जहानाबाद ट्रेड यूनियन के आह्वान पर जिले में एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया गया। इस दौरान मजदूर संघ के सदस्यों ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिव शंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार मजदूर विरोधी कानून लागू कर रही है, जिससे श्रमिक वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रोजगार गारंटी योजना को समाप्त कर उसकी जगह ‘जी राम जी योजना’ लागू की है, जो मजदूरों को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है। ”मजदूरों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा” प्रसाद ने आगे कहा कि मजदूरों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है, और महंगाई तथा बेरोजगारी के कारण आम श्रमिक का जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार चारों श्रम संहिता (लेबर कोड) कानूनों को तत्काल वापस ले, क्योंकि ये कानून मजदूरों के हितों के विरुद्ध हैं। मुफ्त बिजली की व्यवस्था करने की भी मांग की इसके साथ ही, उन्होंने रोजगार गारंटी योजना को पुनः प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की, ताकि ग्रामीण और शहरी गरीबों को नियमित रोजगार मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने किसानों के लिए मुफ्त बिजली की व्यवस्था करने की भी मांग की, जिससे खेती की लागत कम हो और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। इसके अलावा, ठेका पर कार्य कर रहे आशा, आंगनबाड़ी और रसोइया कर्मियों को स्थायी किया जाए तथा उन्हें उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए। हड़ताल के माध्यम से श्रमिकों ने सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। जहानाबाद ट्रेड यूनियन के आह्वान पर जिले में एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया गया। इस दौरान मजदूर संघ के सदस्यों ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिव शंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार मजदूर विरोधी कानून लागू कर रही है, जिससे श्रमिक वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रोजगार गारंटी योजना को समाप्त कर उसकी जगह ‘जी राम जी योजना’ लागू की है, जो मजदूरों को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है। ”मजदूरों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा” प्रसाद ने आगे कहा कि मजदूरों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है, और महंगाई तथा बेरोजगारी के कारण आम श्रमिक का जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार चारों श्रम संहिता (लेबर कोड) कानूनों को तत्काल वापस ले, क्योंकि ये कानून मजदूरों के हितों के विरुद्ध हैं। मुफ्त बिजली की व्यवस्था करने की भी मांग की इसके साथ ही, उन्होंने रोजगार गारंटी योजना को पुनः प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की, ताकि ग्रामीण और शहरी गरीबों को नियमित रोजगार मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने किसानों के लिए मुफ्त बिजली की व्यवस्था करने की भी मांग की, जिससे खेती की लागत कम हो और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। इसके अलावा, ठेका पर कार्य कर रहे आशा, आंगनबाड़ी और रसोइया कर्मियों को स्थायी किया जाए तथा उन्हें उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए। हड़ताल के माध्यम से श्रमिकों ने सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।


