देवघर में KYC और ऑनलाइन सिस्टम से परेशानी:2000 रुपए तक ब्लैक में मिल रहा सिलेंडर, एजेंसियों में उमड़ रही कस्टमर की भीड़

देवघर में KYC और ऑनलाइन सिस्टम से परेशानी:2000 रुपए तक ब्लैक में मिल रहा सिलेंडर, एजेंसियों में उमड़ रही कस्टमर की भीड़

देवघर सहित लगभग पूरे प्रदेश की विभिन्न गैस एजेंसियों पर इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। सुबह से ही लोग सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। इससे खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देवघर शहर के मां तारा इंटरप्राइजेज गैस एजेंसी के बाहर तो उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें लगी हुई है। चाईबासा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, पलामू आदि जिलों में घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले गैस सिलेंडर प्राप्त करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान थी, लेकिन हाल के दिनों में एजेंसियों की ओर से नई प्रक्रियाओं के कारण वितरण व्यवस्था धीमी पड़ गई है। केवाईसी और मोबाइल एंट्री के कारण परेशानी उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसियों की ओर से कागजों की जांच, मोबाइल नंबर एंट्री और केवाईसी अपडेट के नाम पर बार-बार उन्हें लौटाया जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने की अनिवार्यता भी परेशानी का कारण बन रही है। तकनीकी प्रक्रिया में समय लगने के कारण गैस वितरण में देरी हो रही है। लोगों को घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने 8 तारीख को ही गैस सिलेंडर के लिए बुकिंग कराई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक उन्हें सिलेंडर नहीं मिल सका है। इस स्थिति से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बाहरी वेंडर बेंच रहे महंगे दाम में सिलेंडर विभिन्न शहरों से आ रही जानकारी के अनुसार एजेंसियों से समय पर गैस नहीं मिलने का फायदा कुछ बाहरी वेंडर उठा रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोग रसोई गैस सिलेंडर 1800 से 2000 रुपए तक में बेच रहे हैं, जो सामान्य कीमत से काफी अधिक है। इससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसियों की वितरण व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। अवैध रूप से महंगे दामों पर सिलेंडर बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही एजेंसी स्तर पर केवाईसी और अन्य प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की व्यवस्था करने की मांग की गई है, ताकि आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। देवघर सहित लगभग पूरे प्रदेश की विभिन्न गैस एजेंसियों पर इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। सुबह से ही लोग सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। इससे खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देवघर शहर के मां तारा इंटरप्राइजेज गैस एजेंसी के बाहर तो उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें लगी हुई है। चाईबासा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, पलामू आदि जिलों में घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले गैस सिलेंडर प्राप्त करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान थी, लेकिन हाल के दिनों में एजेंसियों की ओर से नई प्रक्रियाओं के कारण वितरण व्यवस्था धीमी पड़ गई है। केवाईसी और मोबाइल एंट्री के कारण परेशानी उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसियों की ओर से कागजों की जांच, मोबाइल नंबर एंट्री और केवाईसी अपडेट के नाम पर बार-बार उन्हें लौटाया जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने की अनिवार्यता भी परेशानी का कारण बन रही है। तकनीकी प्रक्रिया में समय लगने के कारण गैस वितरण में देरी हो रही है। लोगों को घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने 8 तारीख को ही गैस सिलेंडर के लिए बुकिंग कराई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक उन्हें सिलेंडर नहीं मिल सका है। इस स्थिति से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बाहरी वेंडर बेंच रहे महंगे दाम में सिलेंडर विभिन्न शहरों से आ रही जानकारी के अनुसार एजेंसियों से समय पर गैस नहीं मिलने का फायदा कुछ बाहरी वेंडर उठा रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोग रसोई गैस सिलेंडर 1800 से 2000 रुपए तक में बेच रहे हैं, जो सामान्य कीमत से काफी अधिक है। इससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसियों की वितरण व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। अवैध रूप से महंगे दामों पर सिलेंडर बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही एजेंसी स्तर पर केवाईसी और अन्य प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की व्यवस्था करने की मांग की गई है, ताकि आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।  

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