डीजे जब्ती की कार्रवाई से नाराज संचालकों का प्रदर्शन:औरंगाबाद में कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन, कहा- रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है

डीजे जब्ती की कार्रवाई से नाराज संचालकों का प्रदर्शन:औरंगाबाद में कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन, कहा- रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है

औरंगाबाद में डीजे जब्ती की लगातार कार्रवाई से नाराज़ सैकड़ों डीजे संचालक आज कलेक्ट्रेट पहुंचे और अनुमंडल पदाधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। संचालकों का आरोप है कि बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश और पूर्व सूचना के डीजे जब्त किए जा रहे हैं, जिससे उनका रोजगार संकट में पड़ गया है। डीजे संचालक पप्पू कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से किसी लिखित नियमावली की सार्वजनिक घोषणा किए बिना कार्रवाई की जा रही है। सड़क पर गाड़ी से डीजे ले जाने के दौरान भी चालान काट दिया जाता है और पर्ची थमा दी जाती है। पूछने पर कहा जाता है कि गाड़ी पर डीजे नहीं बांधना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डीजे संचालक उपकरण कार्यक्रम स्थल तक नहीं ले जाएंगे, तो काम कैसे करेंगे। संचालकों का कहना है कि अधिकांश छोटे व्यवसायी कर्ज लेकर साउंड सिस्टम खरीदते हैं और शादी-विवाह जैसे अवसरों पर काम कर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। लगातार जब्ती और जुर्माने से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। गोलू साउंड के संचालक गोलू ने बताया कि वे डीजे बांधकर जा रहे थे, तभी ब्लॉक मोड़ पर परिवहन विभाग ने दो हजार रुपये का चालान काट दिया, जबकि गाड़ी के सभी कागजात दुरुस्त थे। शादी समारोह में अनुमति की कही थी बात डीजे संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से पहले कहा गया था कि धार्मिक जुलूसों और सार्वजनिक महोत्सवों में डीजे पर रोक रहेगी, लेकिन शादी समारोह में अनुमति होगी। इसके बावजूद अब शादी में ले जाते समय भी रास्ते में डीजे जब्त किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए कि कितने बजे तक डीजे बजाया जा सकता है और वाहन पर कितने साउंड बॉक्स लगाए जा सकते हैं, ताकि ध्वनि प्रदूषण मानकों का पालन हो सके। संचालकों ने यह भी कहा कि यदि डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित करना है, तो उत्पादन और बिक्री पर भी रोक लगाई जाए, ताकि कोई नया निवेश न करे और पुराने संचालकों को मुआवजा दिया जाए। उनका तर्क है कि जब सरकारी कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग होता है, तब ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा नहीं उठता, लेकिन निजी समारोहों में कार्रवाई की जाती है। प्रशासन का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सख्ती की जा रही है। बिना अनुमति डीजे बजाने, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और असुरक्षित तरीके से भारी साउंड बॉक्स बांधने पर कार्रवाई की जा रही है। पारदर्शी नीति बनाने की मांग की डीजे संचालकों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पारदर्शी नीति बनाने, पूर्व सूचना जारी करने और स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल प्रशासन और संचालकों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण और छोटे व्यवसायियों की आजीविका के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है। औरंगाबाद में डीजे जब्ती की लगातार कार्रवाई से नाराज़ सैकड़ों डीजे संचालक आज कलेक्ट्रेट पहुंचे और अनुमंडल पदाधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। संचालकों का आरोप है कि बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश और पूर्व सूचना के डीजे जब्त किए जा रहे हैं, जिससे उनका रोजगार संकट में पड़ गया है। डीजे संचालक पप्पू कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से किसी लिखित नियमावली की सार्वजनिक घोषणा किए बिना कार्रवाई की जा रही है। सड़क पर गाड़ी से डीजे ले जाने के दौरान भी चालान काट दिया जाता है और पर्ची थमा दी जाती है। पूछने पर कहा जाता है कि गाड़ी पर डीजे नहीं बांधना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डीजे संचालक उपकरण कार्यक्रम स्थल तक नहीं ले जाएंगे, तो काम कैसे करेंगे। संचालकों का कहना है कि अधिकांश छोटे व्यवसायी कर्ज लेकर साउंड सिस्टम खरीदते हैं और शादी-विवाह जैसे अवसरों पर काम कर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। लगातार जब्ती और जुर्माने से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। गोलू साउंड के संचालक गोलू ने बताया कि वे डीजे बांधकर जा रहे थे, तभी ब्लॉक मोड़ पर परिवहन विभाग ने दो हजार रुपये का चालान काट दिया, जबकि गाड़ी के सभी कागजात दुरुस्त थे। शादी समारोह में अनुमति की कही थी बात डीजे संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से पहले कहा गया था कि धार्मिक जुलूसों और सार्वजनिक महोत्सवों में डीजे पर रोक रहेगी, लेकिन शादी समारोह में अनुमति होगी। इसके बावजूद अब शादी में ले जाते समय भी रास्ते में डीजे जब्त किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए कि कितने बजे तक डीजे बजाया जा सकता है और वाहन पर कितने साउंड बॉक्स लगाए जा सकते हैं, ताकि ध्वनि प्रदूषण मानकों का पालन हो सके। संचालकों ने यह भी कहा कि यदि डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित करना है, तो उत्पादन और बिक्री पर भी रोक लगाई जाए, ताकि कोई नया निवेश न करे और पुराने संचालकों को मुआवजा दिया जाए। उनका तर्क है कि जब सरकारी कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग होता है, तब ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा नहीं उठता, लेकिन निजी समारोहों में कार्रवाई की जाती है। प्रशासन का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सख्ती की जा रही है। बिना अनुमति डीजे बजाने, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और असुरक्षित तरीके से भारी साउंड बॉक्स बांधने पर कार्रवाई की जा रही है। पारदर्शी नीति बनाने की मांग की डीजे संचालकों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पारदर्शी नीति बनाने, पूर्व सूचना जारी करने और स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल प्रशासन और संचालकों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण और छोटे व्यवसायियों की आजीविका के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है।  

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