बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से जनवरी 2026 से ऑटो और ई-रिक्शा पर QR कोड और पुलिस कोड अनिवार्य करने का आदेश लागू किया गया। दावा किया गया था कि इससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी और ऑटो लुटेरा गिरोह पर नकेल कसेगी। जब भास्कर डिजिटल की टीम ने पटना शहर में ग्राउंड रियलिटी चेक किया तो तस्वीरें सरकारी दावों से बिल्कुल उलट नजर आईं। हैरानी की बात यह कि अधिकतर ऑटो चालकों को न तो QR कोड की जानकारी है और न ही पुलिस कोड के नियम वो जानते हैं। पटना शहर में ई-रिक्शा पर QR कोड और पुलिस कोड अनिवार्य को कर दिया गया, लेकिन इसकी जानकारी ऑटो ड्राइवरों को क्यों नहीं है? प्रशासन और यूनियन ने कलर कोडेड ज़ोन सिस्टम की दिशा में क्या कदम उठाए? देखिए पूरी रिपोर्ट..। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई बड़ी लापरवाही पटना के अलग-अलग इलाकों में जांच के दौरान पाया गया कि ज्यादातर ऑटो बिना QR कोड और बिना पुलिस कोड के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कई ड्राइवरों से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि उन्हें QR कोड क्या होता है, यही नहीं पता है। ऑटो ड्राइवरों ने बताया कि उन्हें न तो किसी अधिकारी ने बताया और न ही यूनियन की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले हैं। ऑटो ड्राइवर मुन्ना कुमार ने कहा कि, हम लोगों को तो मिला ही नहीं है QR कोड। आपसे ही पता चल रहा है कि ऐसा भी कुछ होता है। टुनटुन ने कहा कि, इसकी कोई सूचना नहीं मिली है। हमें कोई जानकारी नहीं है। क्यूआर कोड पहली बार सुनने को मिल रहा है। ऑटो से पुलिस कोड भी गायब नियम के मुताबिक, सभी ऑटो के आगे और पीछे पुलिस कोड लिखना जरूरी है। इसका पालन नहीं करने पर जुर्माना, बार-बार उल्लंघन पर वाहन जब्ती, चालक और मालिक दोनों से पूछताछ किया जा सकता है। इसके बावजूद भास्कर की पड़ताल में एक-दो ऑटो को छोड़ अधिकांश वाहनों पर पुलिस कोड लिखा ही नहीं मिला। इससे नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। कागज़ों में कलर कोडेड ज़ोन सिस्टम नई व्यवस्था में ऑटो को रंग आधारित ज़ोन में बांटा गया है। यह कलर जोन पीला, नीला, हरा, भूरा या सफेद रंगों में बांटा गया है। इन रंगों के अनुसार ही ऑटो को तय रूट पर चलना है। हर जोन के लिए अलग पार्किंग स्थल निर्धारित हैं, लेकिन ग्राउंड पर न तो अधिकांश ऑटो पर रंग कोड दिखा और न ही चालकों को अपने ज़ोन की स्पष्ट जानकारी थी। QR कोड का मकसद सुरक्षा और पारदर्शिता नए नियम के तहत सभी ऑटो और ई-रिक्शा पर QR कोड लगाना अनिवार्य किया गया है।अगर QR कोड को स्कैन करे तो कई अहम जानकारी मिलती है। प्रशासन का दावा है कि इससे यात्रियों को तुरंत वाहन की पहचान मिल सकेगी और किसी घटना की स्थिति में आरोपी तक पहुंचना आसान होगा। लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था अभी लागू होती नहीं दिख रही। ऑटो लुटेरा गिरोह पर कार्रवाई की तैयारी पटना पुलिस ने ऑटो लूटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह सख्ती बढ़ाई है। यूनियन अध्यक्ष को निर्देश दिया गया है कि शहरी क्षेत्र में चलने वाले सभी ऑटो पर पुलिस कोड अनिवार्य रूप से लिखा जाए। शहर में करीब 30 हजार ऑटो चलती है, जिसका डेटा ऑनलाइन दर्ज है। चालक और मालिक का पूरा रिकॉर्ड इसमें दर्ज होता है। किसी तरह की घटना होने पर तुरंत ट्रैकिंग किया जा सकता है। पुलिस का मानना है कि डिजिटल पहचान प्रणाली लागू होने से अपराधियों पर लगाम लगेगी और शहर में जाम नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था कागज़ों पर सख्त नियम और जमीनी स्तर पर ढीलापन पटना में ऑटो व्यवस्था फिलहाल इसी विरोधाभास से गुजर रही है। यदि प्रशासन जल्द जागरूकता अभियान और सख्त मॉनिटरिंग नहीं करता तो QR कोड और पुलिस कोड की पूरी कवायद केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। ऑटो लुटेरा गिरोह पर नकेल कसने की मंशा और यात्रियों को सुरक्षा की गारंटी भी सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाएगा। बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से