आरा में जिला प्रशासन की दोहरी नीति के खिलाफ शनिवार को ऑटो मालिकों और चालकों का आक्रोश फूट पड़ा। स्टैंड को शिफ्ट किए जाने और बेवजह चालान काटे जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। रेलवे स्टेशन के पास त्रिभुआनी मोड़ के पास जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान चालकों ने ऑटो में सवार यात्रियों को बीच रास्ते में उतार दिया और अपनी गाड़ी को सरकारी बस स्टैंड में खड़ा कर विरोध जताया। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा अचानक हुए इस प्रदर्शन के कारण स्टेशन के आसपास कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। खासकर स्टेशन पहुंचने और वहां से बाहर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों को पैदल ही गंतव्य की ओर जाना पड़ा, जबकि कुछ यात्रियों ने वैकल्पिक साधनों का सहारा लिया। चालकों का कहना था कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के ऑटो स्टैंड को हटाना और आए दिन बेवजह चालान काटना प्रशासन की तानाशाही है। इससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है। प्रशासन से ऑटो स्टैंड को यथास्थान रखने और अनावश्यक चालान पर रोक लगाने की मांग की।
200 रुपए कमाना भी मुश्किल है बिहार राज्य ऑटो संघ के सचिव किरण राज ने बताया कि आज हम लोग हड़ताल नहीं किए हैं, लेकिन सभी मिलकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने हम लोगों को सरकारी बस स्टैंड में स्थानांतरित किया है, उसके लिए दिल से धन्यवाद देते हैं, लेकिन सरकारी बस स्टैंड सुरक्षित नहीं है। आने वाले समय में हम लोग काफी तंग होंगे। यहां लगने से कोई भी ऑटो मालिक दिन भर में 100 से 200 रुपए से ज्यादा नहीं कमा पा रहा है। रेलवे स्टेशन परिसर में जिला प्रशासन की ओर से टेंडर कर दिया गया है। वहां से ऑटो भी चलाया जा रहा है। लेकिन सैकड़ों ऑटो को सरकारी बस स्टैंड में लगवाकर उनके साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है। रेलवे स्टेशन परिसर से यात्री ऑटो पकड़ कर चल जा रहे हैं। जो सरकारी बस स्टैंड में लगा है, वहां तक पैसेंजर नहीं आ पा रहे हैं। इस दोहरी नीति के कारण ऑटो मालिक और चालकों में आक्रोश पैदा हो रहा है। उनका कहना है कि स्टेशन परिसर से ऑटो फूल होकर जा रहा है जबकि हमलोग लाइन में खड़े रह जा रहे हैं। जब सड़क किनारे हम लोग पैसेंजर को उतारते हैं तो वहां पर 5000 फाइन काट दी जा रही है। हमारी मांग है कि पर फाइन काटना बंद करें। जो तत्कालीन एसपी विनय तिवारी के रीजन में ऑटो के लिए रूट तय किया गया था, उसे दोबारा लागू किया जाए। रूट के साथ पुलिस कोड दिया जाए। साथ ही जहां ऑटो लगाया जाता है, वहां से अतिक्रमण हटाया जाए। आरा में जिला प्रशासन की दोहरी नीति के खिलाफ शनिवार को ऑटो मालिकों और चालकों का आक्रोश फूट पड़ा। स्टैंड को शिफ्ट किए जाने और बेवजह चालान काटे जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। रेलवे स्टेशन के पास त्रिभुआनी मोड़ के पास जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान चालकों ने ऑटो में सवार यात्रियों को बीच रास्ते में उतार दिया और अपनी गाड़ी को सरकारी बस स्टैंड में खड़ा कर विरोध जताया। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा अचानक हुए इस प्रदर्शन के कारण स्टेशन के आसपास कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। खासकर स्टेशन पहुंचने और वहां से बाहर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों को पैदल ही गंतव्य की ओर जाना पड़ा, जबकि कुछ यात्रियों ने वैकल्पिक साधनों का सहारा लिया। चालकों का कहना था कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के ऑटो स्टैंड को हटाना और आए दिन बेवजह चालान काटना प्रशासन की तानाशाही है। इससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है। प्रशासन से ऑटो स्टैंड को यथास्थान रखने और अनावश्यक चालान पर रोक लगाने की मांग की।
200 रुपए कमाना भी मुश्किल है बिहार राज्य ऑटो संघ के सचिव किरण राज ने बताया कि आज हम लोग हड़ताल नहीं किए हैं, लेकिन सभी मिलकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने हम लोगों को सरकारी बस स्टैंड में स्थानांतरित किया है, उसके लिए दिल से धन्यवाद देते हैं, लेकिन सरकारी बस स्टैंड सुरक्षित नहीं है। आने वाले समय में हम लोग काफी तंग होंगे। यहां लगने से कोई भी ऑटो मालिक दिन भर में 100 से 200 रुपए से ज्यादा नहीं कमा पा रहा है। रेलवे स्टेशन परिसर में जिला प्रशासन की ओर से टेंडर कर दिया गया है। वहां से ऑटो भी चलाया जा रहा है। लेकिन सैकड़ों ऑटो को सरकारी बस स्टैंड में लगवाकर उनके साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है। रेलवे स्टेशन परिसर से यात्री ऑटो पकड़ कर चल जा रहे हैं। जो सरकारी बस स्टैंड में लगा है, वहां तक पैसेंजर नहीं आ पा रहे हैं। इस दोहरी नीति के कारण ऑटो मालिक और चालकों में आक्रोश पैदा हो रहा है। उनका कहना है कि स्टेशन परिसर से ऑटो फूल होकर जा रहा है जबकि हमलोग लाइन में खड़े रह जा रहे हैं। जब सड़क किनारे हम लोग पैसेंजर को उतारते हैं तो वहां पर 5000 फाइन काट दी जा रही है। हमारी मांग है कि पर फाइन काटना बंद करें। जो तत्कालीन एसपी विनय तिवारी के रीजन में ऑटो के लिए रूट तय किया गया था, उसे दोबारा लागू किया जाए। रूट के साथ पुलिस कोड दिया जाए। साथ ही जहां ऑटो लगाया जाता है, वहां से अतिक्रमण हटाया जाए।


