कठपुतलियां नाटक ने झकझोरा दर्शकों का अंतर्मन, ममत्व की विजय का जीवंत मंचन

कठपुतलियां नाटक ने झकझोरा दर्शकों का अंतर्मन, ममत्व की विजय का जीवंत मंचन

भीलवाड़ा शहर के टाउन हॉल में शुक्रवार शाम ‘युवा नाट्य समारोह’ का शानदार आगाज़ हुआ। चार दिवसीय महोत्सव जयपुर की त्रिमूर्ति संस्था के संस्थापक प्रमोद भसीन को समर्पित है। महोत्सव के प्रथम दिन ‘रसधारा’ संस्था की ओर से कठपुतलियां’ नाटक का मंचन हुआ। संस्था के गोपाल आचार्य ने बताया कि नाटक लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी से प्रेरित है, जिसका सशक्त नाट्य रूपांतरण और निर्देशन अनुराग सिंह ने किया। नाटक की कहानी नायक रामकिशन (एक कठपुतली चालक) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पत्नी के देहांत के बाद अपने ढाई माह के बच्चे का अकेले पालन करता है। वहीं दूसरी ओर सुगना है, जो गाइड जग्गू के शारीरिक आकर्षण वाले ‘छद्म प्रेम’ में कैद है। हालात सुगना और रामकिशन को विवाह के बंधन में बांध देते हैं, लेकिन सुगना बच्चे को स्वीकार नहीं करती। अंततः रामकिशन का धैर्य और उसका कोमल हृदय सुगना की सोच बदल देता है। सुगना को बोध होता है कि स्त्री केवल एक भौतिक देह नहीं, बल्कि ममत्व की प्रतिमूर्ति है।

इन्होंने दी मंचन में जान

मंच पर अपनी अदाकारी से कुलदीप सिंह, शिवांगी बैरवा, दुष्यंत व्यास, गरिमा सिंह, निष्काम राठी, हरिसिंह, प्रभु प्रजापत, विभूति चौधरी, अंकित शाह, दिनेश चौधरी, जगदीश प्रसाद, देवराज पारीक, राहुल लौहार, सुरेंद्र माली, महेश प्रजापत, हितेश नलवाया, अनिमेष आचार्य, दीपक, अंजु जोशी, पूजा चौधरी, अंशु और रेखा जैन ने दर्शकों को बांधे रखा। नाटक की सफलता में पर्दे के पीछे रवि ओझा (लाइट डिजाइन), केजी कदम व हर्षित वैष्णव (मंच सज्जा व सामग्री), और रवि यादव व हितेश नलवाया (संगीत) का विशेष योगदान रहा। पूरी प्रस्तुति गोपाल आचार्य के निर्देशन में तैयार हुई।

इन्होंने किया उदघाटन

समारोह का उद्घाटन मुंबई से आए विख्यात अभिनेता सीआइडी फेम डॉ. सालुके नरेंद्र गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित किया। इस अवसर पर प्रमोद भसीन के पुत्र शांतनु भसीन, ईश्वरदत्त माथुर, सांसद दामोदर अग्रवाल, नगर विकास के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण डाड, उद्योगपति तिलोक चंद छाबड़ा और महापौर राकेश पाठक मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *