प्रस्तावित यूजीसी बिल 2026 को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में जारी विरोध के क्रम में नवादा सदर में मंगलवार को युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में जुटे युवाओं ने शहर स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय का घेराव किया और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन कर अपना आक्रोश प्रकट किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस बिल को काला कानून बताते हुए कहा कि यह शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदेह है। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व लोजपा (रामविलास) के पूर्व युवा जिलाध्यक्ष चंदन सिंह ने किया। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता ललन सिंह, वार्ड पार्षद अभिषेक कुमार उर्फ गुड्डू पांडे, कारू सिंह, ब्रजेश सिंह, कन्हैया कुमार तथा आतीं पंचायत के मुखिया जितेंद्र कुमार सहित कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन में शामिल युवाओं का आरोप था कि यूजीसी बिल 2026 के जरिए केंद्र सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों पर अत्यधिक नियंत्रण थोपना चाहती है, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी और छात्रों के अधिकारों का हनन होगा। वक्ताओं ने कहा कि यह बिल उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समान अवसर की मूल भावना को भी कमजोर करेगा। चंदन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार बिना छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों से परामर्श किए इस तरह का कानून लाने पर आमादा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया, तो नवादा से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यालय के समक्ष जमकर नारेबाजी की गई और केंद्र सरकार से यूजीसी बिल 2026 को अविलंब वापस लेने की मांग की गई। युवाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में छात्र, शिक्षक और विभिन्न सामाजिक संगठनों को साथ लेकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार पर दबाव बनाकर इस शिक्षा विरोधी कानून को पूरी तरह रद्द कराने की कोशिश की जाएगी। प्रस्तावित यूजीसी बिल 2026 को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में जारी विरोध के क्रम में नवादा सदर में मंगलवार को युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में जुटे युवाओं ने शहर स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय का घेराव किया और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन कर अपना आक्रोश प्रकट किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस बिल को काला कानून बताते हुए कहा कि यह शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदेह है। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व लोजपा (रामविलास) के पूर्व युवा जिलाध्यक्ष चंदन सिंह ने किया। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता ललन सिंह, वार्ड पार्षद अभिषेक कुमार उर्फ गुड्डू पांडे, कारू सिंह, ब्रजेश सिंह, कन्हैया कुमार तथा आतीं पंचायत के मुखिया जितेंद्र कुमार सहित कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन में शामिल युवाओं का आरोप था कि यूजीसी बिल 2026 के जरिए केंद्र सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों पर अत्यधिक नियंत्रण थोपना चाहती है, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी और छात्रों के अधिकारों का हनन होगा। वक्ताओं ने कहा कि यह बिल उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समान अवसर की मूल भावना को भी कमजोर करेगा। चंदन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार बिना छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों से परामर्श किए इस तरह का कानून लाने पर आमादा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया, तो नवादा से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यालय के समक्ष जमकर नारेबाजी की गई और केंद्र सरकार से यूजीसी बिल 2026 को अविलंब वापस लेने की मांग की गई। युवाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में छात्र, शिक्षक और विभिन्न सामाजिक संगठनों को साथ लेकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार पर दबाव बनाकर इस शिक्षा विरोधी कानून को पूरी तरह रद्द कराने की कोशिश की जाएगी।


