भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज राजगीर आ रही हैं। नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। इसअवसर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयदअता हसनैन और सीएम नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति करीब 5 घंटे 30 मिनट तक राजगीर में रहेंगी। प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी के भग्नावशेषों का भी भ्रमण करेंगी। राष्ट्रपति के हाथों 10 पीएचडी उपाधियां और 36 स्वर्ण पदक प्रदान की जाएगी। 13 देशों के विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। डिग्री लेने वाले छात्रों में 197 विदेशी छात्र भी शामिल हैं। दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र का शुभारंभ होगा। 2000 सीटों वाले अत्याधुनिक सभागार ‘विश्वमित्रालय’ का उद्घाटन भी करेंगी। सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा घेरे ‘ब्लू बुक’ के कड़े निर्देशों के तहत अभेद्य बनाया गया है। फाइनल रिहर्सल के साथ कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। डीएम ने दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों को पूरी तरह सतर्करहने के निर्देश दिए हैं। सुबह 10:35 बजे पटना पहुंचेंगी राष्ट्रपति का विशेष विमान पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10:35 बजे उतरेगा। इसके ठीक दस मिनट बाद, 10:45 बजे वह भारतीय वायुसेना के एमआई-17 (MI-17) हेलीकॉप्टर से नालंदा के लिए उड़ान भरेंगी। लगभग 62 किलोमीटर की हवाई दूरी को 35 मिनट के ‘ब्लॉक फ्लाइंग टाइम’ में तय करते हुए उनका हेलीकॉप्टर ठीक 11:20 बजे नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में बने विशेष हेलीपैड पर लैंड करेगा। इसके बाद सड़क मार्ग से 11:30 बजे मुख्य आयोजन स्थल पर पहुंचेंगी। 11:40 बजे वह मुख्य समारोह में प्रवेश करेंगी। दोपहर 12:00 बजे से 13:10 बजे के बीच का समय सबसे महत्वपूर्ण है, जब राष्ट्रपति ‘विश्वमित्रालय’ नए सभागार का उद्घाटन करेंगी और दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगी। इस दौरान वह ग्राम समुदाय के भागीदारों के साथ एक ग्रुप फोटो सेशन (Group Photograph) में भी शामिल होंगी। बौद्ध विरासत पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी। पटना से दिल्ली के लिए रवाना होंगी दोपहर का भोजन विश्वविद्यालय परिसर में ही आरक्षित रखा गया है। दोपहर 15:30 बजे वह प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों (विश्व धरोहर स्थल) का भ्रमण करने जाएंगी। शाम 16:50 बजे वह हेलीपैड से पटना के लिए प्रस्थान करेंगी। 17:25 बजे पटना हवाई अड्डे पहुंचकर दिल्ली के लिए रवाना होंगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा नालंदा के इतिहास में एक मील का पत्थर है। अभिलेखों के अनुसार, द्रौपदी मुर्मू नालंदा आने वाली देश की सातवीं राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तक ने इस धरती पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेष रूप से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का इस क्षेत्र से गहरा लगाव था। यहां तीन बार का प्रवास किया था। आज राष्ट्रपति मुर्मु की उपस्थिति इसी गौरवशाली परंपरा की अगली कड़ी है, जो यह संदेश देती है कि भारत अपनी प्राचीन जड़ों को सींचते हुए आधुनिक भविष्य की ओर अग्रसर है। सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में नया स्वरूप दीक्षांत समारोह के साथ-साथ आज ‘विश्वमित्रालय’ सभागार का उद्घाटन नालंदा विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना में एक बड़ा इजाफा है। यह सभागार आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा। बिहार संग्रहालय के सहयोग से लगाई गई बौद्ध विरासत प्रदर्शनी भी आकर्षण का मुख्य केंद्र है, जो प्राचीन नालंदा की खुदाई में मिले अवशेषों और यहां के समृद्ध इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करती है। यह प्रदर्शनी राष्ट्रपति को उन महान आचार्यों और भिक्षुओं की याद दिलाएगी, जिन्होंने सदियों पहले यहां ज्ञान की गंगा बहाई थी। प्रशासनिक सतर्कता और जन-उत्साह इस हाई-प्रोफाइल दौरे को सफल बनाने के लिए नालंदा समाहरणालय की गोपनीय शाखा और जिला प्रशासन ने रात-दिन एक कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, दंडाधिकारियों और पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। असामाजिक तत्वों और विघटनकारी शक्तियों पर पैनी नजर रखने के लिए विशेष खुफिया शाखा सक्रिय है। स्थानीय जनता में भी इस दौरे को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। राजगीर और नालंदा की सड़कों को तिरंगों और स्वागत द्वारों से सजाया गया है। लोगों का मानना है कि राष्ट्रपति के इस दौरे से नालंदा में पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज राजगीर आ रही हैं। नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। इसअवसर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयदअता हसनैन और सीएम नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति करीब 5 घंटे 30 मिनट तक राजगीर में रहेंगी। प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी के भग्नावशेषों का भी भ्रमण करेंगी। राष्ट्रपति के हाथों 10 पीएचडी उपाधियां और 36 स्वर्ण पदक प्रदान की जाएगी। 