महात्मा साल भर साधना करते हैं। साल भर में कभी गलती से उनका मन बहक गया तो हम उनकी एक साल की सेवा को गलत कैसे मानें। ये यौन शोषण नहीं है। ये तो सहमति से हुआ है। ये कहकर ममता सिंह मलिक थोड़ा रुकती है, वह आगे कहती है- 99 साल में ऐसे 4 वीडियो आए हैं। ये ऐसा है कि जैसे एक चावल की बोरी में कीड़े हों। कीड़े होने पर आप पूरा चावल नहीं फेंक देते। कीड़े निकालकर फेंकते हैं। दरअसल, ममता सिंह अशोक नगर जिले के आनंदपुर धाम आश्रम से जुड़ी हैं। इस समय आश्रम सेक्स वीडियो की वजह से सुर्खियों में है। आरोप लगे हैं कि यहां रहने वाली महिलाओं का यौन शोषण होता है। इन आरोपों की पड़ताल करने भास्कर की टीम आनंदपुर धाम आश्रम पहुंची। दो दिन तक आश्रम से जुड़े महात्मा और महिला भक्तों से बात कर समझा कि वायरल हो रहे सेक्स वीडियो का सच क्या है? यौन शोषण के आरोपों में कितनी सच्चाई है? आश्रम में रहने वाली महिलाएं कौन हैं और यहां क्या करती हैं? पढ़िए रिपोर्ट वायरल वीडियो के बारे में सब जानते, मगर बोलता कोई नहीं
भास्कर की टीम पर आनंदपुर धाम आश्रम पहुंची, तो यहां एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था। आश्रम में रहने वाले लगभग हर महात्मा और भक्त के मोबाइल पर ये वीडियो मौजूद हैं, लेकिन किसी के चेहरे पर कोई शिकन या हैरानी नहीं है। माहौल ऐसा है, मानो यहां रहने वाले हर शख्स को इस स्याह सच के बारे में पहले से ही सबकुछ मालूम था। टीम ने धाम के भीतर बने स्कूल और अस्पतालों में सेवारत शिक्षिकाओं, नर्सों और महिला डॉक्टरों से उनके सेवा स्थलों पर जाकर बात की। बातचीत में यहां की महिलाएं, जिन्हें सम्मान से ‘बहन जी’ और ‘भक्ताणी’ कहा जाता है, यह तो स्वीकार करती हैं कि ये वीडियो आश्रम के भीतर ही बने हैं और वह इन वीडियो को देख चुकी हैं। इसके तुरंत बाद ही कहती हैं कि ये आनंदपुर धाम की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है। जब उनसे यह अहम और सीधा सवाल पूछा जाता है कि क्या आश्रम के भीतर उनका या किसी अन्य महिला का यौन शोषण हो रहा है? तो ज्यादातर महिला भक्त और श्रद्धालु इस पर खामोश हो जाती हैं। यह खामोशी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। आश्रम की महिलाएं, डॉक्टर-नर्स से लेकर साइंस ग्रेजुएट तक
आश्रम में गुरु पादशाही की भक्ति से प्रभावित होकर सेवा करने आईं ये महिलाएं साधारण नहीं हैं। सफेद कपड़े पहनने वाली ये लड़कियां और महिलाएं उच्च शिक्षित हैं। कोई कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स डिग्री धारक है, तो कोई एमबीए है। कोई प्रेक्टिसिंग डॉक्टर है, तो कोई नर्सिंग में ग्रेजुएट। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं भी हैं, जिन्होंने बीएड किया है और अपना जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया है। जो महिलाएं डॉक्टर और नर्स हैं, वे आश्रम के अस्पताल में बिना किसी वेतन के ‘सेवा’ कर रही हैं। जिन्होंने बीएड किया है, वे यहां के 4 बड़े स्कूलों में शिक्षिका के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। वे कहती हैं कि जब गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, तब वे आश्रम से अनुमति लेकर साल में एक बार अपने घर जाती हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाएं दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के संपन्न परिवारों से हैं। बातचीत में इन महिलाओं ने बताया कि ग्रेजुएशन या मास्टर्स के बाद जब उनका मन सांसारिक दुनिया में नहीं लगा, तो उन्होंने आश्रम में आकर अपना जीवन सेवा और भक्ति को समर्पित करने का प्रण किया। कई महिलाएं यहां पिछले 30 सालों से रह रही हैं। वे कहती हैं कि उन्होंने अपना जीवन गुरु और सेवा को समर्पित कर दिया है और उनके मन में परिवार या विवाह का विचार कभी नहीं आता। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग नियम
