जिलाधिकारी के निर्देशन में शिक्षा विभाग की टीम ने महेश्वरी बुक डिपो का निरीक्षण किया। अभिभावकों की शिकायत पर हुई इस कार्रवाई में स्कूल किताबों की बिक्री में गड़बड़ी के संकेत मिले, जहां गाइडलाइंस के विपरीत तय सेट और महंगी किताबें थमाई जा रही थीं। शहर में किताबों की मनमानी बिक्री पर प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए एसडीएम, डीआईओएस और अन्य अधिकारियों की टीम से महेश्वरी बुक डिपो का निरीक्षण कराया। जांच के दौरान यह जानकारी जुटाई गई कि किताबें किस दर पर बेची जा रही हैं और क्या निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है। निरीक्षण में पाया गया कि गाइडलाइंस के अनुसार अभिभावक अपनी पसंद से जनरल बुक्स खरीद सकते हैं, लेकिन महेश्वरी बुक डिपो पर पूरे सेट बनाकर दिए जा रहे थे। इन सेट्स में ज्यादातर किताबें सेंट जॉर्ज स्कूल से जुड़ी मिलीं, जिनमें विशेष रूप से बाग मुजफ्फर खान स्थित स्कूल की किताबों की संख्या अधिक पाई गई। अधिकारियों के अनुसार तीन स्कूलों की किताबें प्रमुख रूप से डिपो पर उपलब्ध थीं और कई मामलों में इनकी कीमतें अधिक बताई गईं। इस पर विभाग ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर दो दिन के भीतर जिलाधिकारी को आख्या सौंपने की बात कही है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। डीआईओएस विष्णु प्रताप सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सभी तथ्यों को संकलित किया गया है। वहीं डीआईओएस चंद्रशेखर के अनुसार यह कार्रवाई अभिभावकों की शिकायत पर की गई। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को एक स्लिप भी दी गई है, जिसमें किताबों के नाम दर्ज हैं। चंद्रशेखर ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में महेश्वरी बुक डिपो की तो गलती है ही, लेकिन ज्यादा जिम्मेदारी स्कूलों की बनती है, जो अभिभावकों को निजी और महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्कूल द्वारा किसी एक दुकान से ही किताबें लेने का दबाव बनाया जाता है या महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, तो ऐसे मामलों में सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। बीते दिनों सेंट पैट्रिक स्कूल में लगने वाली निजी किताबें भी इसी महेश्वरी बुक डिपो से सप्लाई होने का मामला सामने आया था। इस प्रकरण में संबंधित स्कूल पर विभाग ने ₹5,00,000 का जुर्माना भी लगाया था। लिकिन अभी तक वसूला नहीं गया है।


