Rajasthan Drinking Water Supply News: राजस्थान समेत देश भर में गर्मी के तेवर तीखे हो रहे हैं। राजस्थान मे तो मार्च महीने में ही बीस से ज्यादा जिलों का तापमान 37 डिग्री से 41 डिग्री के नजदीक जा पहुंचा है। अभी तो गर्मी शुरू ही हुई है, ऐसे में कई इलाकों मे जल संकट भी शुरू हो गया है। गर्मी में पानी की पूर्ति को लेकर सीएम भजन लाल शर्मा ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जलदाय विभाग से ताल्लुक रखने वाले कर्मचारियों के अवकाश रद्द करने के साथ ही लंबा-चौड़ा बजट भी जारी किया है। अब इंजीनियर से लेकर लाइनमैन तक सभी को फील्ड में मुस्तैद रहना होगा।
कंट्रोल रूम से होगी सीधी निगरानी
जनता की प्यास बुझाने और पेयजल से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए राज्य स्तर के साथ-साथ सभी जिलों में जिला स्तरीय पेयजल नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए गए हैं। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि कहीं भी पाइपलाइन लीकेज या किल्लत होने पर तुरंत समाधान हो सके। इनका नंबर भी सरकार जल्द ही जारी करने वाली है ताकि पेयजल जरा भी बर्बाद नहीं हो। टीम को सूचना मिलते ही टीमें तुरंत एक्शन ले सकें।
खुल गया सरकारी खजाना, 210 करोड़ से ज्यादा का बजट
सरकार ने केवल निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि वित्तीय संसाधनों के लिए तिजोरी भी खोल दी है। सरकार ने इस साल गर्मियों में निर्बाध जलापूर्ति के लिए दो सौ दस करोड़ का बजट जारी किया है। शहरों से लेकर गांव-गांव तक जल पहुंचाने के लिए इसे स्वीकृत किया गया है। शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए 55.88 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्र में 154.83 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। साथ ही टैंकर से पानी की सप्लाई को लेकर भी खास प्लान तैयार किया गया है। जिन इलाकों में पेयजल लाइन से पानी पहुंचाना मुश्किल है ऐसे इलाकों में एक अप्रेल से लेकर 31 जुलाई तक टैंकरों से पानी सप्लाई का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए सौ करोड़ से भी ज्यादा का प्रावधान रखा गया है। इतना ही नहीं, मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्यों के लिए बड़ी संख्या में श्रमिकों और वाहनों की तैनाती की जाएगी। पीक सीजन (मई से जुलाई) में 2500 श्रमिक और 450 किराए के वाहन हर महीने तैनात रहेंगे।
कलेक्टर्स को मिली ‘पावर’: इमरजेंसी में खर्च कर सकेंगे 1-1 करोड़
व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए जिला कलेक्टर्स को विशेष अधिकार दिए गए हैं। आकस्मिक कार्यों (Emergency Works) के लिए हर जिले को 1-1 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा, जल जीवन मिशन (JJM) के तहत जो योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उनके बेहतर संचालन के लिए हर जिले को 25-25 लाख रुपए अतिरिक्त दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फील्ड स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य है। विशेष परिस्थितियों में केवल उच्चाधिकारियों की सिफारिश पर ही अवकाश मिल सकेगा, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सप्लाई चेन प्रभावित न हो।


