राघोपुर के मॉडल प्रखंड कार्यालय की गुणवत्ता पर सवाल:ब्लॉक ऑफिस परिसर में हो रहा निर्माण, लोग बोले- बेस निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल

राघोपुर के मॉडल प्रखंड कार्यालय की गुणवत्ता पर सवाल:ब्लॉक ऑफिस परिसर में हो रहा निर्माण, लोग बोले- बेस निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल

सुपौल के राघोपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में लगभग 16 करोड़ रुपए की लागत मॉडल प्रखंड कार्यालय भवन का निर्माण हो रहा है, जो अब सवालों के घेरे में आ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है और न ही कोई सूचना पट्ट ही लगाया गया है। लोगों ने क्या कहा ? स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन के बेस निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्राक्कलन के अनुसार 4 इंच मोटी पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) की ढलाई होनी थी, लेकिन मौके पर मात्र डेढ़ से 2 इंच की पीसीसी की गई है। इसके अलावा, पीसीसी कार्य में निर्धारित ओपीसी सीमेंट की जगह लोकल ब्रांड के पीपीसी सीमेंट का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। आश्वासन के बाद भी नही ंलगा सूचना पट्ट लोगों का कहना है कि निर्माण में अनियमितताओं को छिपाने के लिए संवेदक ने अब तक सूचना पट्ट नहीं लगाया है। कार्य शुरू होने के समय संवेदक के मुंशी ने एक-दो दिन में सूचना पट्ट लगाने का आश्वासन दिया था। कनीय अभियंता मनोज कुमार ने भी जल्द सूचना पट्ट लगवाने की बात कही थी, लेकिन एक माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच की मांग लोगों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि करोड़ों रुपए की सरकारी राशि की बर्बादी रोकी जा सके और भविष्य में भवन की मजबूती पर कोई खतरा न हो। BDO ने क्या कहा ? इस संबंध में भवन निर्माण विभाग के कनीय अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि संवेदक को सूचना पट्ट लगाने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ओपीसी और पीपीसी दोनों ग्रेड के सीमेंट का उपयोग करना है, लेकिन किस स्तर पर कौन सा ग्रेड उपयोग करना है, यह बताने में वे असमर्थ दिखे। वहीं, राघोपुर के बीडीओ सत्येंद्र कुमार यादव ने कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारी को इस मामले की जानकारी दी जाएगी। सुपौल के राघोपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में लगभग 16 करोड़ रुपए की लागत मॉडल प्रखंड कार्यालय भवन का निर्माण हो रहा है, जो अब सवालों के घेरे में आ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है और न ही कोई सूचना पट्ट ही लगाया गया है। लोगों ने क्या कहा ? स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन के बेस निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्राक्कलन के अनुसार 4 इंच मोटी पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) की ढलाई होनी थी, लेकिन मौके पर मात्र डेढ़ से 2 इंच की पीसीसी की गई है। इसके अलावा, पीसीसी कार्य में निर्धारित ओपीसी सीमेंट की जगह लोकल ब्रांड के पीपीसी सीमेंट का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। आश्वासन के बाद भी नही ंलगा सूचना पट्ट लोगों का कहना है कि निर्माण में अनियमितताओं को छिपाने के लिए संवेदक ने अब तक सूचना पट्ट नहीं लगाया है। कार्य शुरू होने के समय संवेदक के मुंशी ने एक-दो दिन में सूचना पट्ट लगाने का आश्वासन दिया था। कनीय अभियंता मनोज कुमार ने भी जल्द सूचना पट्ट लगवाने की बात कही थी, लेकिन एक माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच की मांग लोगों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि करोड़ों रुपए की सरकारी राशि की बर्बादी रोकी जा सके और भविष्य में भवन की मजबूती पर कोई खतरा न हो। BDO ने क्या कहा ? इस संबंध में भवन निर्माण विभाग के कनीय अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि संवेदक को सूचना पट्ट लगाने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ओपीसी और पीपीसी दोनों ग्रेड के सीमेंट का उपयोग करना है, लेकिन किस स्तर पर कौन सा ग्रेड उपयोग करना है, यह बताने में वे असमर्थ दिखे। वहीं, राघोपुर के बीडीओ सत्येंद्र कुमार यादव ने कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारी को इस मामले की जानकारी दी जाएगी।  

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