मुक्तसर में 10 प्रकार के शहद का उत्पादन:किसान ने 15 बक्सों से 3000 तक पहुंचाया कारोबार; सालाना 80 लाख टर्नओवर

मुक्तसर में 10 प्रकार के शहद का उत्पादन:किसान ने 15 बक्सों से 3000 तक पहुंचाया कारोबार; सालाना 80 लाख टर्नओवर

पंजाब के जिला मुक्तसर के गांव साहिबचंद के रहने वाले युवा किसान बलजिंदर सिंह ने मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में असाधारण सफलता हासिल कर न केवल अपने क्षेत्र, बल्कि पूरे राज्य के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। वर्ष 2000 से लगातार इस कार्य में जुटे बलजिंदर सिंह ने कम लागत और अधिक मुनाफे वाले इस कृषि सहायक व्यवसाय से न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि 16-17 लोगों को रोजगार भी दिया है। वह किसानों को इसे साइड बिजनेस के रूप में अपनाने की सलाह देते हैं। 15 बक्सों से शुरू हुआ सफर, आज 3000 बक्सों तक पहुंचा 43 वर्षीय बलजिंदर सिंह ने वर्ष 1999 में स्नातक करने के बाद मधुमक्खी पालन की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि यह विचार उन्हें अपने कुछ मित्रों से मिला, जो लुधियाना के रहने वाले थे और श्रीगंगानगर आते-जाते उनके पास रुकते थे। उनके अनुभवों से प्रेरित होकर बलजिंदर ने 15 बक्सों के साथ यह कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह उनका शौक था, लेकिन कुछ ही वर्षों में यह उनका जुनून बन गया। मेहनत और प्रशिक्षण के बल पर उन्होंने चार-पांच वर्षों में बक्सों की संख्या बढ़ाकर 900 कर ली और आज उनके पास करीब 3000 बक्से हैं। देशभर में माइग्रेशन, 10 प्रकार का शहद उत्पादन बलजिंदर सिंह अपने मधुमक्खी बक्सों की माइग्रेशन देश के विभिन्न राज्यों में करते हैं, जिनमें राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश प्रमुख हैं। इस माइग्रेशन के कारण उनके पास लगभग 10 प्रकार का शहद उपलब्ध है — सरसों, मल्टीफ्लोरा, बेरी, अजवाइन, सौंफ, कीकर, सफेदा, सूरजमुखी, जंगली और बरसीम। जम्मू-कश्मीर में बनने वाला अकेशिया शहद सबसे महंगा है, जो थोक में लगभग ₹300 और रिटेल में ₹700-₹800 प्रति किलोग्राम बिकता है। 100 टन वार्षिक उत्पादन, 80 लाख रुपए तक टर्नओवर वर्तमान में बलजिंदर सिंह प्रतिवर्ष लगभग 90 से 100 टन शहद का उत्पादन करते हैं। इसका 10 प्रतिशत हिस्सा वह अपने ब्रांड “किसान हनी” के नाम से बाजार में बेचते हैं, जबकि शेष शहद एक्सपोर्टर्स को सप्लाई किया जाता है। उनका सालाना टर्नओवर ₹70 से ₹80 लाख तक पहुंच गया है। वह भविष्य में बड़े निर्यातक बनने का लक्ष्य रखते हैं। इसके साथ ही वह 19 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं, जिसमें से 2 एकड़ में जैविक खेती शामिल है। प्रशिक्षण और सम्मान मधुमक्खी पालन में दक्षता हासिल करने के लिए बलजिंदर सिंह ने वर्ष 2002 में बठिंडा केवीके से बेसिक मधुमक्खी पालन, 2017 में फूड प्रोसेसिंग और 2024 में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू), लुधियाना से एडवांस मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, मुक्तसर ने उन्हें कई अवसरों पर सम्मानित किया। वर्ष 2022 में आईसीएआर-पूसा, दिल्ली ने उन्हें किसान सम्मान और 2023 में मिलियनेयर किसान अवॉर्ड से नवाजा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती की सलाह बलजिंदर सिंह का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से, धैर्य और मेहनत के साथ कार्य करें तो मधुमक्खी पालन उनकी आय बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि नवाचार और समर्पण से खेती को भी एक सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।

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