‘जनता का भरोसा कमजोर होता है’:फिल्म जन नायकन विवाद के बीच कमल हासन ने फिल्म सर्टिफिकेशन प्रोसेस पर सवाल उठाए

‘जनता का भरोसा कमजोर होता है’:फिल्म जन नायकन विवाद के बीच कमल हासन ने फिल्म सर्टिफिकेशन प्रोसेस पर सवाल उठाए

एक्टर विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ कानूनी पचड़े में है। फिल्म को 9 जनवरी को रिलीज किया जाना था, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर रिलीज अटकी हुई है। जिसके बाद कोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई 21 जनवरी के लिए तय की है। इस बीच, आज शनिवार को कमल हासन ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर फिल्म सर्टिफिकेशन प्रोसेस पर सवाल उठाए हैं। X पर शेयर किए एक बयान में कमल हासन ने कहा, “भारत का संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जो तर्क से निर्देशित है और कभी भी अस्पष्टता से कमजोर नहीं होती। यह क्षण किसी एक फिल्म से बड़ा है; यह दर्शाता है कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में हम आर्ट और आर्टिस्ट को कितनी जगह देते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “सिनेमा किसी एक व्यक्ति का काम नहीं होता, बल्कि इसमें राइटर, टेक्नीशियंस, परफॉर्मर, थिएटर मालिक और छोटे बिजनेस जुड़े होते हैं। इन सबकी रोजी-रोटी एक सही और समय पर मिलने वाली सर्टिफिकेशन प्रोसेस पर निर्भर करती है।” हासन ने कहा, “जब क्लेरिटी नहीं होती, तो क्रिएटिविटी रुक जाती है, आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और जनता का भरोसा कमजोर होता है। तमिलनाडु और भारत के सिनेमा प्रेमी कला के प्रति जुनून, समझ और परिपक्वता रखते हैं; वे पारदर्शिता और सम्मान के हकदार हैं।” कमल हासन ने यह भी कहा, “अब आवश्यकता है कि सर्टिफिकेशन प्रक्रियाओं पर सिद्धांतों के आधार पर पुनर्विचार किया जाए, जिसमें सर्टिफिकेशन के लिए तय समय-सीमाएं हों, पारदर्शी मूल्यांकन हो और हर सुझाए गए कट या एडिट के लिए लिखित, तर्कसंगत कारण दिए जाएं। अंत में उन्होंने कहा, “यह समय पूरे फिल्म इंडस्ट्री के एकजुट होने और सरकारी संस्थानों के साथ सार्थक, रचनात्मक संवाद करने का भी है। ऐसे सुधार क्रिएटिव फ्रीडम की रक्षा करेंगे, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखेंगे और कलाकारों व जनता पर भरोसा जताकर भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत करेंगे। जन नायकन की रिलीज डेट अटकी हुई है बता दें कि फिल्म जन नायकन की रिलीज को लेकर मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसमें फिल्म को U/A सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया गया था। मद्रास हाईकोर्ट में 9 जनवरी को फिल्म से जुड़े मामले की दूसरी सुनवाई हुई। पहली सुनवाई में कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने सुबह 10:30 बजे ही सीबीएफसी को U/A सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था। लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC ) ने चुनौती देते हुए फिल्म की दोबारा जांच करने के लिए रीवाइजिंग कमेटी बनाने की मांग की। सेंसर बोर्ड इस फैसले के खिलाफ रिट याचिका दायर की, जिसके बाद मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने रिलीज पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी तय की है। पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि सीबीएफसी को फिल्म की रिलीज का विरोध करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए था। चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने फिल्ममेकर्स से सर्टिफिकेट मिलने से पहले ही रिलीज की डेट तय करने पर भी सवाल उठाया। बेंच ने मेकर्स से कहा- ‘आपके पास सर्टिफिकेट नहीं है फिर आप फिल्म को रिलीज कैसे कर सकते हैं? आप रिलीज की तारीख तय नहीं कर सकते हैं और न ही सिस्टम पर दबाव डाल सकते हैं।’ सफाई में केवीएन प्रोडक्शंस को रिप्रेजेंट कर रहे सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि सर्टिफिकेशन पैनल द्वारा फिल्म की समीक्षा किए जाने के बावजूद बोर्ड के केवल एक सदस्य ने ही शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कोर्ट को याद दिलाया कि जन नायकन को 9 जनवरी को रिलीज करने की योजना थी।

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