आश्रम में आवास की व्यवस्था दो हिस्सों में बंटी हुई है-पुरुष परिसर और महिला परिसर। मंदिर में भी महिलाओं और पुरुषों के लिए पूजा-अर्चना के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित हैं। आश्रम के सर्वोच्च पदाधिकारी, छठवें पादशाही का सख्त आदेश है कि रात 8 बजे के बाद महिला आवास वाले प्रांगण का मुख्य द्वार बंद कर दिया जाए। इसके बाद किसी भी पुरुष महात्मा या साधु को उस तरफ जाने की अनुमति नहीं होती। इसी तरह, महिलाओं को भी पुरुषों के परिसर में जाने की इजाजत नहीं है। हालांकि, दिन के समय मंदिर और संगत (प्रवचन) के दौरान उन्हें परिसर के भीतर एक-दूसरे से बातचीत करने की इजाजत होती है। पुरुष, महिलाओं को ‘बहनजी’ कहकर संबोधित करते हैं और महिलाएं, पुरुषों को ‘भगतजी’ कहकर बुलाती हैं। स्कूलों में महात्माओं की पसंद से मिलते हैं ओहदे
आनंदपुर धाम ट्रस्ट यहां 4 बड़े स्कूलों का संचालन करता है, जिनमें 2 हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। छठवीं कक्षा से यहां लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल हैं। इन स्कूलों का पूरा संचालन सिर्फ महिला शिक्षिकाएं ही करती हैं। भास्कर रिपोर्टर जब महिलाओं से बात करने के लिए यहां के स्कूल और अस्पतालों में गए, तो उन्होंने माना कि उन्हें वायरल वीडियो की पूरी जानकारी है। हालांकि, इन वीडियो को देखकर वह हैरानी नहीं जताती, ये अपने आप में एक अजीब बात है। वे एक सुर में कहती हैं कि आश्रम की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साजिश की जा रही है। लेकिन वे आश्रम प्रबंधन में महात्माओं के बीच चल रही खींचतान और गुटबाजी की बात को जरूर स्वीकार करती हैं। सीनियर टीचर्स बोलीं- हमारी गलती हमें पता नहीं
यहां के प्राथमिक स्कूल की प्रमुख 67 साल की वंदना आनंद हुआ करती थीं, जो 1990 में यहां आई थीं। मगर, अक्टूबर 2025 में, 8 साल पहले आश्रम में आईं मिस रेखा को स्कूल की पूरी जिम्मेदारी दे दी गई। जब हम वंदना से इस बदलाव और आश्रम के माहौल पर बात करने पहुंचे, तभी सीसीटीवी से हम पर नजर रख रहे प्रबंधन ने सिक्योरिटी हेड को नजर रखने के लिए वहां भेज दिया। नई प्रिंसिपल मिस रेखा ने बताया कि वह इससे पहले दिल्ली के एक प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल में प्रिंसिपल रह चुकी हैं। इसी तरह, मिडिल स्कूल( इंग्लिश मीडियम) में भी मिस दीपिका को दो महीने पहले ही प्रिंसिपल बनाया गया है, जबकि वह पहले कंप्यूटर साइंस की लेक्चरर थीं। मिस रेखा और मिस दीपिका, दोनों ही अनुभव में काफी जूनियर हैं, लेकिन उन्हें बड़े ओहदे दिए गए हैं। जब हमने उन सीनियर शिक्षिकाओं से बात की, जिन्हें पदों से हटाया गया है, तो उन्होंने दबी ज़ुबान में कहा, ‘हमें इसकी कोई वजह समझ नहीं आ रही है। हमें तो यह भी नहीं मालूम कि हमारी गलती क्या है।’ हालांकि, यौन शोषण की चर्चा पर सभी शिक्षिकाओं ने एक ही जवाब दिया कि वे यहां गुरु पादशाही की भक्ति और सेवा के लिए आई हैं और उनके साथ कभी ऐसा कुछ नहीं हुआ। डॉक्टर का तर्क- ‘सहमति से सेक्स हो तो शोषण नहीं’
आनंदपुर धाम के प्रयागधाम से जुड़ीं ममता सिंह मलिक ने इस मामले पर वीडियो कॉल पर बात की। उन्होंने जो कहा, वह इस पूरे मामले को एक नया और विवादित मोड़ देता है। सवाल: जो वीडियो सामने आए हैं, उस पर आप क्या सोचती हैं?
