार की जानी चाहिए। वहीं भारतीय खाद्य निगम दौसा के किस्म निरीक्षक राजेश मीणा ने बताया कि सरकार के निर्देश की पालना में खरीद की पूरी तैयारी कर ली है। अनेक किसान पंजीयन करवा रहे हैं। वहीं सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार रामस्वरूप सिंधु ने बताया कि सरसाें की खरीद पंद्रह मार्च से शुरू की जाएगी। समर्थन मूल्य 6200 रुपए प्रति क्विंटल है।
गेहूं की खरीद
समर्थन मूल्य: 2585 रुपए प्रति क्विंटल
बोनस: 150 रु प्रति क्विंटल
खरीद: दस मार्च से
केन्द्र: बांदीकुई, दौसा, लालसोट, मंडावरी,महुवा, मण्डावर
सरसों की खरीद
समर्थन मूल्य: 6200 रुपए
सरकारी खरीद: 15 मार्च से
पिछले वर्ष खरीद: 8228 क्विंटल
इस बार सरसों की बुवाई: 69815 हेक्टेयर
खरीद केन्द्र: दौसा, लालसोट, बांदीकुई, मण्डावर, सिकराय, जसोता, बड़ागांव भांडारेज, रामगढ़ पचवारा, राहुवास, महवा


