वर्तमान में महज 1800 गट्ठर का था स्टॉक, अब कोलकाता से आएंगे जूट बैग, 1000 जूट और 2000 पीपी बैग की आपूर्ति से निकलेगा समाधान

वर्तमान में महज 1800 गट्ठर का था स्टॉक, अब कोलकाता से आएंगे जूट बैग, 1000 जूट और 2000 पीपी बैग की आपूर्ति से निकलेगा समाधान

रबी उपार्जन सीजन 2026 के तहत गेहूं खरीदी के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से उपार्जन केंद्रों पर बारदानों की संभावित कमी को लेकर जो चिंताएं बनी हुई थीं, वे अब दूर होती नजर आ रही हैं। विभाग द्वारा तैयार किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में बारदानों की नई खेप पहुंचने वाली है, जिससे लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होगा।

लक्ष्य के मुकाबले कम था शुरुआती स्टॉक

जिले में इस वर्ष के लिए कुल 82000 मीट्रिक टन विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए जिले को तत्काल 3280 गट्ठर बारदानों की आवश्यकता थी। हालांकि, शुरुआती समीक्षा में सामने आया कि वर्तमान में विभाग के पास महज 1800 गट्ठर ही उपलब्ध थे। इस लिहाज से जिले में 1480 गट्ठर बारदानों की भारी कमी महसूस की जा रही थी, जिससे खरीदी केंद्रों पर काम प्रभावित होने की आशंका थी।

कोलकाता के जूट और पीपी बैग से भरी जाएगी कमी

बारदानों के इस संकट को हल करने के लिए विभाग ने त्रि-स्तरीय आपूर्ति योजना तैयार की है। कमी को पूरा करने के लिए शासन स्तर से 3000 नए गट्ठर स्वीकृत किए गए हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण 1000 गट्ठर जूट के बैग हैं, जो सीधे कोलकाता से मंगवाए जा रहे हैं। जूट के बैग अनाज के लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। इसके साथ ही, बैकअप के तौर पर 2000 गट्ठर पीपी (प्लास्टिक) बैग की भी आपूर्ति की जा रही है।

जरूरत से ज्यादा होगा स्टॉक, निर्बाध होगी तुलाई

जिला खाद्य एंव आपूर्ति अधिकारी सीताराम कोठारे ने बताया कि नई खेप के आने के बाद जिले में बारदानों का गणित पूरी तरह बदल जाएगा। 1800 के पुराने स्टॉक में 3000 नए गट्ठर जुड़ने से कुल उपलब्धता 4800 गट्ठर हो जाएगी। यह संख्या जिले की अनिवार्य आवश्यकता (3280 गट्ठर) से कहीं अधिक है।

समय सीमा में निराकरण की संभावना

डीएसओ के मुताबिक कोलकाता से जूट बैग की रवानगी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि खरीदी का काम पूरी तेजी पकड़ने से पहले ही यह स्टॉक सभी केंद्रों तक पहुंचा दिया जाएगा। पर्याप्त बारदाना होने से न केवल समय पर उपार्जन संभव होगा, बल्कि परिवहन की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।

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