9 करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन, लेकिन निर्यात सिर्फ 50 लाख; अब माइंडसेट बदलकर दुनिया पर छाने की बारी

9 करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन, लेकिन निर्यात सिर्फ 50 लाख; अब माइंडसेट बदलकर दुनिया पर छाने की बारी
  • टेक्सटाइल हब की नई उड़ान की तैयारी: मेवाड़ चेम्बर भवन में निर्यात संभावनाओं पर महामंथन

मैनमेड टेक्सटाइल उत्पादन के मामले में दुनिया का पावर हाउस कहलाने वाले भीलवाड़ा को अब अपनी इस ताकत का डंका निर्यात (एक्सपोर्ट) के मोर्चे पर भी बजाना होगा। शहर की टेक्सटाइल मिलों में हर महीने 9 करोड़ मीटर कपड़ा बन रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि इसका निर्यात केवल 50 लाख मीटर प्रतिमाह तक ही सिमटा हुआ है। अगर यहां के उद्यमी अपना माइंडसेट बदलें और वैश्विक बाजार पर फोकस करें, तो भीलवाड़ा दुनिया का सबसे बड़ा मैनमेड टेक्सटाइल एक्सपोर्ट हब बन सकता है। यह पुरज़ोर आह्वान मैनमेड फाइबर एवं टेक्निकल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट काउंसिल (मेटेक्सिल) के चेयरमैन शालीन तोषनीवाल ने किया। वे शनिवार को मेवाड़ चेम्बर भवन में आयोजित निर्यात संभावनाओं पर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

चीन को पछाड़ने का सुनहरा मौका

तोषनीवाल ने आंकड़ों के जरिये निर्यात की तस्वीर साफ करते हुए कहा कि भारत सरकार के विभिन्न व्यापार समझौतों (एफटीए) के कारण विश्व का लगभग दो-तिहाई बाजार हमारे लिए खुल चुका है। यूरोपियन यूनियन (ईयू) के साथ ट्रेड एग्रीमेंट होने के बाद इस सेक्टर में बड़ी छलांग लगेगी। ईयू लगभग 33 बिलियन डॉलर का कपड़ा आयात करता है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1 बिलियन डॉलर है। इसी तरह टेक्निकल टेक्सटाइल के 36 बिलियन डॉलर के बाजार में भी हम 1 बिलियन डॉलर पर अटके हैं। उन्होंने बताया कि जीरो ड्यूटी के लाभ से हमारे निर्यातक चीन के मुकाबले 12 प्रतिशत शुल्क का सीधा फायदा उठा सकते हैं।

हर ऑर्डर पूरा करने में सक्षम है भीलवाड़ा

तोषनीवाल ने कहा कि भीलवाड़ा में इकोनॉमी ऑफ स्केल की पूरी सुविधा मौजूद है। हमारे स्पिनिंग, वीविंग और प्रोसेसिंग सेक्टर में विश्वस्तरीय अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार से कोई विशेष यार्न या लाखों मीटर कपड़े की डिमांड आती है, तो हमारे स्पिनर्स और वीवर्स समय पर डिलीवरी देने में पूरी तरह सक्षम हैं।

काम आएगा ‘एम-3’ फार्मूला

राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (आरटीएमए) के अध्यक्ष डॉ. एसएन मोदानी ने कहा कि भीलवाड़ा की सबसे बड़ी खासियत कम मार्जिन पर बड़े स्तर पर उत्पादन’ करना है। उन्होंने निर्यात बढ़ाने के लिए एम-3 फार्मूला मेन, मशीन और मार्केट पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की नसीहत दी।

अब शून्य हुई कच्चे माल पर ड्यूटी

सीआईटीआई के वाइस चेयरमैन दिनेश नौलखा ने बताया कि पहले कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी होने के कारण भारत की लागत चीन से ज्यादा आती थी। इससे हमारा निर्यात पिछड़ रहा था। अब अलग-अलग ट्रेड एग्रीमेंट के तहत कच्चे माल पर ड्यूटी लगभग शून्य हो गई है। इसका सीधा लाभ भीलवाड़ा के उद्योगों को मिलेगा। मेटेक्सिल के पूर्व चेयरमैन राकेश मेहरा ने स्पष्ट कहा कि भीलवाड़ा में सभी संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, बस अब उद्यमियों को अपनी सोच को एक्सपोर्ट के हिसाब से ढालने की जरूरत है।

यह भी रहा खास

मेटेक्सिल के कार्यकारी निदेशक ए. रविकुमार ने विभिन्न व्यापार समझौतों और उनसे मिलने वाले आर्थिक लाभों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की। घेरजी ऑर्गेनाइजेशन के विकास शर्मा ने भीलवाड़ा के उत्पादों के संदर्भ में प्रोडक्ट-वाइज़ वैश्विक मांग और निर्यात की संभावनाओं से उद्यमियों को रूबरू करवाया।

अतिथियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. आरसी लोढ़ा ने सभी का स्वागत किया। महासचिव आरके जैन, डॉ. पीएम बेसवाल, जेसी लढ़्ढा, जेके बागडोदिया और डीपी मंगल ने अतिथियों का अभिनंदन किया। मेटेक्सिल के पूर्व चेयरमैन रौनक रुघानी ने आभार जताया।

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