जवाब: मैं आनंदपुर आश्रम संस्था से बचपन से जुड़ी हूं। मैं एक डॉक्टर हूं। इस आश्रम में आर्थिक गड़बड़ियों की शिकायत मैं लगातार कर रही हूं। मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय और कलेक्टर को भी शिकायत भेजी है। लेकिन आश्रम में जो यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं, वो सही नहीं हैं। उन वीडियो में शोषण कहां दिख रहा है? यदि कोई अपनी मर्जी से जा रहा है तो वो शोषण नहीं हुआ। कोई चीख-चिल्लाहट, जोर-जबरदस्ती नहीं हुई। यदि कोई अपनी मर्जी से जाएगी और पैसे लेगी तो ये शोषण नहीं है, चाहे वह आदिवासी महिला हो या दरबार की। सवाल: क्या आप सेक्स वीडियो को अपराध नहीं मान रही हैं?
जवाब:देखिए… 99 साल के इतिहास में ऐसे 4 वीडियो आए हैं। ये ऐसा है कि जैसे एक चावल की बोरी में कीड़े हों। कीड़े होने पर आप पूरी बोरी नहीं फेंक देते, बल्कि कीड़े निकालकर फेंकते हैं। सवाल: आश्रम में सहमति से सेक्स को आप क्या मानती हैं?
जवाब: ये आम बात है। यदि सहमति से हुआ तो इसमें क्या बुरा है? मैं तो सेक्स को बुरा नहीं मानती। सेक्स नहीं होता तो किसी का जन्म कैसे होता? यदि वे दरबार में हैं और महात्मा हैं, महीने भर, साल भर तपस्या करते हैं, साधना करते हैं, तो साल में गलती से उनका मन बहक गया तो हम उनकी एक साल की सेवा को गलत कैसे मान लें? सैकड़ों महात्माओं में से 4 लोग सेक्शुअल एक्टिविटी में शामिल हैं तो सभी तो वैसे नहीं हुए। प्रबंधन का गोलमोल जवाब: ‘शिकायत आएगी तो जांच करेंगे’
जब भास्कर संवाददाता ने आश्रम प्रबंधन से आधिकारिक पक्ष जानने के लिए संपर्क किया, तो पहले कोई भी जवाब देने को तैयार नहीं हुआ। आश्रम का पूरा प्रबंधन देखने वाले सोनू महात्मा आश्रम में ही मौजूद थे, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। हालांकि, यहां अस्पताल का प्रबंधन देखने वाले कुलदीप महात्मा कैमरे पर बात करने के लिए राजी हुए। जब उन्हें वीडियो दिखाए गए, तो उन्होंने एक वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान ‘चक्की वाले बाबा’ के रूप में की और कहा कि यह दस साल पुराना मामला है और उन्हें आश्रम से निकालकर FIR भी कराई गई थी। बाकी वीडियो में दिख रहे महात्माओं को उन्होंने पहचानने से इनकार कर दिया।