13 देशों के विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। डिग्री लेने वाले छात्रों में 197 विदेशी छात्र भी शामिल हैं। दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र का शुभारंभ होगा। 2000 सीटों वाले अत्याधुनिक सभागार ‘विश्वमित्रालय’ का उद्घाटन भी करेंगी। सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा घेरे ‘ब्लू बुक’ के कड़े निर्देशों के तहत अभेद्य बनाया गया है। फाइनल रिहर्सल के साथ कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। डीएम ने दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों को पूरी तरह सतर्करहने के निर्देश दिए हैं। सुबह 10:35 बजे पटना पहुंचेंगी राष्ट्रपति का विशेष विमान पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10:35 बजे उतरेगा। इसके ठीक दस मिनट बाद, 10:45 बजे वह भारतीय वायुसेना के एमआई-17 (MI-17) हेलीकॉप्टर से नालंदा के लिए उड़ान भरेंगी। लगभग 62 किलोमीटर की हवाई दूरी को 35 मिनट के ‘ब्लॉक फ्लाइंग टाइम’ में तय करते हुए उनका हेलीकॉप्टर ठीक 11:20 बजे नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में बने विशेष हेलीपैड पर लैंड करेगा। इसके बाद सड़क मार्ग से 11:30 बजे मुख्य आयोजन स्थल पर पहुंचेंगी। 11:40 बजे वह मुख्य समारोह में प्रवेश करेंगी। दोपहर 12:00 बजे से 13:10 बजे के बीच का समय सबसे महत्वपूर्ण है, जब राष्ट्रपति ‘विश्वमित्रालय’ नए सभागार का उद्घाटन करेंगी और दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगी। इस दौरान वह ग्राम समुदाय के भागीदारों के साथ एक ग्रुप फोटो सेशन (Group Photograph) में भी शामिल होंगी। बौद्ध विरासत पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी। पटना से दिल्ली के लिए रवाना होंगी दोपहर का भोजन विश्वविद्यालय परिसर में ही आरक्षित रखा गया है। दोपहर 15:30 बजे वह प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों (विश्व धरोहर स्थल) का भ्रमण करने जाएंगी। शाम 16:50 बजे वह हेलीपैड से पटना के लिए प्रस्थान करेंगी। 17:25 बजे पटना हवाई अड्डे पहुंचकर दिल्ली के लिए रवाना होंगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा नालंदा के इतिहास में एक मील का पत्थर है। अभिलेखों के अनुसार, द्रौपदी मुर्मू नालंदा आने वाली देश की सातवीं राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तक ने इस धरती पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेष रूप से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का इस क्षेत्र से गहरा लगाव था। यहां तीन बार का प्रवास किया था। आज राष्ट्रपति मुर्मु की उपस्थिति इसी गौरवशाली परंपरा की अगली कड़ी है, जो यह संदेश देती है कि भारत अपनी प्राचीन जड़ों को सींचते हुए आधुनिक भविष्य की ओर अग्रसर है। सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में नया स्वरूप दीक्षांत समारोह के साथ-साथ आज ‘विश्वमित्रालय’ सभागार का उद्घाटन नालंदा विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना में एक बड़ा इजाफा है। यह सभागार आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा। बिहार संग्रहालय के सहयोग से लगाई गई बौद्ध विरासत प्रदर्शनी भी आकर्षण का मुख्य केंद्र है, जो प्राचीन नालंदा की खुदाई में मिले अवशेषों और यहां के समृद्ध इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करती है। यह प्रदर्शनी राष्ट्रपति को उन महान आचार्यों और भिक्षुओं की याद दिलाएगी, जिन्होंने सदियों पहले यहां ज्ञान की गंगा बहाई थी। प्रशासनिक सतर्कता और जन-उत्साह इस हाई-प्रोफाइल दौरे को सफल बनाने के लिए नालंदा समाहरणालय की गोपनीय शाखा और जिला प्रशासन ने रात-दिन एक कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, दंडाधिकारियों और पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। असामाजिक तत्वों और विघटनकारी शक्तियों पर पैनी नजर रखने के लिए विशेष खुफिया शाखा सक्रिय है। स्थानीय जनता में भी इस दौरे को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। राजगीर और नालंदा की सड़कों को तिरंगों और स्वागत द्वारों से सजाया गया है। लोगों का मानना है कि राष्ट्रपति के इस दौरे से नालंदा में पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।


