मथुरापुर और गंगौर राजस्व ग्राम में दाखिल-खारिज प्रक्रिया पर सवाल:सचिव के आदेश की अवहेलना; 14 दिन बाद भी म्यूटेशन नहीं, सीओ ने खुद लगाई आपत्ति

मथुरापुर और गंगौर राजस्व ग्राम में दाखिल-खारिज प्रक्रिया पर सवाल:सचिव के आदेश की अवहेलना; 14 दिन बाद भी म्यूटेशन नहीं, सीओ ने खुद लगाई आपत्ति

प्रवीण कुमार अटल | खगड़िया खगड़िया सदर अंचल में दाखिल-खारिज प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘आम-खास सूचना’ जारी होने के 14 दिन पूरे होने और किसी रैयत या बाहरी व्यक्ति की ओर से आपत्ति नहीं आने के बावजूद अंचल अधिकारी पुनीत कौशल द्वारा खुद आपत्ति दर्ज कर कई ऑनलाइन आवेदन लंबित रखे गए हैं। विभागीय पोर्टल के आपत्ति कॉलम में आपत्तिकर्ता के रूप में स्वयं अंचल अधिकारी का नाम दर्ज है। यानी तय समय-सीमा पूरी होने के बाद आदेश पारित करने के बजाय फाइलें रोक दी गईं। इधर, 15 जनवरी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार ने स्पष्ट निर्देश जारी कर कहा है कि आम-खास सूचना के प्रकाशन के 14 दिनों के भीतर यदि कोई वैध बाहरी आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो तत्काल आदेश पारित कर म्यूटेशन प्रक्रिया पूरी की जाए। बिना ठोस आधार स्वयं आपत्ति दर्ज करना कदाचार माना जाएगा और संबंधित पदाधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है। इसके बावजूद सदर अंचल में कई मामलों में 14 दिन बीतने के बाद आदेश देने के बजाय स्वयं आपत्ति दर्ज कर फाइलें लंबित रखी गईं। मौजा- मथुरापुर, केस नं. 2457/25-26 14 जनवरी को सीओ द्वारा आम-खास सूचना प्रकाशित। 31 जनवरी तक किसी बाहरी व्यक्ति की कोई आपत्ति नहीं। फिर अंचल अधिकारी ने स्वयं आपत्ति दर्ज कर आवेदन लंबित कर दिया। यानी समय-सीमा पूरी होने के बाद आदेश पारित करने के बजाय फाइल रोक दी गई। मौजा – मथुरापुर, केस नं. 2322/25-26 31 दिसंबर 2025 को सीओ द्वारा आम-खास सूचना जारी । 15 जनवरी तक कोई बाहरी आपत्ति नहीं। अंचल अधिकारी ने स्वयं आपत्ति दर्ज कर दिया। मामला एक माह से अधिक समय से लंबित है। मौजा- गंगौर, केस नं. 2346/25-26 31 दिसंबर को सीओ द्वारा आम-खास सूचना जारी। 24 जनवरी तक कोई आपत्ति नहीं, सीओ ने स्वयं आपत्ति लगाई। मौजा- गंगौर, केस नं. 2238/25-26 22 दिसंबर को आम-खास सूचना प्रकाशित। 14 दिन पूरे होने के तुरंत बाद आदेश देने के बजाय 12 जनवरी को सीओ ने आपत्ति लगाई। मौजा – गंगौर, केस नं. 2344/25-26 31 दिसंबर को आम-खास सूचना। 24 जनवरी को सीओ ने स्वयं आपत्ति दर्ज की,आवेदन लंबित। मौजा- गंगौर, केस नं. 1939/25-26 14 जनवरी को आम-खास सूचना जारी। 31 जनवरी को सीओ ने आपत्ति दर्ज की। सीओ पुनीत कौशल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। डीसीएलआर आलोक कुमार ने कहा कि विभागीय आदेश की अनदेखी गंभीर विषय है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। केस स्टडी: एक जैसा पैटर्न, पहले सूचना… फिर आपत्ति डीसीएलआर बोले- होगी जांच क्या कहता है नियम विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 तथा बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) नियमावली, 2020 के तहत म्यूटेशन निष्पादन की समय-सीमा तय है। आम-खास सूचना के 14 दिनों के भीतर वैध बाहरी आपत्ति नहीं आने पर आदेश पारित करना अनिवार्य है। सरकारी खाता/खेसरा से इतर