हरियाणा के कुरुक्षेत्र में KDB मेला ग्राउंड में हुए राज्य स्तरीय पशु मेले में सांचौरी नस्ल की खूबसूरत ऊंटनी ने सबका मन जीत लिया। इस 6 साल की ऊंटनी का नाम रानी है, जिसे महेंद्रगढ़ जिले के बलायचा गांव के रहने वाले रोहतास अपने साथ मेले में लेकर आए थे। रानी का वजन 500 किलोग्राम है। रोहतास के बेटे संदीप कुमार ने मुताबिक, इस पशु मेले में रानी ने ब्यूटी कॉन्स्टेंट की अपनी कैटेगरी की चैंपियनशिप में सेकेंड पोजीशन हासिल की। इसके पहले रानी 39वीं और 40वीं राज्य स्तरीय चैंपियनशिप की चैंपियन रही। इन दोनों मेले में रानी ने पहला और दूसरा स्थान हासिल किया था। 80 हजार रुपए में खरीदी- संदीप पशुपालक संदीप ने बताया कि उसके पिता रोहतास ने रानी को 80 हजार रुपए में राजस्थान के व्यापारी से रुटीन के काम के लिए खरीदा था। तब रानी 2 साल की थी। हालांकि रानी से पहले उनके पास 4 ऊंटनी थी। लेकिन रानी उनमें सबसे ज्यादा सुंदर थी। इसलिए उसने रानी को मेले में उतारने का मन बनाया। लेकिन कंपटीशन के लिए उसे कुछ जानकारी नहीं थी। यू-ट्यूब पर देख किया तैयार तब मैंने यू-ट्यूब पर वीडियो देखकर रानी को कंपटीशन के लिए तैयार करना शुरू कर दिया। करीब 2 साल तक उसने रानी का पूरा ध्यान रखा। उसे कभी हल में नहीं जोतने दिया और ना ही उससे कुछ रुटीन का काम लिया। उसे नहलाने से लेकर सजावट तक की तैयारी उसने यू-ट्यूब पर देखकर की। मैं अपनी जेबखर्ची से उसका पालन कर रहा था। पहला ही बार में जीता कंपटीशन रानी पहली बार 4 साल की उम्र में चैंपियनशिप में उतरी थी। पहली ही चैंपियनशिप को उसने अपने नाम कर लिया। हालांकि उसे यकीन नहीं हुआ कि उसकी ऊंटनी कंपटीशन जीती चुकी है। उसके पिता ने पहले कह दिया था कि अगर रानी कंपटीशन नहीं जीत पाई तो उसे भी हल में जोत दिया जाएगा। मजबूत कद-काठी की मालिक रानी संदीप ने बताया कि रानी की लंबाई 14 फुट के आसपास है और उसकी ऊंचाई करीब 8 फुट है। रानी को खाने के लिए गुड़, मेथी और सुखा चारा (न्यार) दिया जाता है। इसके अलावा सर्दी में उसे महीने में एक-दो बार बाजरे का दलिया देते हैं। गर्मी में थोड़ा-बहुत जौ दे दिया जाता है। चकुंदर के साथ कभी-कभार फ्रूट भी देते रानी को दिन में 2 बार न्यार डाला जाता है। उसके अलावा उसे चकुंदर भी खाने में दिया जाता है। अगर घर पर फ्रूट पड़ा हो तो भी डाल देते हैं। ज्यादा अनाज देने से ऊंट का पेट भी खराब हो जाता है। इसलिए जरूरत के मुताबिक ही अनाज में मेथी डालकर दलिया बनाकर खिलाया जाता है। अब तक रानी नहीं बनी मां संदीप ने बताया कि अधिकतर ऊंटनियों को 4 साल की उम्र में क्रॉस करवाया जाता है, ताकि वे अपने बच्चे को जन्म दे सके। लेकिन रानी को उन्होंने क्रॉस नहीं करवाया, क्योंकि रानी को कंपटीशन के लिए तैयार किया गया है। बच्चे के जन्म के बाद ऊंटनी की सेहत और सुंदरता पर असर पड़ता है। रानी के बच्चे को जरूर पालेंगे साथ ही एक महीने तक बच्चे का सबसे ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि बच्चे के लिए सबसे मुश्किल समय होता है। उस समय तक उसकी गर्दन काफी नाजुक होती है। उसके टूटने का डर ज्यादा बना रहता है। एक महीने तक बच्चा अपनी गर्दन को संभाल नहीं पाता है। हालांकि वे रानी के एक बच्चे को जरूर पालेंगे।


