एशिया के सबसे बड़े ट्रस्टों में से एक कायस्थ पाठशाला में विवाद गहरा गया है। ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुशील सिन्हा ने वर्तमान अध्यक्ष और पदाधिकारियों पर मनमानी व गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि ट्रस्ट अपने मूल उद्देश्यों, शिक्षा और समाज सेवा, से भटककर निजी स्वार्थों के लिए काम कर रहा है। डॉ. सिन्हा के अनुसार, ट्रस्ट की स्थापना मुंशी काली प्रसाद और अन्य दानदाताओं ने समाज के उत्थान के लिए की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके 15 महीने के कार्यकाल में 100 रुपये शुल्क देकर बनाए गए 2900 से अधिक नए सदस्यों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। इसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन बताया। उन्होंने कहा कि कायस्थ पाठशाला के कुल सदस्यों की संख्या लगभग 40 हजार है। यदि नए सदस्यों को मतदान से रोका गया, तो वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। डॉ. सिन्हा का दावा है कि मौजूदा कार्यकारिणी को डर है कि नए सदस्यों के मतदान करने से उनकी सत्ता जा सकती है। डॉ. सिन्हा ने ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें बेचने की साजिश की जा रही है। इसके अतिरिक्त, उनके कार्यकाल में शुरू किए गए धर्मशाला और अस्पताल निर्माण जैसे सामाजिक प्रोजेक्ट्स को भी बंद कर दिया गया है, जिससे समाज के व्यापक हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 29 मार्च को शाम 4:30 बजे पी कम्युनिटी हॉल में कायस्थ पाठशाला की आमसभा बुलाई गई है। डॉ. सिन्हा ने पुराने सदस्यों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर ट्रस्ट विरोधी गतिविधियों का खुलकर विरोध करें।


