बलिया में एक गरीब पिता ने मंगलवार को जिलाधिकारी दरबार में अपनी बेटी को निजी अस्पताल से निकालने और एक आशा बहू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पिता का आरोप है कि आशा बहू ने कमीशन के लालच में उनकी गर्भवती बेटी को सरकारी अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां अब उनसे अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं। हल्दी थाना क्षेत्र के रेपुरा निवासी मदन यादव ने बताया कि उनकी बेटी कृति गर्भवती थी। गांव की आशा बहू 5 मार्च को कृति को हल्दी चट्टी स्थित एक निजी डायग्नोसिस सेंटर ले गईं। वहां अल्ट्रासाउंड और खून की जांच कराई गई, जिसमें बताया गया कि बच्चा उल्टा है और उसने गंदा पानी पी लिया है। आशा बहू ने मदन यादव की पत्नी इंदु देवी से कहा कि बच्ची को बलिया अस्पताल में दिखाना होगा। जब इंदु देवी ने सरकारी एम्बुलेंस बुलाने को कहा, तो आशा बहू ने तुरंत निजी गाड़ी से चलने पर जोर दिया। इसके बाद आशा बहू मरीज को सरकारी अस्पताल न ले जाकर सीधे बलिया शहर के हॉस्पिटल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले गई। निजी अस्पताल में आशा बहू ने इंदु देवी से पांच हजार रुपये जमा करवाकर कृति का ऑपरेशन करवा दिया। जब मदन यादव को इस बात का पता चला और उन्होंने आशा बहू से सरकारी अस्पताल न ले जाने का कारण पूछा, तो उसने छुट्टी होने का बहाना बनाया। अब अस्पताल द्वारा बेटी को डिस्चार्ज करने के लिए बीस हजार रुपये और मांगे जा रहे हैं, जबकि मदन यादव आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पास पैसे नहीं हैं। मदन यादव ने आरोप लगाया कि ऐसी आशा बहुएं कमीशन के लालच में मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचाकर उनका आर्थिक शोषण कर रही हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि उनकी बेटी को निजी अस्पताल में पहुंचाने वाली और जानबूझकर ऑपरेशन करवाने वाली आशा बहू के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और उनकी बेटी को निजी अस्पताल से निकलवाया जाए।


