बक्सर के किला मैदान में शनिवार शाम विश्वामित्र महोत्सव का आयोजन किया गया। कला, संस्कृति एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में बिहार की लोक परंपरा, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली। महोत्सव का शुभारंभ जिला पदाधिकारी साहिला, जिला जज, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भोजपुरी गायक भरत शर्मा और प्रसिद्ध लोक गायक विष्णु ओझा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके साथ ही पूरे मैदान में सांस्कृतिक उत्सव का माहौल बन गया। कार्यक्रम की शुरुआत कलकत्ता स्पीड डांस ग्रुप के कलाकारों ने गणेश वंदना पर प्रस्तुति से की। इसके बाद राधा सिन्हा ग्रुप डांस ने श्रीराम-सीता विवाह पर आधारित नाट्य प्रस्तुत किया। स्क्रीन पर दिखाए गए विवाह के दृश्य कलाकारों द्वारा “आज जनकपुर में मड़वा” गीत प्रस्तुत करने पर वातावरण भक्तिमय हो गया। मंच के पीछे लगी बड़ी स्क्रीन पर रामरेखा घाट पर होने वाले विवाह के दृश्य भी दिखाए गए, जिससे प्रस्तुति और अधिक सजीव हो उठी। सीता-राम विवाह की इस प्रस्तुति में नृत्य और संगीत के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक विरासत, मांगलिक गीत और लोक परंपराओं का सुंदर समावेश था। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया। भव्या पाण्डेय ने मंच पर दी प्रस्तुति इसके बाद बॉलीवुड गायिका भव्या पाण्डेय ने मंच पर प्रस्तुति दी। उन्होंने “श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में” भजन से शुरुआत की। उनकी आवाज ने मैदान को भक्तिमय कर दिया। उन्होंने पारंपरिक गीतों की भी प्रस्तुति दी, जिस पर दर्शक झूम उठे। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी साहिला ने कहा कि विश्वामित्र महोत्सव का उद्देश्य लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और बिहार की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करते हैं। कलाकारों ने नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देकर बांधा समां कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। गीत-संगीत के माध्यम से बिहार के महापुरुषों और धार्मिक महत्व को प्रदर्शित किया गया। श्रीराम-सीता के आदर्श जीवन के साथ-साथ वीरता के प्रतीक वीर कुंवर सिंह के इतिहास को भी मंच पर जीवंत किया गया। कार्यक्रम में जिले के आला अधिकारी, गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन ने बक्सर की धरती को भक्ति, कला और परंपरा के रंगों से सराबोर कर दिया। विश्वामित्र महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बक्सर की सांस्कृतिक पहचान आज भी उतनी ही समृद्ध और जीवंत है। बक्सर के किला मैदान में शनिवार शाम विश्वामित्र महोत्सव का आयोजन किया गया। कला, संस्कृति एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में बिहार की लोक परंपरा, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली। महोत्सव का शुभारंभ जिला पदाधिकारी साहिला, जिला जज, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भोजपुरी गायक भरत शर्मा और प्रसिद्ध लोक गायक विष्णु ओझा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके साथ ही पूरे मैदान में सांस्कृतिक उत्सव का माहौल बन गया। कार्यक्रम की शुरुआत कलकत्ता स्पीड डांस ग्रुप के कलाकारों ने गणेश वंदना पर प्रस्तुति से की। इसके बाद राधा सिन्हा ग्रुप डांस ने श्रीराम-सीता विवाह पर आधारित नाट्य प्रस्तुत किया। स्क्रीन पर दिखाए गए विवाह के दृश्य कलाकारों द्वारा “आज जनकपुर में मड़वा” गीत प्रस्तुत करने पर वातावरण भक्तिमय हो गया। मंच के पीछे लगी बड़ी स्क्रीन पर रामरेखा घाट पर होने वाले विवाह के दृश्य भी दिखाए गए, जिससे प्रस्तुति और अधिक सजीव हो उठी। सीता-राम विवाह की इस प्रस्तुति में नृत्य और संगीत के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक विरासत, मांगलिक गीत और लोक परंपराओं का सुंदर समावेश था। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया। भव्या पाण्डेय ने मंच पर दी प्रस्तुति इसके बाद बॉलीवुड गायिका भव्या पाण्डेय ने मंच पर प्रस्तुति दी। उन्होंने “श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में” भजन से शुरुआत की। उनकी आवाज ने मैदान को भक्तिमय कर दिया। उन्होंने पारंपरिक गीतों की भी प्रस्तुति दी, जिस पर दर्शक झूम उठे। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी साहिला ने कहा कि विश्वामित्र महोत्सव का उद्देश्य लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और बिहार की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करते हैं। कलाकारों ने नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देकर बांधा समां कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। गीत-संगीत के माध्यम से बिहार के महापुरुषों और धार्मिक महत्व को प्रदर्शित किया गया। श्रीराम-सीता के आदर्श जीवन के साथ-साथ वीरता के प्रतीक वीर कुंवर सिंह के इतिहास को भी मंच पर जीवंत किया गया। कार्यक्रम में जिले के आला अधिकारी, गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन ने बक्सर की धरती को भक्ति, कला और परंपरा के रंगों से सराबोर कर दिया। विश्वामित्र महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बक्सर की सांस्कृतिक पहचान आज भी उतनी ही समृद्ध और जीवंत है।