मामलों में बिना ठोस आधार स्वयं आपत्ति दर्ज करना नियमविरुद्ध है। अकारण मामलों को लंबित रखना कदाचार की श्रेणी में आएगा। प्रवीण कुमार अटल | खगड़िया खगड़िया सदर अंचल में दाखिल-खारिज प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘आम-खास सूचना’ जारी होने के 14 दिन पूरे होने और किसी रैयत या बाहरी व्यक्ति की ओर से आपत्ति नहीं आने के बावजूद अंचल अधिकारी पुनीत कौशल द्वारा खुद आपत्ति दर्ज कर कई ऑनलाइन आवेदन लंबित रखे गए हैं। विभागीय पोर्टल के आपत्ति कॉलम में आपत्तिकर्ता के रूप में स्वयं अंचल अधिकारी का नाम दर्ज है। यानी तय समय-सीमा पूरी होने के बाद आदेश पारित करने के बजाय फाइलें रोक दी गईं। इधर, 15 जनवरी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार ने स्पष्ट निर्देश जारी कर कहा है कि आम-खास सूचना के प्रकाशन के 14 दिनों के भीतर यदि कोई वैध बाहरी आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो तत्काल आदेश पारित कर म्यूटेशन प्रक्रिया पूरी की जाए। बिना ठोस आधार स्वयं आपत्ति दर्ज करना कदाचार माना जाएगा और संबंधित पदाधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है। इसके बावजूद सदर अंचल में कई मामलों में 14 दिन बीतने के बाद आदेश देने के बजाय स्वयं आपत्ति दर्ज कर फाइलें लंबित रखी गईं। मौजा- मथुरापुर, केस नं. 2457/25-26 14 जनवरी को सीओ द्वारा आम-खास सूचना प्रकाशित। 31 जनवरी तक किसी बाहरी व्यक्ति की कोई आपत्ति नहीं। फिर अंचल अधिकारी ने स्वयं आपत्ति दर्ज कर आवेदन लंबित कर दिया। यानी समय-सीमा पूरी होने के बाद आदेश पारित करने के बजाय फाइल रोक दी गई। मौजा – मथुरापुर, केस नं. 2322/25-26 31 दिसंबर 2025 को सीओ द्वारा आम-खास सूचना जारी । 15 जनवरी तक कोई बाहरी आपत्ति नहीं। अंचल अधिकारी ने स्वयं आपत्ति दर्ज कर दिया। मामला एक माह से अधिक समय से लंबित है। मौजा- गंगौर, केस नं. 2346/25-26 31 दिसंबर को सीओ द्वारा आम-खास सूचना जारी। 24 जनवरी तक कोई आपत्ति नहीं, सीओ ने स्वयं आपत्ति लगाई। मौजा- गंगौर, केस नं. 2238/25-26 22 दिसंबर को आम-खास सूचना प्रकाशित। 14 दिन पूरे होने के तुरंत बाद आदेश देने के बजाय 12 जनवरी को सीओ ने आपत्ति लगाई। मौजा – गंगौर, केस नं. 2344/25-26 31 दिसंबर को आम-खास सूचना। 24 जनवरी को सीओ ने स्वयं आपत्ति दर्ज की,आवेदन लंबित। मौजा- गंगौर, केस नं. 1939/25-26 14 जनवरी को आम-खास सूचना जारी। 31 जनवरी को सीओ ने आपत्ति दर्ज की। सीओ पुनीत कौशल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। डीसीएलआर आलोक कुमार ने कहा कि विभागीय आदेश की अनदेखी गंभीर विषय है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। केस स्टडी: एक जैसा पैटर्न, पहले सूचना… फिर आपत्ति डीसीएलआर बोले- होगी जांच क्या कहता है नियम विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 तथा बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) नियमावली, 2020 के तहत म्यूटेशन निष्पादन की समय-सीमा तय है। आम-खास सूचना के 14 दिनों के भीतर वैध बाहरी आपत्ति नहीं आने पर आदेश पारित करना अनिवार्य है। सरकारी खाता/खेसरा से इतर मामलों में बिना ठोस आधार स्वयं आपत्ति दर्ज करना नियमविरुद्ध है। अकारण मामलों को लंबित रखना कदाचार की श्रेणी में आएगा।  

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