पंचर बनाने वाले का बेटा टॉपर, पढ़िए सक्सेस स्टोरी:बिहार टॉप-10 में 139 छात्रों ने बनाई जगह, नीरा बेचने वाले का बेटा भी लिस्ट में

पंचर बनाने वाले का बेटा टॉपर, पढ़िए सक्सेस स्टोरी:बिहार टॉप-10 में 139 छात्रों ने बनाई जगह, नीरा बेचने वाले का बेटा भी लिस्ट में

बिहार मैट्रिक परीक्षा 2026 का रिजल्ट रविवार को जारी कर दिया गया। इस बार 81.79% छात्र स्टूडेंट्स एग्जाम में पास हुए हैं। इसमें 48.66% छात्र और 51.33% छात्राएं सफल रहीं। जमुई की पुष्पांजलि कुमारी और वैशाली की सबरीन परवीन ने 492 अंक हासिल कर टॉप किया है। बेगूसराय की नाहिद सुल्ताना सेकेंड टॉपर हैं। उन्हें 500 में से 489 मार्क्स आए हैं। थर्ड टॉपर में दो स्टूडेंट्स हैं- बक्सर की अनूपा कुमारी और बेगूसराय के ओमकार कुमार। इन दोनों को 488 नंबर मिले हैं। टॉपर्स में सबसे ज्यादा 14 स्टूडेंट्स औरंगाबाद के हैं। बेगूसराय में 13 छात्रों ने टॉप किया है। सुपौल के राजदीप कुमार और अररिया के सुमित कुमार यादव ने 485 अंक (97%) के साथ राज्य में छठा स्थान हासिल किया है। राजदीप के पिता गुमटी में साइकिल की दुकान चलाते हैं, जबकि सुमित कुमार यादव के पिता दूसरे राज्यों में मजदूरी करते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी बांका के आनंद कुमार की है, जिन्होंने 483 अंक (96.6%) के साथ आठवां स्थान प्राप्त किया। उनके पिता पेशे से किसान हैं। औरंगाबाद के शिव कुमार ने भी राज्य में दसवां स्थान प्राप्त किया है। उनके पिता मनोज चौधरी गांव में रहकर नीरा (ताड़ी) बेचने का काम करते हैं। पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज… सबसे पहले टॉपर्स की लिस्ट देखिए… पिछले साल से 1% कम रहा रिजल्ट इस साल 81.79% छात्र पास हुए हैं। साल 2025 में 82.11% छात्र सफल हुए थे। इस बार का रिजल्ट पिछली बार से 1 फीसदी कम रहा। पिछले साल का रिजल्ट काफी दिलचस्प रहा था। जहां एक ही रैंक पर तीन जिलों के छात्रों ने कब्जा जमाया था। 2025 में समस्तीपुर की साक्षी कुमारी ने 500 में से 489 नंबर लाकर टॉप किया था। पहले बिहार टॉपर्स से मिलिए अब आगे पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज टायर की दुकान चलाते हैं सबरीन के पिता वैशाली की रहने वाली सबरीन परवीन के पिता मो. सज्जाद आलम पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट में टायर की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां अंगूरी खातून हाउस वाइफ हैं। सबरीन तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और उनके दो छोटे भाई हैं। सबरिन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने कहा, “कड़ी मेहनत, अनुशासन और नियमित पढ़ाई की बदौलत ही मुझे आज यह सफलता मिली है।” साइंटिस्ट बनना चाहती हैं पुष्पांजलि स्टेट टॉपर बनी दोनों छात्राएं मिडिल क्लास फैमिली से आती हैं। पुष्पाजंलि कुमारी के पिता सरकारी स्कूल के टीचर हैं। भास्कर से बातचीत में पुष्पांजलि ने कहा कि उन्हें विज्ञान और गणित में विशेष रुचि। इसलिए वह बड़ा होकर साइंटिस्ट बनना चाहती है। पुष्पांजलि ने कहा, “मैं शुरू से ही टॉपर बनना चाहती थी। इसके लिए मैंने दिन-रात मेहनत की और सेल्फ स्टडी पर खास ध्यान दिया। आज मेरा सपना पूरा हो गया है। मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को देना चाहती हूं, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया।” उन्होंने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई कक्षा 2 से 5 तक उनके पिता के स्कूल, मध्य विद्यालय भगवानपुर (बांका) में हुई। इसके बाद उन्होंने सिमुलतला आवासीय विद्यालय से आगे की पढ़ाई की, जहां उन्हें बेहतर मार्गदर्शन मिला। परीक्षा के दौरान वह रोजाना 10 से 12 घंटे तक सेल्फ स्टडी करती थीं। जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती गई, उन्होंने अपनी पढ़ाई