Rajasthan: बंद मकान में मिले मां और दो बेटों के शव, घर से आ रही थी बदबू, सुसाइड नोट मिला

Rajasthan: बंद मकान में मिले मां और दो बेटों के शव, घर से आ रही थी बदबू, सुसाइड नोट मिला

पाली। शहर के औद्योगिक थाना क्षेत्र स्थित आशापूर्णा टाउनशिप में गुरुवार को एक बंद मकान में मां और दो बेटों के शव मिले। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर सीओ सिटी और औद्योगिक थाना प्रभारी मय जाप्ता मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने मकान का दरवाजा खुलवाकर अंदर प्रवेश किया तो कमरे में महिला और उसके दो बेटों के शव पड़े मिले। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तीनों की मौत कुछ समय पहले ही हो चुकी थी, जिसके कारण शवों से दुर्गंध आने लगी थी। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। मौत से पहले तीनों ने अपने रिश्तेदारों को आधार कार्ड और फोटो भेजे थे।

मृतकों की पहचान शांति देवी (65), नरपत लाल (34) और रघुवीर (26) के रूप में हुई है। मां-बेटों की मौत के कारणों का अभी कोई खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच में जुटी है और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य

मौके पर एफएसएल टीम को भी बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर बांगड़ अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के हर एंगल से जांच की जा रही है। परिजनों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

दो मोबाइल और सुसाइड नोट बरामद

डीएसपी सिटी मदन सिंह ने बताया कि शाम करीब 5 बजे थाने में सूचना मिली कि रिश्तेदार फोन नहीं उठा रहे हैं और मकान का गेट अंदर से बंद है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो मां और दो बेटों की शव फर्श पर पड़े मिले। तीनों के शव बांगड़ अस्पताल के मोर्चरी में रखवाया है। मौके से दो मोबाइल और एक सुसाइड नोट भी मिला है।

बुधवार को हुई थी आखिरी बार बात

मृतक के मौसेरे भाई लक्ष्मण ने बताया कि उसकी आखिरी बार नरपत लाल से बुधवार सुबह करीब 10 बजे फोन पर बात हुई थी। नरपत ने उससे कहा था कि उसे अस्पताल में दिखाना है। रात को मैंने यहां किसी को भेजा तो दरवाजा बंद मिला। इसके बाद रातभर फोन किया, लेकिन किसी ने नहीं उठाया। गुरुवार सुबह भी फोन नहीं उठने पर वह खुद मौके पर पहुंचा, जहां मकान बंद था और बाहर बाइक खड़ी मिली। लक्ष्मण ने बताया कि नरपत बीमार था, जिसके कारण आठ माह से कोई काम नहीं कर रहा था। रघुवीर मोबाइल की दुकान काम करता था। दोनों भाइयों की शादी भी नहीं हुई थी।

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