सिमरिया में 23 फरवरी को हुए एयर एंबुलेंस हादसे के 21 दिन बाद जांच एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। सिमरिया थाना क्षेत्र के कासियतू करमटांड जंगल में महुआ चुनने गए ग्रामीणों को विमान का इंजन मिला है। ग्रामीणों ने सुबह पत्थर पनिया जंगल में झाड़ियों के बीच फंसा भारी-भरकम इंजन देखा। पहले तो उन्हें समझ नहीं आया कि यह क्या है, लेकिन करीब से देखने पर पता चला कि यह किसी विमान का इंजन है। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना मिलते ही सिमरिया थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और इंजन को अपने कब्जे में ले लिया। क्रैश साइट से करीब एक किलोमीटर दूर मिला इंजन पुलिस के अनुसार बरामद इंजन मुख्य दुर्घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन का इतनी दूर मिलना इस बात का संकेत हो सकता है कि हादसे के समय विमान के कई हिस्से हवा में ही अलग होकर दूर-दूर जा गिरे होंगे। या फिर विमान बहुत तेज गति से जमीन पर गिरा होगा। इंजन मिलने के बाद अब जांच एजेंसियों को हादसे की कड़ियों को जोड़ने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस ने इंजन को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है। संबंधित जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दे दी गई है। हादसे में सात लोगों की हुई थी मौत गौरतलब है कि 23 फरवरी को सिमरिया क्षेत्र में एयर एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे में पायलट, गंभीर मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक स्टाफ और मरीज के परिजनों समेत कुल सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के समय इलाके में भारी बारिश और घना कोहरा होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई थी। ठोस सबूतों के अभाव में जांच एजेंसियां किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थीं। फॉरेंसिक जांच से खुल सकता है राज सिमरिया थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि बरामद इंजन को सुरक्षित कर लिया गया है और इसकी सूचना उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों तथा नागरिक उड्डयन विभाग को दे दी गई है। अब इंजन की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि हादसे से पहले इंजन में कोई तकनीकी खराबी थी या उसमें आग लग गई थी। इस बीच अब सभी की नजरें दिल्ली से आने वाली विशेषज्ञ जांच टीम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह इंजन पूरे हादसे का सबसे अहम सबूत साबित हो सकता है, जिससे दुर्घटना के असली कारण सामने आ सकते हैं और पीड़ित परिवारों को जवाब मिल सकेगा। ——————————————- इस खबर को पढ़ें.. 8 लाख जुटाकर एयर एंबुलेंस बुक की, क्रैश में मौत:बर्न मरीज को लेकर रांची से दिल्ली जा रहे थे, पेशेंट-पायलट समेत 7 की गई जान रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस सोमवार शाम चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में क्रैश हो गई। इसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो पायलट (कैप्टन विवेक, कैप्टन सबराजदीप), मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी, भांजा ध्रुव कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता, एक पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा शामिल थे। संजय कुमार के बड़े भाई विजय कुमार ने बताया, ‘संजय शॉर्ट सर्किट से लगी आग से 65 फीसदी झुलस गए थे। रांची के हॉस्पिटल ने दिल्ली रेफर किया था, लेकिन सीरियस कंडिशन के कारण सड़क के रास्ते नहीं ले जा सकते थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… सिमरिया में 23 फरवरी को हुए एयर एंबुलेंस हादसे के 21 दिन बाद जांच एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। सिमरिया थाना क्षेत्र के कासियतू करमटांड जंगल में महुआ चुनने गए ग्रामीणों को विमान का इंजन मिला है। ग्रामीणों ने सुबह पत्थर पनिया जंगल में झाड़ियों के बीच फंसा भारी-भरकम इंजन देखा। पहले तो उन्हें समझ नहीं आया कि यह क्या है, लेकिन करीब से देखने पर पता चला कि यह किसी विमान का इंजन है। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना मिलते ही सिमरिया थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और इंजन को अपने कब्जे में ले लिया। क्रैश साइट से करीब एक किलोमीटर दूर मिला इंजन पुलिस के अनुसार बरामद इंजन मुख्य दुर्घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन का इतनी दूर मिलना इस बात का संकेत हो सकता है कि हादसे के समय विमान के कई हिस्से हवा में ही अलग होकर दूर-दूर जा गिरे होंगे। या फिर विमान बहुत तेज गति से जमीन पर गिरा होगा। इंजन मिलने के बाद अब जांच एजेंसियों को हादसे की कड़ियों को जोड़ने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस ने इंजन को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है। संबंधित जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दे दी गई है। हादसे में सात लोगों की हुई थी मौत गौरतलब है कि 23 फरवरी को सिमरिया क्षेत्र में एयर एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे में पायलट, गंभीर मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक स्टाफ और मरीज के परिजनों समेत कुल सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के समय इलाके में भारी बारिश और घना कोहरा होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई थी। ठोस सबूतों के अभाव में जांच एजेंसियां किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थीं। फॉरेंसिक जांच से खुल सकता है राज सिमरिया थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि बरामद इंजन को सुरक्षित कर लिया गया है और इसकी सूचना उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों तथा नागरिक उड्डयन विभाग को दे दी गई है। अब इंजन की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि हादसे से पहले इंजन में कोई तकनीकी खराबी थी या उसमें आग लग गई थी। इस बीच अब सभी की नजरें दिल्ली से आने वाली विशेषज्ञ जांच टीम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह इंजन पूरे हादसे का सबसे अहम सबूत साबित हो सकता है, जिससे दुर्घटना के असली कारण सामने आ सकते हैं और पीड़ित परिवारों को जवाब मिल सकेगा। ——————————————- इस खबर को पढ़ें.. 8 लाख जुटाकर एयर एंबुलेंस बुक की, क्रैश में मौत:बर्न मरीज को लेकर रांची से दिल्ली जा रहे थे, पेशेंट-पायलट समेत 7 की गई जान रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस सोमवार शाम चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में क्रैश हो गई। इसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो पायलट (कैप्टन विवेक, कैप्टन सबराजदीप), मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी, भांजा ध्रुव कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता, एक पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा शामिल थे। संजय कुमार के बड़े भाई विजय कुमार ने बताया, ‘संजय शॉर्ट सर्किट से लगी आग से 65 फीसदी झुलस गए थे। रांची के हॉस्पिटल ने दिल्ली रेफर किया था, लेकिन सीरियस कंडिशन के कारण सड़क के रास्ते नहीं ले जा सकते थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…


