MCB में पंचायत सचिव की दोबारा तैनाती का विरोध:सरपंच-पंच और ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, भ्रष्टाचार के आरोपों से किया इनकार

MCB में पंचायत सचिव की दोबारा तैनाती का विरोध:सरपंच-पंच और ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, भ्रष्टाचार के आरोपों से किया इनकार

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के केल्हारी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बिरौरीडांड़ में पंचायत सचिव की पुनः पदस्थापना को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्राम पंचायत के सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण सचिव लक्ष्मी तिवारी के खिलाफ लामबंद हो गए हैं और उनके पुनः पदस्थापन का कड़ा विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव लक्ष्मी तिवारी पूर्व में बिरौरीडांड़ में पदस्थ थीं। जहां उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किया। ग्रामीणों के अनुसार, छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी घूस मांगी जाती थी, जिससे परेशान होकर ग्रामीणों ने शिकायत की थी। इसी के चलते जुलाई 2025 में उनका तबादला खड़गवां विकासखंड किया गया था। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि तबादले के बावजूद सचिव की ओर से लगभग छह माह तक नए सचिव को प्रभार नहीं सौंपा गया। जिससे पंचायत के विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए। अब पुनः सचिव लक्ष्मी तिवारी को बिरौरीडांड़ में पदस्थ किए जाने से पंचायत में भारी नाराजगी है। पदस्थापना निरस्त करने की मांग सरपंच और ग्रामीणों ने इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पुनः पदस्थापना निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया जाएगा। ट्रांसफर को बताया प्रशासनिक त्रुटि वहीं, पूरे मामले पर पंचायत सचिव लक्ष्मी तिवारी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 में उनका ट्रांसफर जरूर हुआ था, लेकिन प्रशासनिक त्रुटि के कारण मूल पदस्थापना बिरौरीडांड़ के स्थान पर अतिरिक्त प्रभार वाले ग्राम पंचायत ताराबहरा से खड़गवां विकासखंड दर्शाया गया, जिससे प्रभार सौंपने में तकनीकी दिक्कतें आईं। अब सुधार के बाद उनकी पुनः पदस्थापना बिरौरीडांड़ में की गई है। विरोध को ठेकेदार प्रायोजित बताया भ्रष्टाचार के आरोपों पर सचिव ने कहा कि यह विरोध एक ठेकेदार की ओर से प्रायोजित है। उनके अनुसार, ग्राम पंचायत में प्राथमिक शाला का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसे सरपंच और उपसरपंच की ओर से कराया जा रहा है। ठेकेदार को आशंका है कि उनके आने से निर्माण कार्य में अनियमितता पर रोक लगेगी, इसी कारण ग्रामीणों को भड़काकर विरोध कराया जा रहा है।

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