का समय और बढ़ा दिया और सभी विषयों पर बराबर ध्यान दिया। किसान की बेटी अनूपा बनीं बिहार टॉप-3 बक्सर की बेटी अनूपा कुमारी ने बिहार में तीसरा स्थान हासिल किया है। उच्च विद्यालय खरहाना की छात्रा अनूपा की इस सफलता से जिलेभर में गर्व और खुशी का माहौल है। अनूपा कुमारी राजपुर प्रखंड के ककरिया गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता नित्यानंद यादव पेशे से किसान हैं, जबकि उनकी मां हाउस वाइफ हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अनूपा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा कभी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। अनूपा के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और हर कोई उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। एंबुलेंस कर्मचारी के बेटे ने हासिल की चौथी रैंक पूर्णिया के रुपौली के रहने वाले अंश राज ने पूरे बिहार में चौथा स्थान हासिल किया है। उत्क्रमित एमएस बैरिया गोरिया उच्च विद्यालय के छात्र अंश ने 500 में से 487 अंक प्राप्त किए हैं। यानी उन्हें 97.4% मार्क्स मिले हैं। अंश राज के पिता मुकेश कुमार एंबुलेंस कर्मी हैं। वे डायल 102 सेवा में EMT (इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन) के पद पर कार्यरत हैं और रुपौली के मोहनपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चौथी टॉपर की मां बोली बेटी डॉक्टर बनेगी समस्तीपुर की ज्योति कुमारी ने बताया, “मैं एक सामान्य छात्रा की तरह रोज करीब 7 घंटे पढ़ाई करती थी। मेरा पूरा फोकस रिवीजन पर रहता था। मुझे पूरा विश्वास था कि मैं टॉप-10 में जगह बनाऊंगी।” ज्योति की मां रिंकू ने कहा, “बेटी खुद ही सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी। मैंने उसे कभी डांटा नहीं, सिर्फ पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। आज मुझे बहुत खुशी है। मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी डॉक्टर बने।” पंचर की दुकान चलाते हैं टॉपर राजदीप के पिता सुपौल के राघोपुर प्रखंड के खुबलाल उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामविशनपुर के छात्र राजदीप कुमार बेहद गरीब परिवार से आते हैं। वह अपने चार-भाई बहनों में तीसरे नंबर पर आते हैं। उनके पिता पंचर की दुकान चलाते हैं। राजदीप भी पिता के साथ करीब दो घंटे दुकान के काम में हाथ बंटाते हैं। मां हाउस वाइफ है। घर का खर्चा किसी तरह चलता है। आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद राजदीप ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। अब उनकी मेहनत रंग लाई है। उन्होंने परीक्षा में 485 नंबर लाकर परिवार और गांववालों का नाम रौशन किया है। अनुज के मां-पिता सरकारी टीचर हैं सुपौल के छातापुर प्रखंड के अनुज ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भीमपुर से पढ़ाई की और मैट्रिक परीक्षा में 481 अंक (96.2%) हासिल कर राज्य में 10वां स्थान प्राप्त किया। अनुज काफी साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता हरि नारायण सिंह मधेपुरा जिले के कुमारखंड स्थित एक 10+2 विद्यालय में शिक्षक हैं। पिता ट्यूशन भी पढ़ाते हैं। मां रंजू कुमारी भी गांव के ही प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं। अनुज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के नजदीकी विद्यालय से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई भीमपुर स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। इसके बाद घर पर ही सेल्फ स्टडी कर परीक्षा की तैयारी की। अनुज रोजाना लगभग 8 से 9 घंटे पढ़ाई करते थे और कई बार देर रात 2 से 3 बजे तक भी पढ़ते रहे। उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है और वे मेडिकल क्षेत्र में जाकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं। बांका