पालतू श्वानों के लिए नए नियम बनाने की तैयारी, अनिवार्य होगा लाइसेंस

पालतू श्वानों के लिए नए नियम बनाने की तैयारी, अनिवार्य होगा लाइसेंस

-पांच नगर निगमों स्पष्ट मानदंड तय करने के निर्देश

ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी (जीबीए) शहर में पालतू श्वानों pet dogs को रखने के लिए नए मानक और नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य पालतू और आवारा श्वानों से जुड़ी शिकायतों को कम करना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सुप्रीम कोर्ट Supreme Court पहले ही स्थानीय निकायों को पालतू और आवारा श्वानों के प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दे चुका है। इसके तहत बेंगलूरु में भी श्वानों से जुड़ी समस्याओं, खासकर बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए नियम बनाए जा रहे हैं।

जीबीए Greater Bengaluru Authority को हाल के महीनों में कई शिकायतें मिली थीं, जिनमें कहा गया था कि कुछ पालतू श्वान सार्वजनिक स्थानों और आवासीय इलाकों में परेशानी का कारण बन रहे हैं। इसके बाद जीबीए के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने शहर के पांच नगर निगमों के आयुक्तों को पालतू श्वानों को रखने के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने और नए नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं।

पिछले वर्ष जीबीए के पशुपालन विभाग ने शहर में पालतू श्वानों का सर्वे किया था, जिसमें लगभग 1 लाख 15 हजार पालतू श्वानों का पंजीकरण और विवरण जुटाया गया।

लाइसेंस और पंजीकरण होगा अनिवार्य

प्रस्तावित कानून के तहत पालतू श्वान रखने के लिए जीबीए के पशुपालन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए हर वर्ष एक तय शुल्क देना होगा और लाइसेंस का वार्षिक नवीकरण कराना पड़ेगा। लाइसेंस शुल्क श्वान की नस्ल (ब्रीड) के आधार पर तय किया जाएगा।

साथ ही, हर पालतू श्वान के लिए जीबीए की ओर से मान्यता प्राप्त पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेना जरूरी होगा।

माइक्रोचिप, टीकाकरण और नसबंदी जरूरी

नए नियमों के अनुसार, हर पालतू श्वान में मालिक के खर्च पर माइक्रोचिप लगवाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, रेबीज का टीकाकरण और उसका प्रमाणपत्र भी जरूरी होगा। 12 महीने से अधिक उम्र के श्वानों की नसबंदी कराना भी अनिवार्य किया गया है।

घर और सार्वजनिक स्थानों पर सख्त नियम

  • एक घर में तीन से अधिक श्वान रखने की अनुमति नहीं होगी।
  • नियमों का उल्लंघन होने पर अतिरिक्त श्वानों को जब्त कर एनिमल कंट्रोल सेंटर भेजा जाएगा।
  • श्वानों को इस तरह रखा जाना चाहिए कि पड़ोसियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
  • श्वानों के रहने की जगह की नियमित सफाई जरूरी होगी।

सफाई की जिम्मेदारी मालिक की होगी

पालतू श्वानों को बाहर घुमाते समय पट्टा (लीश) लगाना अनिवार्य होगा। यदि कोई श्वान सार्वजनिक स्थान पर गंदगी करता है, तो उसकी सफाई की जिम्मेदारी मालिक की होगी। यदि कोई पालतू श्वान भाग जाता है और नगर निगम के अधिकारी उसे पकड़ लेते हैं, तो 72 घंटे के भीतर छुड़ाने पर 1,000 रुपए जुर्माना देना होगा। 72 घंटे के बाद हर दिन के लिए 200 रुपए अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। तय समय में श्वान न छुड़ाने पर उसे पशु आश्रय गृह भेज दिया जाएगा।

कुछ नस्लों पर प्रतिबंध

नए नियमों के तहत अपार्टमेंट परिसरों में गुस्सैल प्रवृत्ति वाले श्वानों को रखने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। विशेष रूप से जर्मन शेफर्ड, रॉटवीलर, डोबर्मन और हाउंड्स जैसी नस्लों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने पर पाबंदी लगाई जा सकती है। जीबीए अधिकारियों के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एनिमल क्रुएल्टी एक्ट-1960 और नगर पालिका कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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