मैहर जिले में मुस्लिम समाज के नाम पर गठित एक नई कमेटी विवादों में घिर गई है। समाज के प्रबुद्धजनों और विभिन्न मस्जिदों के पदाधिकारियों ने इसे अवैध बताते हुए जिला कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायत में कमेटी को फर्जी करार देते हुए इसकी जांच की मांग की गई है। यह शिकायती पत्र डिप्टी कलेक्टर अश्मिता पटेल को सौंपा गया, जो जिला कलेक्टर के नाम था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह कमेटी बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया और समाज की सहमति के बनाई गई है। उनका मानना है कि भविष्य में यह सामाजिक समरसता के लिए खतरा बन सकती है। कलेक्टर को दिए गए आवेदन में बताया गया है कि नगर के कुछ व्यक्तियों ने ‘मैहर मुस्लिम समाज’ के नाम से यह कमेटी गठित की है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इसके गठन के दौरान न तो समाज के वरिष्ठजनों को विश्वास में लिया गया और न ही किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। इसे समाज पर जबरन थोपने का प्रयास बताया जा रहा है। पुरानी कमेटियां संभाल रही जिम्मेदारी मैहर की विभिन्न मस्जिदों की अपनी पुरानी और विधिवत गठित कमेटियां हैं, जो लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक व्यवस्थाएं संभाल रही हैं। नई कमेटी के सामने आने के बाद इन मस्जिद कमेटियों ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लिखित रूप से स्पष्ट किया है कि वे इस कथित नई कमेटी को मान्यता नहीं देती हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यह कमेटी खुद को पूरे समाज का प्रतिनिधि बताकर प्रशासन और जनता को गुमराह कर रही है। मान्यता न देने की मांग
समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस तथाकथित कमेटी की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे किसी भी प्रकार का प्रशासनिक सहयोग या मान्यता न दी जाए। आवेदन में चेतावनी दी गई है कि बिना सहमति की ऐसी कमेटियों से समाज में गुटबाजी और भ्रम पैदा हो रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि भविष्य में किसी भी समाज के नाम पर कमेटी बनाने से पहले संबंधित संस्थाओं की लिखित सहमति और वैधानिक कागजातों की जांच अनिवार्य की जाए।


