जयपुर। प्रदेश में कॉलेज छात्राओं को प्रोत्साहन के तौर पर दी जाने वाली स्कूटी योजना इस बार प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के आंकड़ों के मुताबिक सत्र 2024-25 और 2025-26 की 64 हजार छात्राओं को स्कूटी का वितरण होना है। पिछले सत्र की पात्र छात्राएं अब नए शैक्षणिक वर्ष में पहुंच गईं, लेकिन उन्हें वादा की गई स्कूटी नहीं मिली है। हाल ही विधानसभा में मामला उठने के बाद एक बार फिर स्कूटी वितरण में की जा रही लापरवाही का मामला उठा है।
सरकार ने प्रति स्कूटी 70 हजार रुपये की अधिकतम कीमत तय कर रखी है। आयुक्तालय का तर्क है कि तय दर पर कंपनियों ने टेंडर में पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई, जिससे प्रक्रिया अटक गई। इसके बाद आयुक्तालय ने कोई रूचि नहीं दिखाई।
इन योजनाओं के तहत मिलती है फ्री स्कूटी
दरअसल, प्रदेश में स्कूटी वितरण मुख्य रूप से मेधावी छात्राओं और उच्च शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं के तहत होता है। इनमें देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना, कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना और मुख्यमंत्री मेधावी छात्रा स्कूटी योजना जैसी पहल शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य दूरदराज क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज आने-जाने में सुविधा देना और ड्रॉपआउट कम करना है।
छात्राएं निजी साधनों या बसों पर निर्भर
इस बार देरी ने योजनाओं के मकसद पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। कई छात्राएं निजी साधनों या बसों पर निर्भर हैं, जिससे समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों की छात्राओं का कहना है कि कॉलेज तक पहुंचने में रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। स्कूटी मिलने से उनकी पढ़ाई और सुरक्षा दोनों बेहतर होतीं, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हो रहा।
योजना क्रियान्वयन की क्षमता पर भी प्रश्नचिह्न
विशेषज्ञों का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया समय पर शुरू न करना और बाजार की वास्तविक कीमतों का आकलन न करना आयुक्तालय की बड़ी चूक है। यदि दरें प्रतिस्पर्धी नहीं होंगी तो कंपनियों की भागीदारी कम रहना स्वाभाविक है। दूसरी ओर, दो सत्रों का वितरण लंबित रहने से बजटीय प्रबंधन और योजना क्रियान्वयन की क्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है। हर साल स्कूटी वितरण को सरकार की ‘बेटी शिक्षा’ पहल से जोड़ा जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर देरी से इसका संदेश कमजोर पड़ रहा है।
प्रक्रियाधीन है, जल्दी करेंगे
मामला प्रक्रियाधीन है। हमने 2021 से 2023 तक 40 हजार स्कूटी बांट दी। अब शेष सत्रों की स्कूटी वितरण की तैयारी है। -ओपी बैरवा, आयुक्त कॉलेज शिक्षा


