छत्तीसगढ़ में सूरजमुखी की खेती को बढ़ावा! IGKV में 16 हाइब्रिड किस्मों का परीक्षण, किसानों के लिए नई उम्मीद…

छत्तीसगढ़ में सूरजमुखी की खेती को बढ़ावा! IGKV में 16 हाइब्रिड किस्मों का परीक्षण, किसानों के लिए नई उम्मीद…

Sunflower Farming: छत्तीसगढ़ के रायपुर में सूरजमुखी की खेती को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) द्वारा विशेष पहल की जा रही है। भारत सरकार के राष्ट्रीय तिलहन मिशन के अंतर्गत विश्वविद्यालय में सूरजमुखी के 16 संकर (हाइब्रिड) किस्मों का परीक्षण किया जा रहा है।

5 अलग-अलग राज्यों के किस्मों का वैज्ञानिक परिक्षण कर छत्तीसगढ़ के जलवायु के अनुरूप अधिक उत्पादन और अधिक ऑयल देने वाली किस्मों का पता लगाया जाएगा। इसके बाद छत्तीसगढ़ के किसानों को सबसे उत्तम सूरजमुखी के किस्म के पैदावार लिए अनुशंसित किया जाएगा। इस शोध कार्य के लिए विश्वविद्यालय द्वारा वित्तीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही भविष्य में सूरजमुखी पर अनुसंधान कार्य भी किया जाएगा।

Sunflower Farming: सूरजमुखी पर होगा रिसर्च

विवि के अनुसंधान सेवा के संचालक डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि, 16 अलग-अलग किस्मों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया जा रहा है। यह सभी हाइब्रिड किस्में है। विवि परिसर में अभी लगभग 2 एकड़ में खेती के लिए ट्रायल चल रहा है। इसके बाद देखा जाएगा कि कौन सी किस्म छत्तीसगढ़ की जलवायु में ज्यादा उत्पादन देती है। किसमें तेल की मात्रा अधिक है। जो किस्में बेहतर साबित होंगी, उन्हें किसानों के लिए अनुशंसित किया जाएगा।

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आखिर सूरजमुखी की खेती क्यों है फायदेमंद

सूरजमुखी की खेती लगभग 80 से 100 दिनों में पूरी हो जाती है। बायोडीजल बनाने में भी इसका प्रयोग होता है। इसके बीजों में 40 से 50 प्रतिशत तक तेल होता है, जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। सूरजमुखी के बीज पोषण से भरपूर होते हैं। इनमें प्रोटीन (20-25%), फैट (40-50%) और विटामिन ई पाए जाते हैं। पौधा मिट्टी से भारी धातुएं जैसे सीसा, आर्सेनिक सोख सकता है,जिससे मिट्टी की सफाई की जाती है।

यह प्रमुख हाइब्रिड किस्म उगाए गए है

जीनोटाइप – रिलीज ईयर – डेवलपेड किया गया

  • केबीएसएच-88 -2024 – यूएएस बेंगलोर, कर्नाटक
  • एलएसएफएच-171 -2018 – ओआरएस लातूर, महाराष्ट्र
  • सीओअएच-3 -2023 – टीएनएयू कोयंबटूर, तमिलनाडू
  • एसएफएच-1001 -2018 -आईसीएआर-आईआईओआर हैदराबाद, तेलंगाना
  1. छत्तीसगढ़ में तिलहन की खेती कितनी हो रही है

छत्तीसगढ़ में तिलहन फसलों का क्षेत्र कुल कृषि क्षेत्र का छोटा हिस्सा है। राज्य की खेती में धान का दबदबा है, इसलिए तिलहन का रकबा अपेक्षाकृत कम है। छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से सरसों, तिल, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और अलसी जैसे तिलहन फसले ली जा रही है।

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  1. छत्तीसगढ़ में तिलहन की खेती कहां-कहां होती है

तिलहन की खेती राज्य के कई जिलों में छोटे स्तर पर हो रही है जैसे रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम, बेमेतरा, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरिया और सरगुजा क्षेत्र में। इन जिलों में रबी और खरीफ दोनों मौसम में अलग-अलग तिलहन फसलें बोई जाती हैं।

  1. छत्तीसगढ़ की मिट्टी किन तिलहन फसलों के लिए अनुकूल है

छत्तीसगढ़ में तीन प्रमुख प्रकार की मिट्टी मिलती है काली मिट्टी, दोमट मिट्टी और लाल मिट्टी।काली मिट्टी सोयाबीन व सूरजमुखी, दोमट मिट्टी सरसों व मूंगफली, हल्की लाल मिट्टी में तिल व अलसी की पैदावार अच्छी हो सकती है।

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  1. तिलहन की खेती किसानों के लिए कितनी फायदेमंद
  • बाजार में मांग ज्यादा
    भारत में खाने के तेल की मांग बहुत अधिक है और बड़ी मात्रा में तेल आयात करना पड़ता है।
  • कम पानी में खेती
    धान की तुलना में तिलहन फसलें कम पानी में भी उग जाती हैं।
  • फसल विविधीकरण
    धान पर निर्भरता कम होती है और जमीन की उर्वरता भी सुधरती है।
  • अच्छा मुनाफा
    कम लागत में अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है।

5. तिलहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल

  • एमएसपी पर खरीद
    केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में दलहन-तिलहन की फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की मंजूरी दी है।
  • 425 करोड़ रुपये का उपार्जन कार्यक्रम :
    प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत राज्य में दलहन-तिलहन की खरीद के लिए लगभग 425 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
  • बीज उत्पादन पर सब्सिडी
    तिलहन बीज उत्पादन पर अनुदान बढ़ाकर लगभग 1500 रुलए प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

    यह जानकारी कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट तथा डॉ. परमेश्वर कुमार साहू, वैज्ञानिक, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है।

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