के आनंद ने किसान परिवार से निकलकर रचा इतिहास बांका के रजौन प्रखंड के परघड़ी गांव के छात्र आनंद कुमार ने मैट्रिक परीक्षा 2026 में 483 अंक (96.6%) प्राप्त कर राज्य में आठवां स्थान हासिल किया है। उनके घर की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है। आनंद के पिता सुमन कुमार सिंह पेशे से किसान हैं। मां हाउस वाइफ है। फसल खराब होने की स्थिति में परिवार कई बार कर्ज लेकर घर चलाता है। आर्थिक तंगी के बावजूद आनंद ने अपनी पढाई पूरी लगन से की। उन्होंने कहा कि वह 4 से 5 घंटे प्रतिदिन सेल्फ स्टडी करते थे। इसके अलावा उनके माता-पिता के साथ-साथ मां शारदे कोचिंग सेंटर के शिक्षकों ने भी उनका काफी सहयोग किया। आनंद आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करते रहेंगे। अररिया के सुमित ने मजदूर परिवार से बनाईं नई पहचान अररिया के पलासी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के छात्र सुमित कुमार यादव साधारण ग्रामीण परिवार से आते हैं। उनके पिता कृष्ण यादव पहले दिल्ली और अब पंजाब में मजदूरी करते हैं। मां हाउस वाइफ है। परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है। इसके बावजदू सुमित ने लगन से अपनी पढ़ाई पूरी की और मैट्रिक में 485 अंक लाकर पूरे राज्य में छठा स्थान हासिल किया है। सुमित ने कहा कि वह प्रतिदिन 10 घंटे की नियमित पढाई करते थे। सुमित ने कहा कि मैं आज जो कुछ भी कर पाया उसके पीछे मेरे माता-पिता, शिक्षकों और गुरु महाराज की कृपा है। सुमित का कहना है कि वह आगे चलकर इंटर में गणित विषय से पढ़ाई कर UPSC की तैयारी करना चाहता है, ताकि वे सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा कर सकें। शिव के पिता नीरा बेचने का काम करते हैं औरंगाबाद के राजकीय देव हाई स्कूल के छात्र शिव कुमार ने शहर के देव गोदाम में नानी के घर रहकर पढ़ाई की है। शिव कुमार झारखंड के पलामू जिला के हरिहरगंज प्रखंड के अररूआ खुर्द गांव के रहने वाले हैं। पिता मनोज चौधरी गांव में रहकर नीरा बेचने का काम करते हैं। जबकि, मां सुमन देवी गृहणी है। शिव कुमार दो भाई और एक बहन में सबसे बड़े है। छोटा भाई अंशु कुमार और बहन चांदनी कुमारी गांव में ही रहते हैं। शिव कुमार ने 10वीं में 481 अंक हासिल किया है। छात्र का टॉप टेन में 10वां स्थान है। शिव एससी वर्ग में आते हैं। वह बचपन से ही नाना के घर देव में ही रहकर पढ़ाई करता है। नाना तिलेश्वर चौधरी और नानी कांति देवी ने बताया कि बचपन में शिव कुमार की तबीयत खराब रहने के कारण हमलोग बचपन से ही अपने घर पर रख रहे हैं, लेकिन आज इस परीक्षा परिणाम से हमलोग काफी खुश हैं। प्लंबर का बेटा बना टॉपर पश्चिमी चंपारण के बेतिया की माही कुमारी ने राज्य स्तर पर सातवां स्थान हासिल किया है। संत टेरेसा स्कूल से पढ़ाई कर 500 में 484 अंक (96.8%) प्राप्त किया है। माही के पिता मोहन कुमार पेशे से प्लंबर हैं, जबकि उनकी माता ललिता देवी हाउस वाइफ हैं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी के माध्यम से तैयारी कर यह सफलता पाई। माही का कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो बिना कोचिंग के भी टॉप किया जा सकता है। उन्होंने सेल्फ स्टडी और आत्मविश्वास को अपनी सफलता की कुंजी बताया। माही कुमारी ने अपने भविष्य के लक्ष्य के बारे में बताया कि वह आगे चलकर लॉ की पढ़ाई करना चाहती हैं। माही ने कहा कि न्याय और समाज सेवा के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं। बिहार के टॉपर को मिलेंगे 2 लाख बिहार बोर्ड के 10वीं में टॉप करने वाली छात्रों को सरकार की तरफ से कैश इनाम मिलते है। बिहार बोर्ड 10वीं के टॉपर को 2 लाख, दूसरे टॉपर को डेढ़ लाख और तीसरे टॉपर को 1 लाख रुपए से प्राइज मनी मिलेगी। चौथे स्थान पर आने वाले छात्रों को 20 