राजा खेमकरण जयंती आज:हेरिटेज लुक में 55 पैनल व मूर्तियों से समझाएंगे राजा खेमकरण की जीवन गाथा

हिंदू विरोधी आलमगीर के खिलाफ ब्रज में आक्रोश को नेतृत्व देने वाले राजा खेमकरण की जयंती 14 जनवरी बुधवार को मनाई जाएगी। भरतपुर की स्थापना से पूर्व उन्होंने चौबुर्जा के निकट फतहगढ़ी बनाई थी। उन्होंने मुगलों के जजिया कर का विरोध किया। मुगलों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं। ब्रज में जाट शक्ति के उदय में राजा खेमकरण का भी विशेष योगदान माना जाता है। राजस्थान धरोहर प्राधिकरण की ओर से राजा खेमकरण की याद में पैनोरमा बनाया जा रहा है, जो तुहिया गांव के पास मथुरा रोड पर बाईपास के निकट बनेगा। इसके लिए 9500 वर्ग फीट जमीन चिन्हित हो चुकी है। इसकी डीपीआर बन गई है और इस सप्ताह टेंडर प्रक्रिया होगी। करीब 4 करोड़ की लागत से बनने वाले पैनोरमा में सिविल वर्क 2.5 करोड़ का होगा। इसमें हेरिटेज स्टाइल में बिल्डिंग बनाई जाएगी, जिसमें पिंक स्टोन से दो एंट्री गेट, जाली, झरोखे, मेहराब, छतरी, बारहदरी, बरामदा, गैलरी, फव्वारा, केनोपी, दो पार्क आदि का निर्माण होगा। इसमें फाइबर के करीब 55 पैनल और मूर्तियां लगाई जाएंगी, जिनमें कई थ्री-डी होंगी। एल्यूमिनियम कंपोजिट पैनल भी लगेंगे, जिनमें राजा खेमकरण की संघर्ष गाथा को दर्शाया जाएगा। शेर से लड़ते हुए राजा खेमकरण की करीब 10 फीट की गन मेटल प्रतिमा भी लगेगी।प्राधिकरण के एईएन अंकित माथुर ने बताया कि राजा खेमकरण पैनोरमा की डीपीआर बन गई है। अगले सात दिन में टेंडर जारी होंगे। निर्माण की समयावधि सवा साल है। राजा खेमकरण जयंती समारोह आज हिंदू धर्म रक्षक वीर शिरोमणि राजा खेमकरण की जयंती 14 जनवरी को मनाई जाएगी। सुबह 9 बजे राजा खेमकरण की प्रतिमा जघीना मोड़ पर हवन, पूजा-अर्चना कर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। सुबह 9 बजे से रैली निकलेगी, जो बिजली घर से प्रारंभ होकर कुम्हेर गेट होते हुए तुहिया तक पहुंचेगी। दोपहर 12 बजे स्मृति सभा का आयोजन तुहिया के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में होगा। भास्कर इनसाइट –हिंदू संरक्षक रूप में उभरे, जजिया कर का भी किया विरोध, बाघ से कुश्ती लड़ बाघमार बहादुर कहलाए इतिहासकार रामवीर सिंह वर्मा द्वारा लिखित लोहागढ़ की यशोगाथा के मुताबिक 18वीं सदी के प्रारंभ में राजा खेमकरण ब्रज क्षेत्र में हिंदुओं के संरक्षक के रूप में उभरे। सोगर/सुगढ़ में राजा खेमकरण की गढ़ी थी। तवारीख भरतपुर के लेखक पंडित बलदेव सिंह सूर्यद्विज ने लिखा है कि गांव अघापुर में रुस्तम के एक पुत्र को खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में सोने की अशर्फियां मिलीं, जिससे रुस्तम ने अपने योग्य पुत्र राजा खेमकरण के लिए चौबुर्जा के निकट फतहगढ़ी का निर्माण कराया। इतिहास की जानकार डॉ. सुधा सिंह के अनुसार राजा खेमकरण का जन्म गांव तुहिया में 14 जनवरी 1679 को हुआ। उस समय मुगल शासक आलमगीर ने कई कर लगा दिए थे, जिनका राजा खेमकरण ने विरोध किया। फरवरी 1707 में आलमगीर की मौत के बाद राजा खेमकरण के दिल्ली दरबार से संबंध बन गए। दिल्ली के शाही मैदान में राजा खेमकरण ने बाघ से कुश्ती लड़ी और कटार से मार दिया, जिस पर वे बाघमार बहादुर कहलाए।

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