नालंदा के बिहार थाना क्षेत्र अंतर्गत लोहगानी मोहल्ले में रहने वाले शख्स ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। मृतक की पहचान 37 साल के आशीष रंजन के रूप में की गई है, जो मूल रूप से मुजफ्फरपुर के अहियापुर के कोलवा निवासी ओम प्रकाश विश्वकर्मा का बेटा था। आशीष रंजन पिछले दो वर्षों से बिहार शरीफ में ‘आनंद ट्रांसफार्मर प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी में बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर कार्यरत था और अपने सहकर्मियों के साथ किराए के मकान में रहता था। घटना की जानकारी तब हुई जब सोमवार सुबह काफी देर तक आशीष ने अपने कमरे का दरवाजा नहीं खोला। मृतक के पिता ओमप्रकाश विश्वकर्मा ने बताया कि रविवार शाम करीब 7 बजे मेरी आशीष से सामान्य बात हुई थी, जिसमें उसने खाना खाने जाने की बात कही थी। सोमवार सुबह जब परिजनों ने उसे फोन किया और फोन नहीं उठा, तो उन्होंने साथ रहने वाले स्टाफ को जानकारी दी। स्टाफ द्वारा काफी दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब जाकर घटना का खुलासा हुआ। पिता ने कहा- काम को लेकर दबाव में था, पत्नी से ये सब शेयर किया था मृतक के पिता ने बताया कि आशीष काम को लेकर पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में था। आशीष अपनी पत्नी से अक्सर काम के अत्यधिक दबाव और कंपनी के प्रेशर की बात साझा करता था। वह अपने पीछे एक छोटा बेटा और भरा-पूरा परिवार छोड़ गया है। उधर, बिहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतारकर कब्जे में लिया। बिहार थाना अध्यक्ष सम्राट दीपक ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल (मॉडल अस्पताल) भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि क्या आत्महत्या का कारण केवल काम का तनाव था या कोई अन्य पहलू भी है। उन्होंने बताया कि परिजनों से आवेदन प्राप्त होने के बाद आगे की विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। नालंदा के बिहार थाना क्षेत्र अंतर्गत लोहगानी मोहल्ले में रहने वाले शख्स ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। मृतक की पहचान 37 साल के आशीष रंजन के रूप में की गई है, जो मूल रूप से मुजफ्फरपुर के अहियापुर के कोलवा निवासी ओम प्रकाश विश्वकर्मा का बेटा था। आशीष रंजन पिछले दो वर्षों से बिहार शरीफ में ‘आनंद ट्रांसफार्मर प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी में बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर कार्यरत था और अपने सहकर्मियों के साथ किराए के मकान में रहता था। घटना की जानकारी तब हुई जब सोमवार सुबह काफी देर तक आशीष ने अपने कमरे का दरवाजा नहीं खोला। मृतक के पिता ओमप्रकाश विश्वकर्मा ने बताया कि रविवार शाम करीब 7 बजे मेरी आशीष से सामान्य बात हुई थी, जिसमें उसने खाना खाने जाने की बात कही थी। सोमवार सुबह जब परिजनों ने उसे फोन किया और फोन नहीं उठा, तो उन्होंने साथ रहने वाले स्टाफ को जानकारी दी। स्टाफ द्वारा काफी दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब जाकर घटना का खुलासा हुआ। पिता ने कहा- काम को लेकर दबाव में था, पत्नी से ये सब शेयर किया था मृतक के पिता ने बताया कि आशीष काम को लेकर पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में था। आशीष अपनी पत्नी से अक्सर काम के अत्यधिक दबाव और कंपनी के प्रेशर की बात साझा करता था। वह अपने पीछे एक छोटा बेटा और भरा-पूरा परिवार छोड़ गया है। उधर, बिहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतारकर कब्जे में लिया। बिहार थाना अध्यक्ष सम्राट दीपक ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल (मॉडल अस्पताल) भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि क्या आत्महत्या का कारण केवल काम का तनाव था या कोई अन्य पहलू भी है। उन्होंने बताया कि परिजनों से आवेदन प्राप्त होने के बाद आगे की विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।


