पंजाबी सिंगर बनवाएंगे डॉ. रंधावा का स्मारक:रॉयल फैमिली से जुड़े, आजादी के बाद दिल्ली के पहले DC बने, चंडीगढ़ में लगाए अनोखे पेड़

पंजाबी सिंगर बनवाएंगे डॉ. रंधावा का स्मारक:रॉयल फैमिली से जुड़े, आजादी के बाद दिल्ली के पहले DC बने, चंडीगढ़ में लगाए अनोखे पेड़

पंजाब के जीरा में पैदा हुए डॉक्टर मोहिंदर सिंह रंधावा की विरासत को पंजाबी सिंगर उनकी फैमिली के साथ मिलकर नई पहचान देंगे। इसके लिए सतिंदर सरताज ने 3 दिन पहले डॉ. रंधावा की बेटी आशा ग्लासी रंधावा, पोते रणजीत रंधावा और सतविंदर रंधावा से मुलाकात की। सतिंदर सरताज के घर पर हुई इस मुलाकात में डॉ. मोहिंदर सिंह रंधावा की विरासत को नया रूप देने के लिए लंबी चर्चा हुई। डॉक्टर सरताज ने कहा कि डॉ. रंधावा को पंजाब की नई पीढ़ी बहुत कम या न के बराबर जानती है, मगर उनका योगदान पंजाब के लिए बड़ा है। जिला होशियारपुर की तहसील दसूहा के गांव बोदलां के रॉयल परिवार से संबंधित डॉक्टर रंधावा आजादी के बाद दिल्ली के पहले डीसी बने। लुधियाना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ रोज गार्डन में महत्वपूर्ण योगदान रहा। बॉटनी में मास्टर्स होने के चलते चंडीगढ़ की सड़कों पर ऐसे पेड़ लगवाए, जिनमें सालभर पतझड़ नहीं आता। पंजाब में ट्रैक्टर लाने से लेकर विभाजन के बाद जमीन बांटने की जिम्मेदारी उन्होंने जालंधर में बैठकर निभाई। आइए जानते हैं कौन थे डॉ. एमएस रंधावा… डॉ. रंधावा की हवेली को बनाएंगे स्मारक
सिंगर डॉ. सतिंदर सरताज ने आधुनिक पंजाब के निर्माता कहे जाने वाले महान विजनरी डॉ. मोहिंदर सिंह रंधावा की विरासत को सहेजने का बीड़ा उठाया है। सरताज अब डॉ. रंधावा के पैतृक गांव बोदलां (दसूहा) स्थित उनकी पुरानी हवेली को फिर से जीवित कर उसे एक शानदार स्मारक का रूप देंगे। एक किस्सा सुनाते हुए सरताज ने बताया कि उनका पंजाब के हरियाणा में कंसर्ट था। इस दौरान उनको एक डिप्टी कमिश्नर मिले। उन्होंने कहा कि मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं। इस पर मैंने कहा कि हो सके तो डॉ. एमएस रंधावा का स्टैच्यू लगवा दें। इसके बाद होशियारपुर में डॉक्टर रंधावा का पहला स्टैच्यू लगा। परिवार ने सरताज के घर पहुंचकर मुलाकात की
शुक्रवार को डॉ. रंधावा की बेटी आशा ग्लासी रंधावा, उनके पोत्र रणजीत रंधावा और सतविंदर रंधावा सतिंदर सरताज के निवास पर पहुंचे। इस दौरान उनके पैतृक गांव बोदलां की कुछ प्रतिष्ठित हस्तियां भी मौजूद रहीं। इस मुलाकात के दौरान डॉ. रंधावा की याद में एक भव्य स्मारक बनाने पर गंभीर चर्चा हुई, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को जान सकें। जर्जर हो चुकी है 100 साल पुरानी हवेली
गांव बोदलां में डॉ. रंधावा का पुश्तैनी घर है। 1920 के दशक में बनी यह हवेली कभी कला और संस्कृति का केंद्र थी। लेकिन देखरेख के अभाव में अब यह जर्जर हो चुकी है। सरताज ने इस ऐतिहासिक धरोहर को संवारने की जिम्मेदारी ली है। अब जानें कौन थे पंजाब के इकोनॉमिक आर्किटेक्ट डॉक्टर रंधावा… पंजाब के छठे दरिया के नाम से फेमस
