Pulmonary Embolism Symptoms: अचानक सांस फूलना हो सकता है खतरनाक संकेत, जानिए पल्मोनरी एम्बोलिज्म के खतरे

Pulmonary Embolism Symptoms: अचानक सांस फूलना हो सकता है खतरनाक संकेत, जानिए पल्मोनरी एम्बोलिज्म के खतरे

Pulmonary Embolism Symptoms: अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) और American College of Cardiology ने हाल ही में एक अहम गाइडलाइन जारी की है, जिसमें फेफड़ों में होने वाली खतरनाक बीमारी पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) के बारे में नई जानकारी दी गई है। आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी स्थिति है जब खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) फेफड़ों की नस में जाकर फंस जाता है और खून का बहाव रुक जाता है।

यह थक्का अक्सर पैरों की नसों में बनता है, जिसे Deep Vein Thrombosis कहा जाता है, और वहीं से टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह कुछ ही घंटों में जानलेवा बन सकता है।

क्यों खतरनाक है यह बीमारी?

डॉक्टरों के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म को पहचानना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षण कई बार सामान्य लगते हैं। लोग इसे हल्के में ले लेते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है। लेकिन यह देरी दिल और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, यहां तक कि अचानक मौत भी हो सकती है। भारत में भी यह बीमारी तेजी से चिंता का कारण बन रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद यह मौत का दूसरा बड़ा कारण बनती जा रही है।

किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

इस बीमारी के लक्षण अचानक आते हैं और तेजी से बढ़ सकते हैं। अगर आपको ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

  • बिना कारण अचानक सांस फूलना, खासकर आराम के समय
  • सीने में दर्द, जो गहरी सांस लेने पर बढ़े
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • खांसी आना, कभी-कभी खून के साथ
  • चक्कर आना या बेहोशी
  • हल्की-सी सांस की तकलीफ भी अगर असामान्य लगे, तो उसे नजरअंदाज न करें।

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है, जैसे

  • लंबे समय तक बैठे रहना (लंबी फ्लाइट या डेस्क जॉब)
  • हाल ही में सर्जरी या अस्पताल में भर्ती होना
  • प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद का समय
  • स्मोकिंग की आदत
  • मोटापा
  • पहले कभी ब्लड क्लॉट की समस्या होना

इलाज कैसे होता है?

इस बीमारी में समय बहुत कीमती होता है। डॉक्टर आमतौर पर ब्लड थिनर (खून पतला करने की दवाएं) देते हैं ताकि नए थक्के न बनें। गंभीर मामलों में क्लॉट को घोलने वाली दवाएं भी दी जाती हैं। साथ में ऑक्सीजन और अन्य सपोर्टिव ट्रीटमेंट दिया जाता है।

इलाज के बाद क्या जरूरी है?

डिस्चार्ज के बाद भी डॉक्टर की सलाह मानना बहुत जरूरी है। एक हफ्ते के अंदर फॉलो-अप करना चाहिए ताकि दवाओं का असर देखा जा सके। करीब 3 महीने बाद डॉक्टर तय करते हैं कि दवा कितने समय तक जारी रखनी है।

बचाव कैसे करें?

अच्छी बात यह है कि थोड़ी सावधानी से इस बीमारी से बचा जा सकता है

  • लंबे समय तक एक जगह न बैठें
  • शरीर को एक्टिव रखें
  • खूब पानी पिएं
  • सफर के दौरान बीच-बीच में चलें
  • वजन कंट्रोल में रखें

छोटी-छोटी आदतें आपकी जान बचा सकती हैं, इसलिए शरीर के संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें।

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