नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे आवंटित भूखंड पर लिए जाने वाले लोकेशन शुल्क को प्राधिकरण ने समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह शुल्क साढ़े सात प्रतिशत था। यही नहीं मेट्रो रूट के किनारे भी लिए जाने वाले शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर ढाई प्रतिशत कर दिया गया है। लोकेशन शुल्क घटने से संपत्ति की दरों में कमी आ सकती है।
40 सेक्टरों की संपत्ति में आएगी कमी
एक्सप्रेसवे का नोएडा क्षेत्र में करीब 20 किलोमीटर का हिस्सा है। इस क्षेत्र में 40 से ज्यादा सेक्टरों की संपत्तियों की आवंटन कीमतें लोकेशन शुल्क हटाने के बाद कम होंगी। मेट्रो का लोकेशन शुल्क भी काफी कम लगेगा। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि एक्सप्रेसवे के किनारे का लोकेशन शुल्क आईटी, आईटी-संस्थागत, व्यावसायिक, व कॉरपोरेट ऑफिस के भूखंड पर 2019 से लागू था।
फरवरी में लगाया गया था लोकेशन शुल्क
एक्सप्रेसवे के किनारे इन्हीं भू-उपयोग के भूखंड नियोजन विभाग की तरफ से निकाले गए हैं। इसके अलावा मेट्रो रूट के 1 किलोमीटर के दायरे में सभी तरह की संपत्तियों पर 10 प्रतिशत का लोकेशन शुल्क फरवरी 2025 में यूनिफाइड पॉलिसी के साथ लगाया गया था। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि 3 जनवरी को हुई बोर्ड बैठक में मंजूरी के बाद लोकेशन चार्ज हटाया और घटाया गया है।
आगे आने वाली विभिन्न भूखंड योजनाओं पर इसका असर दिखेगा। मेट्रो के नए रूट सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक की केंद्र ने मंजूरी 14 फरवरी को दे दी है। सेक्टर-137 के आगे एक्सप्रेसवे पर परी चौक की तरफ से मेट्रो का संचालन हो रहा है। अभी तक एक्सप्रेसवे और मेट्रो दोनों रूट होने के चलते सेक्टर-137 के आगे लोकेशन शुल्क के चलते भूखंड 17.5 प्रतिशत महंगे हो गए थे।
अब लगेगा 2.5 प्रतिशत शुल्क
अब प्राधिकरण पूरे एक्सप्रेसवे किनारे के सेक्टरों में मेट्रो का लोकेशन शुल्क 2.5 प्रतिशत लगाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन की मेट्रो परियोजना को केंद्र की मंजूरी हो गई है। रूट और स्टेशन की जगह भी तय हो चुकी है। इसलिए अब इस रूट के किनारे भी मेट्रो का लोकेशन शुल्क लगाया जाएगा।


