अररिया नगर परिषद वित्तीय वर्ष की मार्च क्लोजिंग के बाद बड़े बकाएदारों की सूची तैयार कर नोटिस भेजने की तैयारी में है। इसी क्रम में अररिया महाविद्यालय पर नगर परिषद का आठ करोड़ इकतीस लाख बेरासी हजार छः सौ साठ रुपये का होल्डिंग टैक्स बकाया बताया जा रहा है। यह राशि स्थानीय स्तर पर चर्चा का मुख्य विषय बन गई है। महाविद्यालय पर अबतक कार्रवाई क्यों नहीं आम लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि छोटे-मोटे बकाए पर नगर परिषद तुरंत नोटिस जारी कर वसूली अभियान चलाती है, लेकिन एक सरकारी महाविद्यालय जैसे बड़े संस्थान पर इतनी भारी राशि बकाया होने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। इस भेदभावपूर्ण रवैये से आमजन में असंतोष बढ़ रहा है। वार्ड संख्या 07, जहां अररिया महाविद्यालय स्थित है, के पार्षद श्याम कुमार मंडल ने इस संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आम लोगों से कर वसूली के लिए नगर परिषद सक्रिय रहती है और होल्डिंग टैक्स समय पर जमा करवा लिया जाता है। सरकारी संस्थान द्वारा इतना बड़ा कर जमा न करना समझ से परे है। बकाएदारों की सूची तैयार,जल्द नोटिस जारी उन्होंने जोर दिया कि सरकारी संस्थाओं को पहले कर जमा करना चाहिए, ताकि आम लोगों में जागरूकता बढ़े और वे भी समय पर अपना कर चुकाएं। नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार, मार्च क्लोजिंग के बाद सभी प्रमुख बकाएदारों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे। हालांकि, अररिया महाविद्यालय के मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सरकारी संस्थान ही कर का भुगतान नहीं करेंगे, तो आम आदमी से समय पर भुगतान की उम्मीद कैसे की जा सकती है। यह स्थिति नगर परिषद की वित्तीय स्थिति को भी प्रभावित कर रही है, क्योंकि शहर के विकास कार्यों के लिए कर संग्रहण अत्यंत आवश्यक है। बड़े बकाए के कारण विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित हो रहे हैं। बकायेदारों के खिलाफ समान कार्रवाई की जाएगी पार्षद श्याम कुमार मंडल ने अपील की कि सरकारी महाविद्यालय प्रबंधन को तुरंत बकाया राशि जमा करनी चाहिए, जिससे अन्य नागरिकों को भी कर भुगतान के प्रति प्रेरणा मिले। नगर परिषद प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सभी बकायेदारों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह आम व्यक्ति हो या कोई संस्थान। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि बड़े बकायेदारों पर भी सख्ती बरती जानी चाहिए। अररिया नगर परिषद वित्तीय वर्ष की मार्च क्लोजिंग के बाद बड़े बकाएदारों की सूची तैयार कर नोटिस भेजने की तैयारी में है। इसी क्रम में अररिया महाविद्यालय पर नगर परिषद का आठ करोड़ इकतीस लाख बेरासी हजार छः सौ साठ रुपये का होल्डिंग टैक्स बकाया बताया जा रहा है। यह राशि स्थानीय स्तर पर चर्चा का मुख्य विषय बन गई है। महाविद्यालय पर अबतक कार्रवाई क्यों नहीं आम लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि छोटे-मोटे बकाए पर नगर परिषद तुरंत नोटिस जारी कर वसूली अभियान चलाती है, लेकिन एक सरकारी महाविद्यालय जैसे बड़े संस्थान पर इतनी भारी राशि बकाया होने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। इस भेदभावपूर्ण रवैये से आमजन में असंतोष बढ़ रहा है। वार्ड संख्या 07, जहां अररिया महाविद्यालय स्थित है, के पार्षद श्याम कुमार मंडल ने इस संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आम लोगों से कर वसूली के लिए नगर परिषद सक्रिय रहती है और होल्डिंग टैक्स समय पर जमा करवा लिया जाता है। सरकारी संस्थान द्वारा इतना बड़ा कर जमा न करना समझ से परे है। बकाएदारों की सूची तैयार,जल्द नोटिस जारी उन्होंने जोर दिया कि सरकारी संस्थाओं को पहले कर जमा करना चाहिए, ताकि आम लोगों में जागरूकता बढ़े और वे भी समय पर अपना कर चुकाएं। नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार, मार्च क्लोजिंग के बाद सभी प्रमुख बकाएदारों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे। हालांकि, अररिया महाविद्यालय के मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सरकारी संस्थान ही कर का भुगतान नहीं करेंगे, तो आम आदमी से समय पर भुगतान की उम्मीद कैसे की जा सकती है। यह स्थिति नगर परिषद की वित्तीय स्थिति को भी प्रभावित कर रही है, क्योंकि शहर के विकास कार्यों के लिए कर संग्रहण अत्यंत आवश्यक है। बड़े बकाए के कारण विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित हो रहे हैं। बकायेदारों के खिलाफ समान कार्रवाई की जाएगी पार्षद श्याम कुमार मंडल ने अपील की कि सरकारी महाविद्यालय प्रबंधन को तुरंत बकाया राशि जमा करनी चाहिए, जिससे अन्य नागरिकों को भी कर भुगतान के प्रति प्रेरणा मिले। नगर परिषद प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सभी बकायेदारों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह आम व्यक्ति हो या कोई संस्थान। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि बड़े बकायेदारों पर भी सख्ती बरती जानी चाहिए।


