युवा ब्राह्मण समाज संगठन (ट्रस्ट), मेरठ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रस्तावित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समाज संबंधी विवेचन-2026” के मसौदे पर आपत्ति जताते हुए इसे संशोधित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मसौदा रिपोर्ट में सामाजिक संरचनाओं को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे विशेष समुदायों को नकारात्मक रूप से चित्रित किए जाने का खतरा है। संगठन ने कहा कि मसौदे में सामाजिक विविधता, पीढ़ियों से चली आ रही ज्ञान परंपराओं, सांस्कृतिक योगदानों और सामाजिक विकास में विभिन्न समुदायों की भूमिका को अनदेखा किया गया है। संगठन ने यह भी कहा कि देश में उच्च शिक्षा केवल ‘वैज्ञानिक व तकनीकी’ विकास तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक विखंडन रोकने व सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने का भी कार्य करती है। इस दौरान संगठन ने उच्च शिक्षा में सुधार के लिए कई सुझाव भी दिए जिनमें —भारतीय समाज की संरचना पर समग्र व निष्पक्ष अध्ययन, सामाजिक योगदानों के संतुलित मूल्यांकन, श्रेष्ठ अकादमिक संसाधनों से तैयार अध्ययन सामग्री, व अकादमिक स्वायत्तता के साथ सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा जैसे बिंदु शामिल रहे। संगठन ने कहा कि प्रस्तावित मसौदे को लागू करने से पहले विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं व समाजशास्त्रियों की समिति द्वारा समीक्षा कराई जानी चाहिए। साथ ही यूजीसी को मसौदा वापस लेकर नई समिति बनाने की भी मांग की गई। इस विषय को लेकर संगठन की विशेष बैठक 28 जनवरी को दोपहर 3 बजे एन०ए०एस० इंटर कॉलेज के मीटिंग हॉल में आयोजित की जाएगी, जिसमें फैसले लिए जाएंगे। बैठक में ट्रस्ट से जुड़े कई वरिष्ठ सदस्य भी शामिल रहेंगे।


