रेलवे से सेवाकर वसूली की तैयारी:प्रचार का बजट 50 लाख, खर्च किया 65 लाख

नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट सम्मेलन मंगलवार को निगम मुख्यालय में हुआ, लेकिन बजट पर चर्चा टल गई। सुबह 11.30 बजे शुरू हुई बैठक बार-बार स्थगन के चलते दो घंटे बाधित रही और दोपहर 3 बजे बिना बजट पारित किए समाप्त हो गई। प्रचार-प्रसार के ज्यादा खर्च पर विपक्ष ने आपत्ति ली। पहली बार निगम का राजस्व बढ़ाने के लिए रेलवे से भी सेवाकर वसूली लेने पर चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान माहौल सामान्य रहा, लेकिन फिर विपक्ष ने प्रस्ताव 7 सीए की फीस पर चर्चा के लिए समय मांगा, जिस पर सदन एक घंटे स्थगित किया। इसके बाद सदन लंच के लिए एक घंटे स्थगित किया गया। सदन 2.30 बजे तक शुरू हो सका। इसके बाद 8 प्रस्तावों पर विचार हुआ, जिनमें से सभी को स्वीकृति दी गई, लेकिन 9वां प्रस्ताव बजट पर विपक्ष ने अध्ययन के लिए समय मांग लिया, जिससे इसे 30 मार्च तक स्थगित कर दिया गया। इन प्रस्तावों को भी मिली स्वीकृति सेवाकर के चलते संपत्तिकर का 104 करोड़ रुपए लक्ष्य शहर में मुख्यमंत्री के दौरे, भूमि पूजन और अन्य आयोजनों के प्रचार-प्रसार का दायरा बढ़ा, लेकिन खर्च भी बजट से कहीं ज्यादा हो गया। 2025-26 में विभाग को प्रचार-प्रसार के लिए 50 लाख रुपए का बजट था, लेकिन दिसंबर तक ही 65 लाख रुपए खर्च हो चुके थे। अतिरिक्त 30 लाख रुपए की मांग रखी है। नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने आरोप लगाया कि शहर के विकास की बजाय बड़े-बड़े होर्डिंग और प्रचार सामग्री पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है। योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच रही। विकास की बजाय सीएम के कार्यक्रम से बढ़ा खर्च – राय नगर निगम ने इस बार आय बढ़ाने के लिए रेलवे और शासकीय संपत्तियों पर फोकस किया है। नियमों के तहत रेलवे से संपत्ति कर की जगह 33 प्रतिशत सेवाकर वसूला जाएगा। अधिकारियों के अनुसार रेलवे के पास बड़ी मात्रा में भूमि और संपत्तियां है, जिससे निगम को अच्छा राजस्व मिल सकता है। विभाग प्रभारी रजत मेहता ने बताया कि इस बार संपत्तिकर वसूली का लक्ष्य बढ़ाकर 104 करोड़ रुपए रखा है, जो पहले 70 से 80 करोड़ के बीच रहता था।

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