मगध महिला कॉलेज के प्रिंसिपल ने लिखा डीएम को पत्र:LPG क्राइसिस पर मेन्यू बदला, 3000 की जगह 500 रोटियां बन रही; नाश्ते में पोहा और ब्रेड

मगध महिला कॉलेज के प्रिंसिपल ने लिखा डीएम को पत्र:LPG क्राइसिस पर मेन्यू बदला, 3000 की जगह 500 रोटियां बन रही; नाश्ते में पोहा और ब्रेड

LPG क्राइसिस को लेकर मगध महिला कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नागेंद्र वर्मा ने डीएम को पत्र लिखा है। हॉस्टल में छात्राओं के मेन्यू में भी कटौती की गई है। सुबह रोटी-सब्जी की जगह पोहा या फिर ब्रेड दिए जा रहे हैं। रोज जहां 3000 रोटियां बनती थी अब सिर्फ 500 ही बन रही है। जो जरूरतमंद या बीमार छात्राएं हैं, उन्हें ही रोटी मिल रही है। कॉलेज में छात्राओं को खाने को लेकर काफी परेशानी हो रही है। खाना अभी चूल्हा पर बन रहा है, इसलिए खाने बनाने वाले कर्मी सुबह 4 बजे से ही इसमें लग जाते हैं, ताकि लकड़ी-कोयला जलाया जा सके। आंधी-बारिश में उड़ा त्रिपाल, समियाना लगाकर बना रहे खाना मेस संचालक चंदन कुमार भारद्वाज ने कहा कि हॉस्टल में छात्राओं के लिए जो तय मेन्यू है, वह हम उन्हें नहीं दे पा रहे हैं। हमारा किचन कहीं और है, मगर हम खुले में खाना बना रहे हैं, क्योंकि लकड़ी और कोयला जालना पड़ रहा है। पिछले दिनों जो बारिश हुई थी उसमें लकड़ी भी भींग गई जिससे हमें काफी परेशानी हो रही है। खाना बनाने के लिए हमने ऊपर त्रिपाल लगाया था, लेकिन आंधी-बारिश में वह भी उड़ गया तो, फिर अब हमें समियाना लगाकर खाना बनाना पड़ रहा है। कई लोग तो काम भी छोड़कर चले गए हैं क्योंकि चूल्हा पर खाना बनाना पड़ रहा है। अब तक 5 एम्पलाई छोड़कर जा चुके हैं। 3000 की जगह अब 500 बन रही रोटियां खाने के मेन्यू में आंशिक बदलाव किए गए हैं। रोटी सिर्फ बीमार और जरूरतमंद छात्राओं को ही दी जा रही है, क्योंकि गैस क्राइसिस के चलते उतनी रोटी बनाना संभव नहीं है। हॉस्टल में करीब 600 छात्राएं रहती है, तो एवरेज 3000 रोटी बनती थी, लेकिन अब 500 ही बन पा रही है। मेन्यू में अब मैक्सिमम चावल ही खाने में दिया जा रहा है। सुबह में रोटी-सब्जी की जगह पोहा, चाय, स्प्राउट्स या फिर ब्रेड दिया जा रहा है। दोपहर में चावल, दाल, सब्जी या फिर कढ़ी दी जा रही है। रात में भी चावल और सब्जी दी जा रही है। रोटी सिर्फ जरूरतमंद छात्राओं को ही मिल रही है। LPG क्राइसिस को लेकर मगध महिला कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नागेंद्र वर्मा ने डीएम को पत्र लिखा है। हॉस्टल में छात्राओं के मेन्यू में भी कटौती की गई है। सुबह रोटी-सब्जी की जगह पोहा या फिर ब्रेड दिए जा रहे हैं। रोज जहां 3000 रोटियां बनती थी अब सिर्फ 500 ही बन रही है। जो जरूरतमंद या बीमार छात्राएं हैं, उन्हें ही रोटी मिल रही है। कॉलेज में छात्राओं को खाने को लेकर काफी परेशानी हो रही है। खाना अभी चूल्हा पर बन रहा है, इसलिए खाने बनाने वाले कर्मी सुबह 4 बजे से ही इसमें लग जाते हैं, ताकि लकड़ी-कोयला जलाया जा सके। आंधी-बारिश में उड़ा त्रिपाल, समियाना लगाकर बना रहे खाना मेस संचालक चंदन कुमार भारद्वाज ने कहा कि हॉस्टल में छात्राओं के लिए जो तय मेन्यू है, वह हम उन्हें नहीं दे पा रहे हैं। हमारा किचन कहीं और है, मगर हम खुले में खाना बना रहे हैं, क्योंकि लकड़ी और कोयला जालना पड़ रहा है। पिछले दिनों जो बारिश हुई थी उसमें लकड़ी भी भींग गई जिससे हमें काफी परेशानी हो रही है। खाना बनाने के लिए हमने ऊपर त्रिपाल लगाया था, लेकिन आंधी-बारिश में वह भी उड़ गया तो, फिर अब हमें समियाना लगाकर खाना बनाना पड़ रहा है। कई लोग तो काम भी छोड़कर चले गए हैं क्योंकि चूल्हा पर खाना बनाना पड़ रहा है। अब तक 5 एम्पलाई छोड़कर जा चुके हैं। 3000 की जगह अब 500 बन रही रोटियां खाने के मेन्यू में आंशिक बदलाव किए गए हैं। रोटी सिर्फ बीमार और जरूरतमंद छात्राओं को ही दी जा रही है, क्योंकि गैस क्राइसिस के चलते उतनी रोटी बनाना संभव नहीं है। हॉस्टल में करीब 600 छात्राएं रहती है, तो एवरेज 3000 रोटी बनती थी, लेकिन अब 500 ही बन पा रही है। मेन्यू में अब मैक्सिमम चावल ही खाने में दिया जा रहा है। सुबह में रोटी-सब्जी की जगह पोहा, चाय, स्प्राउट्स या फिर ब्रेड दिया जा रहा है। दोपहर में चावल, दाल, सब्जी या फिर कढ़ी दी जा रही है। रात में भी चावल और सब्जी दी जा रही है। रोटी सिर्फ जरूरतमंद छात्राओं को ही मिल रही है।  

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