झांसी जीआरपी ने शुक्रवार को 17 लाख रुपए कीमत के मोबाइल फोन उनके मालिकों को सौंपे। ये वह फोन हैं, जिन्हें सफर के दौरान यात्रियों ने खो दिया था। जीआरपी ने तीन महीने पांच राज्यों में इनकी तलाश की और बरामद कर उन्हें लौटा दिया। अपने मोबाइल वापस लेने पहुंचे रेल यात्रियों ने कहा कि हम तो अपने मोबाइल फोन भूल चुके थे। लेकिन जीआरपी से कॉल आई कि आपका मोबाइल मिल गया है तो एक बार को विश्वास नहीं हुआ। बीते साल 9 अक्टूबर को एसपी जीआरपी विपुल कुमार श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झांसी मंडल में ट्रेनों और स्टेशन से गुम हुए 53 लाख रुपए कीमत के 355 मोबाइल फोन उनके मालिकों को लौटाए थे। बावजूद इसके यात्रियों ने सजगता नहीं दिखाई और तीन महीने के अंदर फिर से 17 लाख रुपए कीमत के 170 मोबाइल फोन फिर गुमा दिए। मोबाइल खो जाने के बाद यात्रियों ने इसकी शिकायत झांसी जीआरपी (उत्तर प्रदेश) के अलग-अलग थानों में दर्ज कराई तो एसपी ने मोबाइलों की तलाश के लिए क्राइम ब्रांच, सर्विलांस और थानों की पुलिस टीम लगा दीं। टीमों ने मोबाइल फोन की तलाश शुरू की तो पता चला कि कुछ फोन मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब में इस्तेमाल हो रहे हैं। वहीं, अधिकांश मोबाइल फोन यूपी के अलग-अलग जिलों में बिक गए हैं। सर्विलांस की मदद से टीमें मोबाइल फोन तक पहुंचीं और उन्हें बरामद कर लिया। इसके बाद इन फोन के मालिकों से संपर्क कर उन्हें शुक्रवार को झांसी बुलाया गया। यहां एसपी जीआरपी विपुल कुमार श्रीवास्तव और सीओ जीआरपी सलीम खान ने प्रेस कांफ्रेंस कर मोबाइल फोन के मालिकों को वेरिफाई कर उन्हें ये फोन लौटा दिए। यात्रियों को शपथ दिलाई, अब से सजगता दिखाएंगे अपने खोए हुए मोबाइल फोन लेने झांसी आए यात्रियों को पहले जागरूक किया गया और उन्हें शपथ भी दिलाई गई। एसपी जीआरपी ने मोबाइल फोन मालिकों से कहा कि वह ये शपथ लें कि यात्रा के दौरान मोबाइल फोन चार्जिंग पर लगाकर नहीं सोएंगे। उन्होंने कहा कि मोबाइल दो सूरत में ही गुम होते हैं। पहली कि जब आप रात को ट्रेन में मोबाइल चार्जिंग पर लगाकर सो जाते हैं और फिर जल्दबाजी में भूल जाते हैं। दूसरा तब जब लोग भीड़ में घुसने का प्रयास करते हैं। कहा कि अगर थोड़ी सावधानी बरतेंगे तो कभी नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।