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा टॉप-10 में आने वाले सभी विद्यार्थियों को लैपटॉप और मेडल दिया जाएगा। बिहार मैट्रिक परीक्षा 2026 का रिजल्ट रविवार को जारी कर दिया गया। इस बार 81.79% छात्र स्टूडेंट्स एग्जाम में पास हुए हैं। इसमें 48.66% छात्र और 51.33% छात्राएं सफल रहीं। जमुई की पुष्पांजलि कुमारी और वैशाली की सबरीन परवीन ने 492 अंक हासिल कर टॉप किया है। बेगूसराय की नाहिद सुल्ताना सेकेंड टॉपर हैं। उन्हें 500 में से 489 मार्क्स आए हैं। थर्ड टॉपर में दो स्टूडेंट्स हैं- बक्सर की अनूपा कुमारी और बेगूसराय के ओमकार कुमार। इन दोनों को 488 नंबर मिले हैं। टॉपर्स में सबसे ज्यादा 14 स्टूडेंट्स औरंगाबाद के हैं। बेगूसराय में 13 छात्रों ने टॉप किया है। सुपौल के राजदीप कुमार और अररिया के सुमित कुमार यादव ने 485 अंक (97%) के साथ राज्य में छठा स्थान हासिल किया है। राजदीप के पिता गुमटी में साइकिल की दुकान चलाते हैं, जबकि सुमित कुमार यादव के पिता दूसरे राज्यों में मजदूरी करते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी बांका के आनंद कुमार की है, जिन्होंने 483 अंक (96.6%) के साथ आठवां स्थान प्राप्त किया। उनके पिता पेशे से किसान हैं। औरंगाबाद के शिव कुमार ने भी राज्य में दसवां स्थान प्राप्त किया है। उनके पिता मनोज चौधरी गांव में रहकर नीरा (ताड़ी) बेचने का काम करते हैं। पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज… सबसे पहले टॉपर्स की लिस्ट देखिए… पिछले साल से 1% कम रहा रिजल्ट इस साल 81.79% छात्र पास हुए हैं। साल 2025 में 82.11% छात्र सफल हुए थे। इस बार का रिजल्ट पिछली बार से 1 फीसदी कम रहा। पिछले साल का रिजल्ट काफी दिलचस्प रहा था। जहां एक ही रैंक पर तीन जिलों के छात्रों ने कब्जा जमाया था। 2025 में समस्तीपुर की साक्षी कुमारी ने 500 में से 489 नंबर लाकर टॉप किया था। पहले बिहार टॉपर्स से मिलिए अब आगे पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज टायर की दुकान चलाते हैं सबरीन के पिता वैशाली की रहने वाली सबरीन परवीन के पिता मो. सज्जाद आलम पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट में टायर की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां अंगूरी खातून हाउस वाइफ हैं। सबरीन तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और उनके दो छोटे भाई हैं। सबरिन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने कहा, “कड़ी मेहनत, अनुशासन और नियमित पढ़ाई की बदौलत ही मुझे आज यह सफलता मिली है।” साइंटिस्ट बनना चाहती हैं पुष्पांजलि स्टेट टॉपर बनी दोनों छात्राएं मिडिल क्लास फैमिली से आती हैं। पुष्पाजंलि कुमारी के पिता सरकारी स्कूल के टीचर हैं। भास्कर से बातचीत में पुष्पांजलि ने कहा कि उन्हें विज्ञान और गणित में विशेष रुचि। इसलिए वह बड़ा होकर साइंटिस्ट बनना चाहती है। पुष्पांजलि ने कहा, “मैं शुरू से ही टॉपर बनना चाहती थी। इसके लिए मैंने दिन-रात मेहनत की और सेल्फ स्टडी पर खास ध्यान दिया। आज मेरा सपना पूरा हो गया है। मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को देना चाहती हूं, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया।” उन्होंने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई कक्षा 2 से 5 तक उनके पिता के स्कूल, मध्य विद्यालय भगवानपुर (बांका) में हुई। इसके बाद उन्होंने सिमुलतला आवासीय विद्यालय से आगे की पढ़ाई की, जहां उन्हें बेहतर मार्गदर्शन मिला। परीक्षा के दौरान वह रोजाना 10 से 12 घंटे तक सेल्फ स्टडी करती थीं। जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती गई, उन्होंने अपनी पढ़ाई का समय और बढ़ा दिया और सभी विषयों पर बराबर ध्यान दिया। किसान की बेटी अनूपा बनीं बिहार टॉप-3 बक्सर की बेटी अनूपा कुमारी ने बिहार में तीसरा स्थान हासिल किया