Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल मामलों के बोझ और जजों की कमी के कारण किसी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। अगर निकट भविष्य में अपील की सुनवाई संभव नहीं है, तो सजा को निलंबित कर जमानत देने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि 20 से 30 वर्षों से लंबित आपराधिक अपीलों पर सुनवाई न होने को लेकर अदालत ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर हाई कोर्ट के पास अपीलों का इतना अंबार है कि निकट भविष्य में सुनवाई संभव नहीं दिख रही, तो सजा को सस्पेंड करना ही सही विकल्प है। किसी को बिना वजह वर्षों तक सलाखों के पीछे रखना नहीं चाहिए।
हजारों केस कई साल से पेंडिंग
राजस्थान हाईकोर्ट ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राजस्थान में हजारों केस ऐसे हैं जो 20 से 30 साल पुराने है। अदालत ने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति को त्वरित न्याय पाने का हक है।
राजस्थान हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब उन पुराने मामलों में जमानत मिलना आसान होगा जहां सुनवाई में बहुत ज्यादा वक्त लगने वाला है।