डॉक्टर एमएस रंधावा का जन्म 2 फरवरी 1909 को जीरा (फिरोजपुर) में हुआ था। वे एक ICS अधिकारी होने के साथ-साथ बॉटनी में माहिर थे। आजादी के बाद पंजाब में हुए आर्थिक विकास के लिए उनकी नीतियों को माना जाता है। उनको पंजाब का छठा दरिया भी कहा जाता है। पंजाब की आर्थिकता की रीढ़ बने ग्रीन रिवेल्यूशन में डॉक्टर रंधावा का हाथ रहा। खेती को नई दिशा देने के लिए लुधियाना में एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की नींव रखी। चंडीगढ़ में रोज गार्डन बनाने में योगदान के साथ पूरा साल हरे भरे रहने वाले पेड़ लगवाए। दसूहा की रॉयल फैमिली में पैदा हुए
मोहिंदर सिंह रंधावा के पिता शेर सिंह रंधावा और माता बचिंत कौर थीं। उनका परिवार समृद्ध था। उन्होंने 1924 में खालसा हाई स्कूल, मुक्तसर से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद लाहौर से 1926 में F.Sc., 1929 में BSc (ऑनर्स) और 1930 में MSc (ऑनर्स) की डिग्री की। साल 1955 में उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय ने शैवाल पर रिसर्च के लिए डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि से सम्मानित किया। दिल्ली के पहले डीसी, पंजाब के फोक को संभाला
आजाद हिंदुस्तान में दिल्ली के पहले डिप्टी कमिश्नर बनने वाले डॉक्टर रंधावा ने पंजाब के फोक को संभाला। पुराने गीतों को एकत्रित किया और इन पर एक किताब लिखी। अपनी बायोग्राफी आप बीती में डॉक्टर रंधावा ने इसका जिक्र किया है। इसके अलावा कांगड़ा की पेंटिंग पर रिसर्च किए और किताबें लिखीं। कांगड़ा की पेंटिंग को संभालने में डॉ.रंधावा का योगदान रहा। यूरोप से पहला ट्रैक्टर पंजाब में डॉक्टर रंधावा लेकर आए। 800 पटवारियों के साथ जालंधर में बैठकर जमीन बांटी
सिंगर सतिंदर सरताज ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब भारत का बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान से लाखों शरणार्थी पंजाब में आकर ठहरे। इन लोगों को जमीन और प्रॉपर्टी बांटने का जिम्मा डॉक्टर रंधावा को मिला। इससे पहले उनको दिल्ली, लखनऊ-कानपुर में कमिश्नर रहने का अनुभव था। सतिंदर सरताज बताते हैं कि डॉक्टर रंधावा ने जालंधर में 800 पटवारियों के साथ बैठकर लोगों को जमीन बांटी। ये बंटवारा इतिहास का सबसे अच्छा और निस्वार्थ बंटवारा था। पाकिस्तान से आए जिस किसी की जमीन नहर के पास थी उसे नहर के पास दी गई। जिसकी गांव में थी उसे गांव में दी, जिसकी रोड साइड थी उसे रोड साइड दी। शिव कुमार बटालवी को चंडीगढ़ में नौकरी दिलाई
सतिंदर सरताज ने बताया कि डॉक्टर रंधावा ने उस समय कलाकारों के लिए भी बड़ा काम किया। उसे जमाने के दिग्गज कलाकार उनके पास आते, उनसे मिलते। वे दिल खोलकर उनकी मदद करते। पंजाब के मशहूर कवि शिव कुमार बटालवी को चंडीगढ़ के सेक्टर 22 के बैंक में नौकरी पर लगवाया। शिव सिंह बेदी को मकान दिलवाया। इसके अलावा अमृता प्रीतम, राजकुमार साहब का उनके पास अकसर आना-जाना लगा रहता था।

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