है। उच्च विद्यालय खरहाना की छात्रा अनूपा की इस सफलता से जिलेभर में गर्व और खुशी का माहौल है। अनूपा कुमारी राजपुर प्रखंड के ककरिया गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता नित्यानंद यादव पेशे से किसान हैं, जबकि उनकी मां हाउस वाइफ हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अनूपा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा कभी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। अनूपा के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और हर कोई उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। एंबुलेंस कर्मचारी के बेटे ने हासिल की चौथी रैंक पूर्णिया के रुपौली के रहने वाले अंश राज ने पूरे बिहार में चौथा स्थान हासिल किया है। उत्क्रमित एमएस बैरिया गोरिया उच्च विद्यालय के छात्र अंश ने 500 में से 487 अंक प्राप्त किए हैं। यानी उन्हें 97.4% मार्क्स मिले हैं। अंश राज के पिता मुकेश कुमार एंबुलेंस कर्मी हैं। वे डायल 102 सेवा में EMT (इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन) के पद पर कार्यरत हैं और रुपौली के मोहनपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चौथी टॉपर की मां बोली बेटी डॉक्टर बनेगी समस्तीपुर की ज्योति कुमारी ने बताया, “मैं एक सामान्य छात्रा की तरह रोज करीब 7 घंटे पढ़ाई करती थी। मेरा पूरा फोकस रिवीजन पर रहता था। मुझे पूरा विश्वास था कि मैं टॉप-10 में जगह बनाऊंगी।” ज्योति की मां रिंकू ने कहा, “बेटी खुद ही सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी। मैंने उसे कभी डांटा नहीं, सिर्फ पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। आज मुझे बहुत खुशी है। मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी डॉक्टर बने।” पंचर की दुकान चलाते हैं टॉपर राजदीप के पिता सुपौल के राघोपुर प्रखंड के खुबलाल उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामविशनपुर के छात्र राजदीप कुमार बेहद गरीब परिवार से आते हैं। वह अपने चार-भाई बहनों में तीसरे नंबर पर आते हैं। उनके पिता पंचर की दुकान चलाते हैं। राजदीप भी पिता के साथ करीब दो घंटे दुकान के काम में हाथ बंटाते हैं। मां हाउस वाइफ है। घर का खर्चा किसी तरह चलता है। आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद राजदीप ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। अब उनकी मेहनत रंग लाई है। उन्होंने परीक्षा में 485 नंबर लाकर परिवार और गांववालों का नाम रौशन किया है। अनुज के मां-पिता सरकारी टीचर हैं सुपौल के छातापुर प्रखंड के अनुज ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भीमपुर से पढ़ाई की और मैट्रिक परीक्षा में 481 अंक (96.2%) हासिल कर राज्य में 10वां स्थान प्राप्त किया। अनुज काफी साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता हरि नारायण सिंह मधेपुरा जिले के कुमारखंड स्थित एक 10+2 विद्यालय में शिक्षक हैं। पिता ट्यूशन भी पढ़ाते हैं। मां रंजू कुमारी भी गांव के ही प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं। अनुज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के नजदीकी विद्यालय से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई भीमपुर स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। इसके बाद घर पर ही सेल्फ स्टडी कर परीक्षा की तैयारी की। अनुज रोजाना लगभग 8 से 9 घंटे पढ़ाई करते थे और कई बार देर रात 2 से 3 बजे तक भी पढ़ते रहे। उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है और वे मेडिकल क्षेत्र में जाकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं। बांका के आनंद ने किसान परिवार से निकलकर रचा इतिहास बांका के रजौन प्रखंड के परघड़ी गांव के छात्र आनंद कुमार ने मैट्रिक परीक्षा 2026 में 483 