जनवरी 2026 से ऑटो और ई-रिक्शा पर QR कोड और पुलिस कोड अनिवार्य करने का आदेश लागू किया गया। दावा किया गया था कि इससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी और ऑटो लुटेरा गिरोह पर नकेल कसेगी। जब भास्कर डिजिटल की टीम ने पटना शहर में ग्राउंड रियलिटी चेक किया तो तस्वीरें सरकारी दावों से बिल्कुल उलट नजर आईं। हैरानी की बात यह कि अधिकतर ऑटो चालकों को न तो QR कोड की जानकारी है और न ही पुलिस कोड के नियम वो जानते हैं। पटना शहर में ई-रिक्शा पर QR कोड और पुलिस कोड अनिवार्य को कर दिया गया, लेकिन इसकी जानकारी ऑटो ड्राइवरों को क्यों नहीं है? प्रशासन और यूनियन ने कलर कोडेड ज़ोन सिस्टम की दिशा में क्या कदम उठाए? देखिए पूरी रिपोर्ट..। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई बड़ी लापरवाही पटना के अलग-अलग इलाकों में जांच के दौरान पाया गया कि ज्यादातर ऑटो बिना QR कोड और बिना पुलिस कोड के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कई ड्राइवरों से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि उन्हें QR कोड क्या होता है, यही नहीं पता है। ऑटो ड्राइवरों ने बताया कि उन्हें न तो किसी अधिकारी ने बताया और न ही यूनियन की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले हैं। ऑटो ड्राइवर मुन्ना कुमार ने कहा कि, हम लोगों को तो मिला ही नहीं है QR कोड। आपसे ही पता चल रहा है कि ऐसा भी कुछ होता है। टुनटुन ने कहा कि, इसकी कोई सूचना नहीं मिली है। हमें कोई जानकारी नहीं है। क्यूआर कोड पहली बार सुनने को मिल रहा है। ऑटो से पुलिस कोड भी गायब नियम के मुताबिक, सभी ऑटो के आगे और पीछे पुलिस कोड लिखना जरूरी है। इसका पालन नहीं करने पर जुर्माना, बार-बार उल्लंघन पर वाहन जब्ती, चालक और मालिक दोनों से पूछताछ किया जा सकता है। इसके बावजूद भास्कर की पड़ताल में एक-दो ऑटो को छोड़ अधिकांश वाहनों पर पुलिस कोड लिखा ही नहीं मिला। इससे नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। कागज़ों में कलर कोडेड ज़ोन सिस्टम नई व्यवस्था में ऑटो को रंग आधारित ज़ोन में बांटा गया है। यह कलर जोन पीला, नीला, हरा, भूरा या सफेद रंगों में बांटा गया है। इन रंगों के अनुसार ही ऑटो को तय रूट पर चलना है। हर जोन के लिए अलग पार्किंग स्थल निर्धारित हैं, लेकिन ग्राउंड पर न तो अधिकांश ऑटो पर रंग कोड दिखा और न ही चालकों को अपने ज़ोन की स्पष्ट जानकारी थी। QR कोड का मकसद सुरक्षा और पारदर्शिता नए नियम के तहत सभी ऑटो और ई-रिक्शा पर QR कोड लगाना अनिवार्य किया गया है।अगर QR कोड को स्कैन करे तो कई अहम जानकारी मिलती है। प्रशासन का दावा है कि इससे यात्रियों को तुरंत वाहन की पहचान मिल सकेगी और किसी घटना की स्थिति में आरोपी तक पहुंचना आसान होगा। लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था अभी लागू होती नहीं दिख रही। ऑटो लुटेरा गिरोह पर कार्रवाई की तैयारी पटना पुलिस ने ऑटो लूटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह सख्ती बढ़ाई है। यूनियन अध्यक्ष को निर्देश दिया गया है कि शहरी क्षेत्र में चलने वाले सभी ऑटो पर पुलिस कोड अनिवार्य रूप से लिखा जाए। शहर में करीब 30 हजार ऑटो चलती है, जिसका डेटा ऑनलाइन दर्ज है। चालक और मालिक का पूरा रिकॉर्ड इसमें दर्ज होता है। किसी तरह की घटना होने पर तुरंत ट्रैकिंग किया जा सकता है। पुलिस का मानना है कि डिजिटल पहचान प्रणाली लागू होने से अपराधियों पर लगाम लगेगी और शहर में जाम नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था कागज़ों पर सख्त नियम और जमीनी स्तर पर ढीलापन पटना में ऑटो व्यवस्था फिलहाल इसी विरोधाभास से गुजर रही है। यदि प्रशासन जल्द जागरूकता अभियान और सख्त मॉनिटरिंग नहीं करता तो QR कोड और पुलिस कोड की पूरी कवायद केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। ऑटो लुटेरा गिरोह पर नकेल कसने की मंशा और यात्रियों को सुरक्षा की गारंटी भी सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाएगा।


