दरभंगा राज परिवार की महारानी का निधन:कामसुंदरी देवी ने 96 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; मिथिला में शोक की लहर

दरभंगा राज परिवार की महारानी का निधन:कामसुंदरी देवी ने 96 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; मिथिला में शोक की लहर

दरभंगा राज परिवार की वरिष्ठ सदस्य और महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया। कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। 96 साल की उम्र में राज परिवार के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। महारानी कामसुंदरी देवी महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। दोनों का विवाह 1940 में हुआ था। महाराजा कामेश्वर सिंह की पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का पहले ही निधन हो चुका था। सामाजिक क्षेत्र में कई काम किए महारानी कामसुंदरी देवी सामाजिक और परोपकारी कार्यों के लिए विशेष रूप से जानी जाती थीं। उन्होंने अपने पति महाराजा की स्मृति में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। इस फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ मिला। उनके निधन पर राज परिवार के सदस्यों, गणमान्य नागरिकों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। सभी ने उनके सामाजिक योगदान और सरल व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें मिथिला के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। दरभंगा राज परिवार की वरिष्ठ सदस्य और महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया। कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। 96 साल की उम्र में राज परिवार के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। महारानी कामसुंदरी देवी महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। दोनों का विवाह 1940 में हुआ था। महाराजा कामेश्वर सिंह की पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का पहले ही निधन हो चुका था। सामाजिक क्षेत्र में कई काम किए महारानी कामसुंदरी देवी सामाजिक और परोपकारी कार्यों के लिए विशेष रूप से जानी जाती थीं। उन्होंने अपने पति महाराजा की स्मृति में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। इस फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ मिला। उनके निधन पर राज परिवार के सदस्यों, गणमान्य नागरिकों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। सभी ने उनके सामाजिक योगदान और सरल व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें मिथिला के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।  

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