अंक (96.6%) प्राप्त कर राज्य में आठवां स्थान हासिल किया है। उनके घर की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है। आनंद के पिता सुमन कुमार सिंह पेशे से किसान हैं। मां हाउस वाइफ है। फसल खराब होने की स्थिति में परिवार कई बार कर्ज लेकर घर चलाता है। आर्थिक तंगी के बावजूद आनंद ने अपनी पढाई पूरी लगन से की। उन्होंने कहा कि वह 4 से 5 घंटे प्रतिदिन सेल्फ स्टडी करते थे। इसके अलावा उनके माता-पिता के साथ-साथ मां शारदे कोचिंग सेंटर के शिक्षकों ने भी उनका काफी सहयोग किया। आनंद आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करते रहेंगे। अररिया के सुमित ने मजदूर परिवार से बनाईं नई पहचान अररिया के पलासी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के छात्र सुमित कुमार यादव साधारण ग्रामीण परिवार से आते हैं। उनके पिता कृष्ण यादव पहले दिल्ली और अब पंजाब में मजदूरी करते हैं। मां हाउस वाइफ है। परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है। इसके बावजदू सुमित ने लगन से अपनी पढ़ाई पूरी की और मैट्रिक में 485 अंक लाकर पूरे राज्य में छठा स्थान हासिल किया है। सुमित ने कहा कि वह प्रतिदिन 10 घंटे की नियमित पढाई करते थे। सुमित ने कहा कि मैं आज जो कुछ भी कर पाया उसके पीछे मेरे माता-पिता, शिक्षकों और गुरु महाराज की कृपा है। सुमित का कहना है कि वह आगे चलकर इंटर में गणित विषय से पढ़ाई कर UPSC की तैयारी करना चाहता है, ताकि वे सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा कर सकें। शिव के पिता नीरा बेचने का काम करते हैं औरंगाबाद के राजकीय देव हाई स्कूल के छात्र शिव कुमार ने शहर के देव गोदाम में नानी के घर रहकर पढ़ाई की है। शिव कुमार झारखंड के पलामू जिला के हरिहरगंज प्रखंड के अररूआ खुर्द गांव के रहने वाले हैं। पिता मनोज चौधरी गांव में रहकर नीरा बेचने का काम करते हैं। जबकि, मां सुमन देवी गृहणी है। शिव कुमार दो भाई और एक बहन में सबसे बड़े है। छोटा भाई अंशु कुमार और बहन चांदनी कुमारी गांव में ही रहते हैं। शिव कुमार ने 10वीं में 481 अंक हासिल किया है। छात्र का टॉप टेन में 10वां स्थान है। शिव एससी वर्ग में आते हैं। वह बचपन से ही नाना के घर देव में ही रहकर पढ़ाई करता है। नाना तिलेश्वर चौधरी और नानी कांति देवी ने बताया कि बचपन में शिव कुमार की तबीयत खराब रहने के कारण हमलोग बचपन से ही अपने घर पर रख रहे हैं, लेकिन आज इस परीक्षा परिणाम से हमलोग काफी खुश हैं। प्लंबर का बेटा बना टॉपर पश्चिमी चंपारण के बेतिया की माही कुमारी ने राज्य स्तर पर सातवां स्थान हासिल किया है। संत टेरेसा स्कूल से पढ़ाई कर 500 में 484 अंक (96.8%) प्राप्त किया है। माही के पिता मोहन कुमार पेशे से प्लंबर हैं, जबकि उनकी माता ललिता देवी हाउस वाइफ हैं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी के माध्यम से तैयारी कर यह सफलता पाई। माही का कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो बिना कोचिंग के भी टॉप किया जा सकता है। उन्होंने सेल्फ स्टडी और आत्मविश्वास को अपनी सफलता की कुंजी बताया। माही कुमारी ने अपने भविष्य के लक्ष्य के बारे में बताया कि वह आगे चलकर लॉ की पढ़ाई करना चाहती हैं। माही ने कहा कि न्याय और समाज सेवा के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं। बिहार के टॉपर को मिलेंगे 2 लाख बिहार बोर्ड के 10वीं में टॉप करने वाली छात्रों को सरकार की तरफ से कैश इनाम मिलते है। बिहार बोर्ड 10वीं के टॉपर को 2 लाख, दूसरे टॉपर को डेढ़ लाख और तीसरे टॉपर को 1 लाख रुपए से प्राइज मनी मिलेगी। चौथे स्थान पर आने वाले छात्रों को 20 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा टॉप-10 में आने वाले सभी विद्यार्थियों को लैपटॉप और मेडल दिया जाएगा।  

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