जमुई जिले के बरहट प्रखंड स्थित कुकरझप डैम में जल्द ही गंगा नदी का पानी संग्रहित किया जाएगा। इससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। इस परियोजना के लिए जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को विभागीय टीम ने डैम क्षेत्र में मिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को प्रयोगशाला में भेज दिया गया है।सुपरवाइजर राजकिशोर प्रसाद ने बताया कि वाटर इंटेक्स योजना के तहत गंगा से पानी लाकर डैम में संग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पाइपलाइन का काम प्राथमिकता पर किया जाएगा
इसके लिए ड्रिल मशीन से लगभग 20 फीट गहराई तक खुदाई कर मिट्टी के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें एसपीटी टेस्ट के लिए भेजा गया है।जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि पाइपलाइन बिछाने के लिए किस क्षमता और मानक के पाइप का इस्तेमाल किया जाए। इसका उद्देश्य योजना को टिकाऊ और सुरक्षित बनाना है। यदि रिपोर्ट संतोषजनक रही, तो पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। पेयजल किल्लत से राहत मिलेगी
साथ ही, क्षेत्र में जल संकट की समस्या भी काफी हद तक कम होगी। गर्मी के मौसम में पेयजल की किल्लत से जूझ रहे लोगों को भी राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, गंगा में बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी के प्रबंधन में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जमुई जिले के बरहट प्रखंड स्थित कुकरझप डैम में जल्द ही गंगा नदी का पानी संग्रहित किया जाएगा। इससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। इस परियोजना के लिए जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को विभागीय टीम ने डैम क्षेत्र में मिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को प्रयोगशाला में भेज दिया गया है।सुपरवाइजर राजकिशोर प्रसाद ने बताया कि वाटर इंटेक्स योजना के तहत गंगा से पानी लाकर डैम में संग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पाइपलाइन का काम प्राथमिकता पर किया जाएगा
इसके लिए ड्रिल मशीन से लगभग 20 फीट गहराई तक खुदाई कर मिट्टी के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें एसपीटी टेस्ट के लिए भेजा गया है।जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि पाइपलाइन बिछाने के लिए किस क्षमता और मानक के पाइप का इस्तेमाल किया जाए। इसका उद्देश्य योजना को टिकाऊ और सुरक्षित बनाना है। यदि रिपोर्ट संतोषजनक रही, तो पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। पेयजल किल्लत से राहत मिलेगी
साथ ही, क्षेत्र में जल संकट की समस्या भी काफी हद तक कम होगी। गर्मी के मौसम में पेयजल की किल्लत से जूझ रहे लोगों को भी राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, गंगा में बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी के प्रबंधन में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


