US-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव तेजी से बढ़ रहा है। हाल के सैन्य हमलों और तीखी राजनीतिक बयानबाजी ने क्षेत्र की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। इसी बीच तेहरान ने विदेशों में रह रहे ईरानी मूल के लोगों को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने अमेरिका या इजरायल के समर्थन में बयान दिए या जश्न मनाया तो उनकी ईरान में मौजूद संपत्ति जब्त की जा सकती है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। यह कदम हाल में हुए प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है सरकार के अनुसार यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
अमेरिका और इजरायल के समर्थन पर मिलेगी कड़ी सजा
ईरान के अभियोजक कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि विदेशों में रहने वाले वे ईरानी नागरिक जो किसी भी तरीके से अमेरिका या इजरायल का समर्थन करते हैं उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी। सरकारी मीडिया के अनुसार ऐसे लोगों की ईरान में मौजूद संपत्ति जब्त की जा सकती है और उन पर कानूनी मामले भी चलाए जाएंगे। यह बयान उस समय सामने आया जब यूरोप और अमेरिका के कई शहरों में ईरानी मूल के लोगों ने रैली और मार्च आयोजित किए। इन आयोजनों में कुछ समूहों ने तेहरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था के खिलाफ नारे लगाए और राजनीतिक बदलाव की मांग की। सरकार का कहना है कि दुश्मन देशों के समर्थन को राष्ट्रीय हित के खिलाफ माना जाएगा।
मोजतबा खामेनेई बने नए सर्वोच्च नेता
हालिया घटनाओं के बाद ईरान की सत्ता व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है। इस फैसले ने देश के अंदर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव ईरान की आंतरिक राजनीति को नई दिशा दे सकता है। वहीं सरकार समर्थक समूहों का कहना है कि नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखना जरूरी है ताकि युद्ध और बाहरी दबाव के समय देश की स्थिरता बनी रहे।
विदेशों में रह रहे ईरानियों की प्रतिक्रिया
विदेशों में रह रहे कई ईरानी नागरिकों ने इस चेतावनी पर अलग अलग प्रतिक्रिया दी है। लंदन में काम करने वाले ईरानी मूल के एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें संपत्ति जब्त होने की धमकी से ज्यादा चिंता उन लोगों की है जो ईरान के अंदर विरोध के दौरान खतरे का सामना कर रहे हैं। एक अन्य व्यवसायी ने कहा कि चार दशकों से ज्यादा समय से ईरानी जनता राजनीतिक बदलाव की मांग कर रही है और विरोध करना उनका अधिकार है। कुछ प्रवासी समूहों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि तेहरान ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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