सांचौर। शहर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-68 पर 270 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे एलिवेटेड पुल की गुणवत्ता फिर सवालों के घेरे में है। निर्माण कंपनी द्वारा दरार (क्रेक) आए स्लैब के उपयोग के आरोप सामने आए हैं, जिससे पुल की मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
निर्माण में जिन स्लैबों का उपयोग किया जा रहा है, उनमें स्पष्ट रूप से बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, इसके बावजूद उन्हें पुल में लगाया जा रहा है। आरोप है कि एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) का कोई भी तकनीकी अधिकारी नियमित रूप से मौके पर मौजूद नहीं रहता, जिससे निर्माण कंपनी नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से कार्य कर रही है।
यहां गंभीर लापरवाही
एलिवेटेड पुल में उपयोग किए जा रहे स्लैबों में डीओसी संख्या 4.12.26, स्पेन 45-46, जी-3, एल 33-631 के स्लैब में गंभीर दरार होने के बावजूद उसका उपयोग किया गया। इसके अलावा भी कई अन्य स्लैब ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनकी गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।
पूर्व में भी गुणवत्ता को लेकर उठे थे सवाल
इससे पूर्व भी एलिवेटेड पुल के पिलरों में दरार आने का मामला सामने आया था, जिसे लेकर निर्माण कंपनी की भूमिका पर सवाल उठे थे। उस समय जिला कलेक्टर तथा संबंधित विभाग द्वारा अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया था। इसके साथ ही सांसद द्वारा भी पुल की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी। यह मुद्दा लंबे समय तक जनसुनवाई में भी उठता रहा। इतने गंभीर मामलों के बावजूद एनएचएआई द्वारा अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाए जाने से विभाग की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
इन्होंने कहा
एलिवेटेड पुल का निर्माण मेरी देखरेख में हो रहा है। यदि दरार वाला स्लैब उपयोग में लिया जा रहा है तो इसकी जानकारी लेता हूं।
- नरेंद्र कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई बाड़मेर


