प्राचीन भारत के गौरव और ज्ञान के वैश्विक प्रतीक नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की यात्रा में 31 मार्च, 2026 का दिन एक नया इतिहास रचने जा रहा है। विश्वविद्यालय के राजगीर स्थित नवनिर्मित स्थायी परिसर में आयोजित होने वाले द्वितीय दीक्षांत समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। राष्ट्रपति के तौर पर राजगीर और इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय का यह उनका पहला दौरा होगा। यह दीक्षांत समारोह कई मायनों में अभूतपूर्व होने वाला है। जून 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित भव्य स्थायी परिसर में आयोजित होने वाला यह पहला दीक्षांत समारोह है। इससे पूर्व, विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार के बाद पहला दीक्षांत समारोह वर्ष 2016 में आयोजित किया गया था, जिसके नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अब यह भव्य आयोजन होने जा रहा है। समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) पेरियासामी कुमारन भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहेंगे। ‘विश्वमित्रालय’ का होगा उद्घाटन और ‘मंजिरी’ का विमोचन अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु विश्वविद्यालय के नवनिर्मित अत्याधुनिक सभागार ‘विश्वमित्रालय’ का औपचारिक उद्घाटन करेंगी। 2000 सीटों की क्षमता वाला यह सभागार विश्वविद्यालय की वैश्विक गतिविधियों का नया केंद्र बनेगा। इसके साथ ही, राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विशेष पत्रिका ‘मंजिरी’ का विमोचन भी करेंगी। यह पत्रिका पहले बैच से लेकर अब तक के पूर्व छात्रों (एल्युमिनाई) की उपलब्धियों और उनके अनुभवों का एक संग्रह है। 13 देशों के छात्र पाएंगे उपाधि, स्वर्ण पदकों से नवाजे जाएंगे मेधावी नालंदा की वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा की झलक इस समारोह में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। कार्यक्रम के दौरान अर्जेंटीना, वियतनाम, भूटान, इंडोनेशिया, केन्या, लाओस, म्यांमार, सर्बिया, घाना, थाईलैंड, नेपाल, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे जैसे 13 देशों के छात्र अपनी डिग्री प्राप्त करेंगे। राष्ट्रपति के हाथों 10 पीएचडी धारकों और 36 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र की होगी शुरुआत समारोह के उत्तरार्ध में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि विश्वविद्यालय के खाते में जुड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित ‘दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह केंद्र भारत के ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को शैक्षणिक मजबूती प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से छात्रों के परिजन और गणमान्य अतिथि राजगीर पहुंच रहे हैं। प्राचीन भारत के गौरव और ज्ञान के वैश्विक प्रतीक नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की यात्रा में 31 मार्च, 2026 का दिन एक नया इतिहास रचने जा रहा है। विश्वविद्यालय के राजगीर स्थित नवनिर्मित स्थायी परिसर में आयोजित होने वाले द्वितीय दीक्षांत समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। राष्ट्रपति के तौर पर राजगीर और इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय का यह उनका पहला दौरा होगा। यह दीक्षांत समारोह कई मायनों में अभूतपूर्व होने वाला है। जून 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित भव्य स्थायी परिसर में आयोजित होने वाला यह पहला दीक्षांत समारोह है। इससे पूर्व, विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार के बाद पहला दीक्षांत समारोह वर्ष 2016 में आयोजित किया गया था, जिसके नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अब यह भव्य आयोजन होने जा रहा है। समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) पेरियासामी कुमारन भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहेंगे। ‘विश्वमित्रालय’ का होगा उद्घाटन और ‘मंजिरी’ का विमोचन अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु विश्वविद्यालय के नवनिर्मित अत्याधुनिक सभागार ‘विश्वमित्रालय’ का औपचारिक उद्घाटन करेंगी। 2000 सीटों की क्षमता वाला यह सभागार विश्वविद्यालय की वैश्विक गतिविधियों का नया केंद्र बनेगा। इसके साथ ही, राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विशेष पत्रिका ‘मंजिरी’ का विमोचन भी करेंगी। यह पत्रिका पहले बैच से लेकर अब तक के पूर्व छात्रों (एल्युमिनाई) की उपलब्धियों और उनके अनुभवों का एक संग्रह है। 13 देशों के छात्र पाएंगे उपाधि, स्वर्ण पदकों से नवाजे जाएंगे मेधावी नालंदा की वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा की झलक इस समारोह में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। कार्यक्रम के दौरान अर्जेंटीना, वियतनाम, भूटान, इंडोनेशिया, केन्या, लाओस, म्यांमार, सर्बिया, घाना, थाईलैंड, नेपाल, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे जैसे 13 देशों के छात्र अपनी डिग्री प्राप्त करेंगे। राष्ट्रपति के हाथों 10 पीएचडी धारकों और 36 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र की होगी शुरुआत समारोह के उत्तरार्ध में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि विश्वविद्यालय के खाते में जुड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित ‘दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह केंद्र भारत के ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को शैक्षणिक मजबूती प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से छात्रों के परिजन और गणमान्य अतिथि राजगीर पहुंच रहे हैं।


